वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स पर अमेरिका ने नारको-टेररिज्म के आरोप लगाए हैं. आज उन्हें न्यूयॉर्क के दक्षिण जिले की फेडरल कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा. अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई के बाद शनिवार को मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया था.फेडरल कोर्ट के प्रवक्ता के मुताबिक मादुरो पर नारको-टेररिज्म (नार्को-आतंकवाद) और ड्रग तस्करी जैसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के आरोप तय किए गए हैं. इस मामले में मादुरो की पत्नी सिलिया फ्लोर्स को भी सहआरोपी बनाया गया है. दोनों को अमेरिकी जिला न्यायाधीश एल्विन के हेलरस्टीन की अदालत में पेश किया जाएगा. यह उन दुर्लभ मामलों में से एक है, जब किसी देश के शीर्ष नेता को दूसरे देश की अदालत में अपराधी की तरह पेश किया जाएगा. अमेरिका ने जो आरोप मादुरो पर लगाए हैं, उनमें उन्हें उम्रकैद तक की सजा हो सकती है.
मादुरो की गिरफ्तारी को राजनीतिक विश्लेषक सीधे-सीधे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बता रहे हैं. विश्लेषकों का कहना है कि कानून की जगह ताकत ने ले ली है. सिद्धांत की जगह पसंद-नापसंद ने ले ली है. बल प्रयोग को 'सही कदम' बताकर पेश किया जा रहा है. उनका मानना है कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा नहीं, बल्कि उसे धीरे-धीरे खत्म करने जैसा है. किसी मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष को गिरफ्तार करना अंतरराष्ट्रीय कानून में कहीं भी जायज नहीं है. लेकिन अमेरिका ने यह काम पहली बार नहीं किया है.
अमेरिकी विदेश नीति
सरकारें गिराना अमेरिकी विदेश नीति का हिस्सा रही हैं.ऐसे में वेनेज़ुएला पहला देश नहीं है, जहां अमेरिका ने परोक्ष या अपरोक्ष रूप से किसी नेता को सत्ता से बेदखल किया है. उसने इसी नीति के तहत 1953 में ईरान में प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेग की सरकार तख्तापलट के जरिए गिरा दी थी. इसी तरह से उसने 1954 में ग्वाटेमाला में लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई राष्ट्रपति जैकोबो अर्बेन्ज गुजमैन के नेतृत्व वाली सरकार को गिरवा दिया था. इसी तरह चिली में 1973 में राष्ट्रपति सल्वाडोर अलेंदे की लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई समाजवादी सरकार ऑगस्टो पिनोशे नाम के सैन्य जनरल के नेतृत्व में हुए सैन्य तख्तापलट में गिर गई. इसके बाद चिली में सैन्य तानाशाही की शुरुआत हुई.माना जाता है कि इसके पीछे भी अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए का हाथ था.
होंडुरास के पूर्व राष्ट्रपति ऑरलैंडो हर्नांडेज को मई 2021 में गिरफ्तार किया गया था.उन्हें अमेरिका में 540 महीने की सजा सुनाई गई थी.
वेनेजुएला पर की गई कार्रवाई और मादुरो की गिरफ्तारी से पहले अमेरिका ने मई 2021 में होंडुरास के पूर्व राष्ट्रपति ऑरलैंडो हर्नांडेज को गिरफ्तार कर लिया था. हर्नांडेज को भी एक छोटे सैन्य ऑपरेशन के बाद गिरफ्तार किया गया था.अपनी गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले ही हर्नांडेज होंडुरास के राष्ट्रपति पद से रिटायर हुए थे.वो 2014 से गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले तक होंडुरास के राष्ट्रपति रहे.उन पर अमेरिका में 500 टन अफीम की तस्करी अमेरिका में करने के आरोप लगाए गए थे.इन आरोपों में उन्हें 450 महीने की सजा सुनाई गई थी. मादुरो और ट्रंप के संबंध तो कभी अच्छे नहीं रहे. लेकिन ट्रंप और हर्नांडेज के संबंध तो मधुर नहीं थे. इसके बाद भी ट्रंप ने पिछले साल दिसंबर में हर्नांडेज को आम माफी दे दी थी.
अमेरिका का ऑपरेशन पनामा
इससे पहले अमेरिका ने करीब 36 साल पहले 1989 में पनामा पर हमला कर वहां के सैन्य नेता मैनुअल नोरिएगा को गिरफ्तार कर लिया था. हमले से पहले अमेरिका ने नोरिएगा पर ड्रग तस्करी का आरोप लगाया था. नोरिएगा वह नेता थे जिन्होंने 1985 में अमेरीकी वफादार निकोलस अर्दितो बार्लेटा को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया था.
लैटिन अमेरिका और कैरेबियन क्षेत्र में उसने कई देशों में हस्तक्षेप कर नेताओं को हटाया है. साल 1953 में ब्रिटेन ने अपनी कॉलोनी ब्रिटिश गुयाना (आज का गुयाना) का संविधान निलंबित कर दिया. इसके साथ ही उसने 133 दिन पुरानी छेदी जगन की लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को हटा दिया था. उसे डर था कि जगन की सामाजिक और आर्थिक सुधार की नीतियां उसके व्यापारिक हितों को नुकसान पहुंचाएंगी.इसके एक दशक बाद वहां अमेरिका भी सक्रिया हुआ, उसने बाद में आई जगन सरकार को कमजोर करने के लिए गुप्त अभियान चलाया. वहां 1964 में कराए गए चुनाव में भारी धांधली हुई. इसमें जगन के प्रतिद्वंद्वी फोर्ब्स बर्नहम सत्ता में आए. वहीं 2004 में हैती के राष्ट्रपति जीन बर्ट्रांड एरिस्टाइड को सत्ता से हटाकर अफ्रीका भेज दिया गया. एरिस्टाइड ने इसे अमेरिका द्वारा किया गया तख्तापलट और अपहरण बताया था.
अमेरिकी सैनिकों ने इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को 13 दिसंबर, 2003 को पकड़ लिया था.
अमेरिका इराक की सद्दाम हुसैन की सरकार पर रासायनिक और परमाणु हथियार रखने का आरोप लगाता था. उसने अमेरिका पर हमला कर दिया था.अमेरिकी सुरक्षा बलों ने इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को 13 दिसंबर, 2003 को पकड़ लिया था. उन पर एक इराकी अदालत में चले मुकदमे में फांसी की सजा सुनाई गई. उन्हें दिसंबर 2006 में फांसी दे दी गई थी.
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