- अमेरिका और ईरान ने दो हफ्ते के लिए सीजफायर पर सहमति जताई है, लेकिन तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है
- इजरायल को अमेरिका और ईरान के बीच हुई सीजफायर डील से बाहर रखा गया, जिससे उसकी नाराजगी बढ़ी है
- डोनाल्ड ट्रंप के कड़े अल्टीमेटम के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर सहमति दी है
मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के बीच अमेरिका और ईरान सीजफायर के लिए सहमत हो गए हैं. दोनों देशों के बीच दो हफ्ते के सीजफायर का ऐलान भले ही हो गया हो, लेकिन इससे मिडिल ईस्ट का तनाव पूरी तरह खत्म होता नहीं दिख रहा है. इस सीजफायर डील से इजरायल खुश नहीं है. इसी का नतीजा है कि वो लगातार लेबनान पर हमले कर रहा है.
इजरायल को अंधेरे में रखा गया
'वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल सीजफायर के फैसले के पक्ष में नहीं है. इजरायल की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह यह है कि उसे अमेरिका और ईरान के बीच हुई सीजफायर की बातचीत से पूरी तरह बाहर रखा गया. इस समझौते पर आखिरी मुहर लगाने से पहले अमेरिका ने इजरायल से कोई विचार विमर्श नहीं किया. इसकी वजह से वो इससे नाखुश है.
ट्रंप का अल्टीमेटम और होर्मुज का खुलना
माना जा रहा है कि यह सीजफायर डोनाल्ड ट्रंप के उस कड़े अल्टीमेटम के महज 90 मिनट पहले हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि आज रात पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी. इस अहम डील के तहत, ईरान होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने पर सहमत हुआ है, जिससे दुनिया भर में तेल की रुकी हुई सप्लाई फिर से बहाल होने की उम्मीद है.
लेबनान के मुद्दे पर फंसा पेंच
भले ही सीजफायर के फैसले का इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने समर्थन किया है, लेकिन उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि यह सीजफायर लेबनान पर लागू नहीं होता. इजरायल ने लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खिलाफ अपने सैन्य अभियान जारी रखे हैं. आज लेबनान में इजरायली हमलों में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग घायल हैं. इजरायल के इस कदम के बाद ईरान ने कड़ा विरोध जताया है और धमकी दी है कि अगर लेबनान पर हमले जारी रहे तो वह अमेरिका के साथ हुए सीजफायर समझौते से पीछे हट जाएगा. ईरानी मीडिया के अनुसार, लेबनान में इजरायल के हमलों के बाद होर्मुज से जहाजों को गुजरना भी फिर रोक दिया गया है.
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ट्रंप ने किया इजरायल के हमलों का समर्थन
ईरान ने जिन 10 सूत्र अमेरिका के सामने रखे उसमें लेबनान पर हमले न करने की भी शामिल थी. लेकिन लेबनान में आज हमले पहले से कहीं ज्यादा हुए. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी लेबनान में इजरायल के जारी सैन्य अभियान का खुलकर बचाव किया है. मीडिया के एक सवाल का जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा कि हिज़्बुल्लाह को इस सीजफायर डील में शामिल नहीं किया गया था. उन्होंने कहा कि लेबनान के हमले इस डील का हिस्सा हैं और हर कोई जानता है कि यह एक अलग विवाद है, जिसे जल्द ही संभाल लिया जाएगा.
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