बिहार में एक छात्र को 100 नंबर के पेपर में 151 नंबर दे दिए गए, रिजल्ट देख छात्र हुआ हैरान

शिक्षा के मामले में बिहार हमेशा से मज़ाक का पात्र रहा है. 3 साल की पढ़ाई के लिए छात्रों को 5 साल का इंतज़ार करना पड़ता है. संगीत विषय में टॉप करने वाले छात्र को संगीत की जानकारी नहीं है. ऐसे कारनामे होते रहे हैं.

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शिक्षा के मामले में बिहार (Education in Bihar) हमेशा से मज़ाक का पात्र रहा है. 3 साल की पढ़ाई के लिए छात्रों को 5 साल का इंतज़ार करना पड़ता है. संगीत विषय में टॉप करने वाले छात्र को संगीत की जानकारी नहीं है. ऐसे कारनामे होते रहे हैं. अभी हाल ही में बिहार के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) में स्नातक के एक छात्र को हाल में जारी परीक्षा परिणाम में अधिकतम अंकों से अधिक अंक प्राप्त होने का हैरतअंगेज मामला सामने आया है. इस छात्र को 100 अंक में से 151 अंक प्राप्त हो गए हैं. इस कारण फिर से बिहार का मज़ाक उड़ रहा है.

दरभंगा के एलएनएमयू के उस छात्र ने कहा, ‘‘मैं परिणाम देखकर वास्तव में हैरान था. मैंने बीए ऑनर्स की भाग द्वितीय परीक्षा में राजनीति विज्ञान के पेपर (चतुर्थ) में 100 में से 151 अंक प्राप्त किए. हालांकि यह एक वैकल्पिक अंकपत्र है लेकिन अधिकारियों को इसे जारी करने से पहले इसकी जांच करनी चाहिए थी. चूंकि यह टाइपिंग की गलती थी इसलिए मुझे संशोधित अंकपत्र जारी किया गया.''

एक अन्य छात्र जिसे बीकॉम भाग-दो में लेखांकन और वित्त (पेपर-4) में शून्य अंक मिले हैं, को अगली कक्षा में प्रोन्नत किया गया है छात्र ने कहा, ‘‘विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि यह एक टाइपिंग त्रुटि थी और उन्होंने मुझे एक संशोधित अंकपत्र जारी किया है.''

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एलएनएमयू के रजिस्ट्रार प्रोफेसर मुश्ताक अहमद ने इस मामले में ‘पीटीआई-भाषा' को बताया, ‘‘टाइपिंग की गलतियों को सुधारने के बाद दो छात्रों को नई मार्कशीट जारी की गई. यह केवल टाइपिंग संबंधी त्रुटियां थीं और कुछ नहीं.''

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