हम हिंदू हैं, बस शांति से जीने दो... बांग्लादेश में हमले के शिकार खोकोन दास की पत्नी का दर्द

हमलावरों ने पहले धारदार हथियारों से उन पर वार किया और फिर बर्बरता की सारी हदें पार करते हुए उनके सिर पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी. खोकोन ने अपनी जान बचाने के लिए पास के तालाब में छलांग लगा दी, जिसके बाद भीड़ इकट्ठा होते देख हमलावर मौके से फरार हो गए.

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  • बांग्लादेश के शरियतपुर जिले में हिंदू व्यवसायी खोकोनचंद्र दास पर तीन हमलावरों ने जानलेवा हमला किया था.
  • हमलावरों ने धारदार हथियारों से हमला करने के बाद उनके सिर पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी.
  • गंभीर हालत में खोकोन को पहले सदर अस्पताल और फिर ढाका मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है.
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ढाका:

जहां पूरी दुनिया 2026 के स्वागत के जश्न में डूबी थी, वहीं बांग्लादेश के शरियतपुर जिले (ढाका से 150 किमी दूर) में मानवता शर्मसार हो रही थी. बुधवार रात करीब 10 बजे, खोकोन चंद्र दास नामक एक हिंदू व्यवसायी जब अपनी दवा और मोबाइल बैंकिंग की दुकान बढ़ाकर घर लौट रहे थे, तब तीन हमलावरों ने उन पर जानलेवा हमला बोल दिया.

सिर पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी

हमलावरों ने पहले धारदार हथियारों से उन पर वार किया और फिर बर्बरता की सारी हदें पार करते हुए उनके सिर पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी. खोकन ने अपनी जान बचाने के लिए पास के तालाब में छलांग लगा दी, जिसके बाद भीड़ इकट्ठा होते देख हमलावर मौके से फरार हो गए. स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें पहले सदर अस्पताल और फिर गंभीर हालत में ढाका मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया.

हमारा किसी से भी किसी मुद्दे पर कोई विवाद नहीं है. हमें समझ नहीं आ रहा कि मेरे पति को अचानक निशाना क्यों बनाया गया. हम हिंदू हैं. हम बस शांति से रहना चाहते हैं. हमलावर मुसलमान थे और पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है.

सीमा दास

पीड़िता

खोकन की हालत चिंताजनक 

ढाका मेडिकल कॉलेज के आईसीयू के बाहर खोकोन की पत्नी, सीमा दास, अपने तीन बच्चों के साथ न्याय की गुहार लगा रही हैं. NDTV से सिसकती हुई सीमा ने बताया कि उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी, फिर भी उनके पति को इतनी बेरहमी से निशाना बनाया गया. उन्होंने दो हमलावरों की पहचान कर ली है, जो स्थानीय बताए जा रहे हैं. खोकन की हालत चिंताजनक बनी हुई है. उनकी आंखों की सर्जरी की गई है और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उन्हें कई यूनिट खून चढ़ाया गया है. इस दुखद घड़ी में सांप्रदायिक सौहार्द की एक छोटी किरण तब दिखी जब उनके गांव से कुछ मुस्लिम पड़ोसी भी उनकी मदद के लिए अस्पताल पहुंचे और परिवार को संबल दिया. 

'क्या हमारा शांति से रहने का कोई अधिकार नहीं...'

सीमा दास का केवल एक ही सवाल है—"हम हिंदू हैं, क्या हमारा शांति से रहने का कोई अधिकार नहीं है" ढाका मेडिकल कॉलेज के अंदर एनडीटीवी से बात करते समय उन्होंने अपने सबसे छोटे बेटे को कसकर पकड़ रखा था.  उन्होंने कहा कि वे परिवार की मदद के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं और दावा किया कि यह कोई सांप्रदायिक मुद्दा नहीं है. हालांकि, अपने देश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "जांच चल रही है." 

अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के मामलों में चिंताजनक 

मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के तहत बांग्लादेश में हिंदुओं सहित अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी देखी जा रही है. इन घटनाओं ने न केवल स्थानीय स्तर पर भय का माहौल पैदा किया है, बल्कि वैश्विक मानवाधिकार संगठनों के बीच भी भारी आक्रोश पैदा कर दिया है. एक तरफ जहां मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस और उनके प्रशासनिक अधिकारी बार-बार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के दावे कर रहे हैं, वहीं धरातल से आने वाली रिपोर्टें इन दावों की पोल खोलती नजर आती हैं. मंदिर तोड़े जाने, व्यवसायों को निशाना बनाने और जानलेवा हमलों की खबरें सरकार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती हैं.

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