- अश्विनी वैष्णव ने दावोस में कहा कि भारत अगले कुछ वर्षों में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा
- IMF की गीता गोपीनाथ ने कहा कि भारत की 2028 या उससे पहले ही इस उपलब्धि को हासिल कर सकता है
- वैष्णव ने इस दौरान कहा कि इस वक्त भारत के लिए चिंता की एकमात्र वजह अमीर देशों पर कर्ज का बढ़ता बोझ है
स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक के एक सत्र में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भरोसा जताया कि भारत अगले कुछ वर्षों में निश्चित रूप से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. इसी चर्चा में शामिल IMF की फर्स्ट डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने भी इससे सहमति जताते हुए कहा कि भारत 2028 या उससे भी पहले इस अहम मुकाम को हासिल कर सकता है.
वैष्णव ने बताया, किससे सतर्क रहना होगा
वैष्णव ने इस दौरान कहा कि इस वक्त भारत के लिए चिंता की एकमात्र वजह अमीर देशों पर कर्ज का बढ़ता बोझ है. उन्होंने आशंका जताई कि अगर विकसित देशों में कर्ज का यह संकट गहराता है तो इसका भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसे लेकर सतर्क रहने की जरूरत है.
अश्विनी वैष्णव ने वैश्विक ऋण संकट पर चिंता जाहिर करते हुए जापान का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि अगर विकसित देशों में बॉन्ड मार्केट या ऋण को लेकर बड़े पैमाने पर उथल-पुथल होती है तो हमें यह देखना होगा कि हमारी अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर होगा. हालांकि फिलहाल भारत की स्थिति काफी मजबूत है.
गीता गोपीनाथ ने बताया, असली चुनौती क्या
आईएमएफ की डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर गीता गोपीनाथ ने कहा कि भारत के लिए तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना कोई बहुत बड़ी चुनौती नहीं है. असली चुनौती देश की प्रति व्यक्ति आय को बढ़ाना है ताकि आम नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार आ सके.
गीता गोपीनाथ ने विकास दर के गणित का हवाला देते हुए कहा कि जर्मनी और जापान की तुलना में भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार काफी तेज है. उन्होंने कहा कि मौजूदा अनुमानों के हिसाब से 2028 तक भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. अगर जीडीपी के आंकड़े अनुकूल रहे तो यह उपलब्धि उससे पहले भी हासिल हो सकती है.
भारत की तरक्की की 4 वजहें
केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने भारत में पिछले दशक में व्यापक बदलाव आया है. यह सब सोची समझी रणनीति और स्पष्ट लक्ष्यों के साथ किए गए कार्यों का परिणाम है. उन्होंने बताया कि भारत की प्रगति मुख्य रूप से चार स्तंभों पर टिकी है-
- भौतिक, डिजिटल और सामाजिक बुनियादी ढांचे में सार्वजनिक निवेश
- समावेशी विकास, जिसमें समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने का प्रयास किया गया है.
- मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन
- प्रक्रियाओं का सरलीकरण करना
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इन प्रयासों और तकनीकी प्लेटफॉर्म की मदद से भारत अगले पांच वर्षों में 6 से 8 प्रतिशत की रियल ग्रोथ दर्ज करेगा. इस दौरान मुद्रास्फीति 2 से 4 प्रतिशत के बीच मध्यम रहेगी और नॉमिनल ग्रोथ 10 से 13 फीसदी तक रहने का अनुमान है जिससे समाज के हर तबके को फायदा होगा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता सबसे गरीब व्यक्ति की सुरक्षा है.
विकसित राष्ट्र बनने को क्या करें, बताया
गीता गोपीनाथ ने भारत में हुए सुधारों और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की तारीफ की, लेकिन साथ ही 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के लिए निरंतर सुधारों की जरूरत भी बताई. गोपीनाथ ने भूमि अधिग्रहण और न्यायिक सुधारों को मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की बाधाओं को दूर करने के लिए जरूरी बताया. उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र द्वारा पारित श्रम सुधारों को राज्यों द्वारा आगे बढ़ाया जाना चाहिए और कामगारों की स्किल बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए.
सबसे बड़ी चुनौती क्या, मित्तल ने बताया
इसी पैनल में उद्योगपति सुनील भारती मित्तल ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता की सराहना की. उन्होंने कहा कि व्यापार जगत के लिए एक अनुकूल माहौल और स्थिर सरकार बहुत जरूरी है, जो इस वक्त भारत में मौजूद है, हालांकि वैश्विक स्तर पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा एक बड़ी चुनौती जरूर है.
मित्तल ने कहा कि चीन के पास अमेरिका जैसा बड़ा बाजार था, जो अब भारत के लिए उतना आसान नहीं है. भारत को अपने आंतरिक बाजार और यूरोपीय संघ जैसे क्षेत्रों के साथ व्यापार समझौतों पर ध्यान देना होगा. उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही अमेरिका के साथ भी बड़ा समझौता हो सकता है.
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