भारत की सबसे ठंडी जगह और दुनिया की दूसरी सबसे ठंडी आबाद जगह के रूप में मशहूर द्रास (Drass), लद्दाख का एक छोटा-सा कस्बा है. यह जगह अपनी खूबसूरती के साथ-साथ बेहद कठोर मौसम के लिए भी जानी जाती है. यहां की ठंड सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि लोगों की रोज़मर्रा की जिंदगी की सबसे बड़ी चुनौती है. द्रास में सर्दियों के दौरान तापमान आमतौर पर -30 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है.
-30 डिग्री की ठंड में यहां रह रहे लोगों का सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है. यहां पानी कुछ ही सेकंड में जम जाता है और खुले में रखी कोई भी चीज़ बर्फ की तरह सख्त हो जाती है. सर्दियों में बर्फ इतनी ज्यादा गिरती है कि सड़कें पूरी तरह गायब हो जाती हैं और कई महीनों तक इस कस्बे का संपर्क बाहरी दुनिया से लगभग कट जाता है.
द्रास का नाम दुनिया के सबसे ठंडे इलाकों में तब शामिल हुआ, जब 1995 में यहां तापमान -60 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया. इसी वजह से द्रास को धरती पर इंसानों द्वारा बसाई गई दूसरी सबसे ठंडी जगह माना जाता है. इसके बावजूद यहां के लोग पीढ़ियों से रह रहे हैं और अपनी हिम्मत और जज़्बे से हर सर्दी का सामना करते हैं.
सर्दियों में द्रास पूरी तरह बर्फ की मोटी चादर से ढक जाता है. घरों की छतें, खेत, सड़कें और पहाड़ - सब कुछ सफेद दिखाई देता है. इस दौरान स्कूल, बाज़ार और सामान्य गतिविधियां सीमित हो जाती हैं. लोग पहले से ही खाने-पीने का सामान और ईंधन जमा कर लेते हैं, ताकि महीनों तक बाहर निकले बिना गुज़ारा किया जा सके.
हाल के सालों में द्रास अपनी ठंड और अनोखे जीवन के कारण एडवेंचर टूरिस्ट प्लेस बन गया. यहां बर्फ से ढके पहाड़, शांत वातावरण और स्थानीय लोगों की सादगी लोगों को खूब पसंद आती है.














