देश के पूर्वोत्तर के राज्यों में बांस की काफी उपज और उसके करिश्माई इस्तेमाल ने सबका ध्यान खींचा है. असम के जोरहाट जिले में एक बांस कारीगर ने बांस की मदद से पूरा गांव ही बना डाला है. बैंबू मैन (Bamboo Man) के नाम से मशहूर मोहन सैकिया के कारण इस गांव को भी लोग बैंबू विलेज ही कहने लगे हैं. शिवसागर इलाके में इस गांव को और सैकिया के हाथों के जादू को देखने के लिए देश और दुनिया भर के सैलानी पहुंचते हैं.
बैंबू विलेज में बांस से बना रोजमर्रा की जरूरतों का सारा सामान
बैंबू विलेज के रूप में गांव के पॉपुलर होने की वजह वहां बांस की ज्यादा उपज या कारोबार नहीं, बल्कि वहां रोजमर्रा की लाइफ में इस्तेमाल किए जाने वाले ज्यादातर या लगभग सभी सामान के बांसों से बना होना है. इन सभी सामानों को बनाने के पीछे गांव में ही रहने वाले बैंबू मैन मोहन सैकिया की बड़ी भूमिका है. बैंबू विलेज में जैकेट, किताब, कलम, चश्मा, कुर्सी, मेज, रैक, केतली, बर्तन, मोबाइल कवर, बेल्ट, बैग, स्ट्रॉ से लेकर रसोई तक के सामान बांस से बने हैं.
ग्रामीणों ने सबको दिखाई बांसों से की गई अद्भुत कलाकारी
बांस की इस अद्भुत कलाकारी के बारे में मोहन सैकिया ने आसपास के कई और ग्रामीणों को ट्रेनिंग दी है. उनके काम को देखकर सोशल मीडिया पर भी लोग हैरान और मोटिवेट होते हैं. बैंबू विलेज ने केंद्र और राज्य सरकारों का भी ध्यान खींचा है. देश के कई हिस्से में इसकी प्रदर्शनी भी लगी है. मोहन सैकिया कहते हैं, "सरकार ने बैंबू विलेज के लिए बहुत कुछ किया है... सरकार ने मुझे मेरे काम के लिए मदद भी दी है, लेकिन अभी भी बहुत काम करना बाकी है."
बैंबू मैन ने लोगों से की बांस के स्पेशल आर्ट से जुड़ने की अपील
बैंबू मैन ने अपने अनोखे बैंबू विलेज के ग्रामीणों की मदद में कृषि क्षेत्र के लिए वाटर कनेक्शन और बिजली की जरूरत पर जोर दिया है. उन्होंने कहा, "बांस कारीगरों के लिए विकास कार्य से इस स्पेशल आर्ट को विकसित करने में मदद मिलेगी... मैं सरकार से बांस कारीगरों और लोगों के विकास के लिए और अधिक सुविधाएं और योजनाएं प्रदान करने का अनुरोध करूंगा. आप लोग भी बांस के काम से जुड़ें..."
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