स्विट्ज़रलैंड अपने बैंकों के लिए सारी दुनिया में मशहूर है. खास तौर पर भारत में स्विस बैंकों को काले धन से जोड़कर देखा जाता है और आरोप लगते हैं कि भारत से बहुत सारे लोगों ने काला पैसा स्विस बैंकों में जमा करा दिया है. अक्सर स्विस बैंकों से काले धन की वापसी की मांग उठती रहती है. लेकिन, इन दिनों स्विट्ज़रलैंड के बैंक नहीं, वहां के नोट सुर्खियों में हैं. स्विट्ज़रलैंड में नोटों के डिज़ाइन बदलने जा रहे हैं और 2030 से वहां नए नोट छपने शुरू हो जाएंगे.
स्विट्ज़रलैंड की मुद्रा का नाम फ्रैंक (Franc) है. स्विस नेशनल बैंक ने वहां नए फ्रैंक नोटों के डिज़ाइन को मंज़ूरी दे दी है. इसके बाद अगले दशक में 10, 20, 50, 100, 500 और 1,000 फ्रैंक के नए नोट छपकर बाज़ार में आने लगेंगे.
सबसे महंगा 1000 फ्रैंक का नोट
इनमें सबसे ख़ास 1,000 फ्रैंक का नोट है. यह नोट दुनिया के सबसे महंगे नोटों में गिना जाता है. स्विट्ज़रलैंड के 1,000 फ्रैंक के एक नोट की कीमत $1,280 (एक हज़ार दो सौ अस्सी अमेरिकी डॉलर) के बराबर है. भारतीय रूपये में इसकी कीमत आज के समय में 1 लाख 10 हज़ार रुपये से भी ज्यादा बैठेगी. स्विट्ज़रलैंड का 1 फ्रैंक 117 भारतीय रुपये के बराबर होता है.
देखें नए नोटों के डिज़ाइन -
स्विट्ज़रलैंड के लोगों की पसंद है कैश
स्विट्ज़रलैंड ने नए नोटों के डिज़ाइन को इस बात के बावजूद मंजूरी दी है कि अब डिजिटल और मोबाइल पेमेंट के दौर में नकद या कैश की अहमियत घटती जा रही है. लेकिन, स्विस नेशनल बैंक के चेयरमैन एंटोन मार्टिन ने कहा कि स्विट्ज़रलैंड में नोटों का इस्तेमाल घटने के बावजूद उन्हें पसंद किया जाता है. मार्टिन ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा,"स्विस जनता अभी भी चाहती है कि उनके पास कैश पैसे रहें."
नए नोटों के डिज़ाइनों के लिए आवेदन मंगवाए गए थे और विजेता सिरीज़ के नोटों में पीले, लाल, हरे, नीले, भूरे और बैंगनी रंग के नोट शामिल हैं. नोटों पर स्विट्ज़रलैंड के महत्वपूर्ण स्थलों और सांस्कृतिक प्रतीकों को दर्शाया जाएगा.
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