मंगल ग्रह पर ये क्या हुआ? वैज्ञानिकों ने भी पकड़ा अपना सिर, आखिर कैसे आया तितली जैसा गड्ढा

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने मंगल ग्रह की एक अद्भुत तस्वीर साझा की है. यह तस्वीर मार्स एक्सप्रेस ऑर्बिटर से ली गई है.

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ब्रह्मांड के नौ ग्रहों में मार्स यानी मंगल ग्रह अपने अद्भुत रहस्यों से चर्चा में रहता है. इसकी अलग 'लाल' दुनिया है, जिसमें कई रहस्य छिपे हुए हैं. मंगल ग्रह को इसके लाल रंग का होने के चलते लाल ग्रह भी कहा जाता है. वैज्ञानिकों और खगोलविदों की इस ग्रह पर हमेशा नजर बनी रहती है. अब यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने मंगल ग्रह की ऐसी खूबसूरत तस्वीर शेयर की है, जिसे देखने के बाद आंखों पर यकीन करना मुश्किल हो जाएगा. ईएसए (ESA) के खगोलविदों ने मंगल ग्रह की सतह से एक ऐसी इमेज शेयर की है, जिसे 'मार्शियन बटरफ्लाई'  (Martian Butterfly) यानी 'मंगल ग्रह की तितली' का नाम दिया गया है.


मंगल ग्रह पर तितली जैसा गड्ढा (Martian Butterfly on Mars)
ईएसए ने मंगल ग्रह का जो वीडियो शेयर किया है, उसमें क्रेटर (तितली के पर) जैसी आकृति दिख रही है. इस तस्वीर को मार्स एक्सप्रेस ऑर्बिटर से लिया गया है. यह ग्रुप साल 2003 से मंगल ग्रह की स्टडी कर रहा है. यह क्रेटर आइडेअस फोसा (Idaeus Fossa Region) क्षेत्र में स्थित है. वीडियो में दिख रहा क्षेत्र मंगल ग्रह के उत्तरी निचले इलाकों में स्थित है. कई सालों पहले एक अंतरिक्ष चट्टान की वजह इस संरचना का निर्माण हुआ था. यह चट्टान सतह से बहुत कम कोण पर टकराई थी. इस टक्कर से ग्रह पर मौजूद तत्व उत्तर और दक्षिण की ओर उछलकर गए थे, जिसे तितली के दो पंखों वाली आकृति के रूप में देखा जा रहा है.  



क्या बोले रिसर्चर्स ( Scientists study clues in Martian surface)
ईएसए का कहना है कि मंगल ग्रह पर दिख रहा ये गड्ढा असामान्य रूप से अंडाकार है, जिस पर हल्के से पंख दिखाई दे रहे हैं.  ये निचले बाएं और ऊपरी दाएं भाग की ओर फैले हुए नजर आते हैं. यह गड्ढा पूर्व-पश्चिम में लगभग 20 किलोमीटर और उत्तर-दक्षिण में लगभग 15 किलोमीटर तक फैला हुआ है. यह संरचना मंगल ग्रह के इतिहास के बारे में बहुत कुछ बता सकती है. वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह की सतह पर मौजूद सुरागों का भी अध्ययन किया है. रिसर्चर्स का कहना है कि मंगल ग्रह पर दिख रहा ये गड्ढा नई और अहम भूवैज्ञानिक जानकारी देता है.

इससे यह पता चलता है कि कैसे कोणीय प्रभाव मंगल ग्रह की सतह को आकार दे सकते हैं. ईएसए ने इस गड्ढे के आसपास लिक्विड पदार्थ के बारे में भी बताया है. उनका कहना है कि यकीनन यह पदार्थ पानी या बर्फ के साथ मिला होगा. क्या इसका मतलब यह हो सकता है कि यहां पहले कभी ज्वालामुखी या फिर तापीय गतिविधि हुई थी?



 

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