अभी चीन ने हमला कर दिया तो अमेरिका जंग हार जाएगा! ट्रंप की आर्मी ने खुद कहा- हम तो तैयार ही नहीं

US Army Air Defense System: अमेरिकी सेना ने माना है कि उसे चीन, रूस, ईरान और नॉर्थ कोरिया से बढ़ते खतरे के कारण एडवांस मिसाइल डिफेंस सिस्टम की जरूरत है.

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US Army Air Defense System: अपने एयर डिफेंस सिस्टम पर अमेरिकी सैनिक नाखुश

अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ी सच्चाई सामने आई है. अब तक दुनिया की सबसे ताकतवर मानी जाने वाली अमेरिका एयर डिफेंस सिस्टम असल में उतनी मजबूत नहीं है जितना समझा जाता था. यह बात खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सेना मान रही है. अमेरिकी रक्षा मंत्रायल के हेडक्वाटर यानी पेंटागन के अधिकारियों ने माना है कि यह सिस्टम बड़े हमलों, खासकर हाइपरसोनिक और क्रूज मिसाइलों से बचाने में लगभग नाकाम है. चीन, रूस और दूसरे देशों की बढ़ती सैन्य ताकत ने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है. इसी वजह से अब एक नए और महंगे “गोल्डन डोम” रक्षा सिस्टम की योजना बनाई जा रही है, जो भविष्य के खतरों से देश को बचा सके.

पेंटागन ने क्या माना?

सोमवार (स्थानीय समय) को अमेरिका के सीनियर रक्षा और सैन्य अधिकारियों ने 2027 के बजट को लेकर संसद के सामने गवाही दी. उन्होंने बताया कि चीन, रूस, ईरान और नॉर्थ कोरिया से बढ़ते खतरे के कारण एडवांस मिसाइल डिफेंस सिस्टम की जरूरत है. अधिकारियों ने चेतावनी दी कि दुश्मन देश अब “नॉन-बैलिस्टिक खतरे” विकसित कर रहे हैं, जिनमें हाइपरसोनिक और लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें शामिल हैं, जो सीधे अमेरिका को निशाना बना सकती हैं.

अमेरिका के युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ गुरुवार को सीनेट की आर्म्ड सर्विसेज सबकमेटी के सामने पेश होने वाले हैं. वह यबां पेंटागन के 1.5 ट्रिलियन डॉलर के बजट का समर्थन करेंगे और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम की योजना को सही ठहराएंगे. इस योजना में 175 से 185 बिलियन डॉलर की लागत वाला “गोल्डन डोम” सुरक्षा कवच शामिल है, जैसा कि द हिल की रिपोर्ट में बताया गया है.

अंतरिक्ष नीति के लिए अमेरिकी सहायक युद्ध मंत्री मार्क जे बर्कोविट्ज ने सोमवार को सीनेट में कहा कि मौजूदा अमेरिकी डिफेंस सिस्टम को ऐसे खतरों के लिए बनाया ही नहीं गया था. उन्होंने कहा, “हमारे पास जमीन पर आधारित एक सीमित, एक-लेयर वाला डिफेंस सिस्टम है, जिसे सिर्फ छोटे स्तर के हमलों के लिए बनाया गया था.” उन्होंने आगे कहा, “बैलिस्टिक मिसाइलों के अलावा अन्य हमलों के खिलाफ हमारी क्षमता बहुत सीमित है, और आज हमारे पास हाइपरसोनिक हथियारों या क्रूज मिसाइलों के खिलाफ कोई रक्षा नहीं है.”

बर्कोविट्ज के इस बयान से यह साफ होता है कि चीन जैसे देश अपनी मिसाइल ताकत, खासकर हाइपरसोनिक हथियारों में तेजी से बढ़त बना रहे हैं, जो पारंपरिक रक्षा सिस्टम से बच निकलते हैं. इन कमजोरियों को दूर करने के लिए अमेरिकी अधिकारी ट्रंप की “गोल्डन डोम” योजना का समर्थन कर रहे हैं. इसमें अंतरिक्ष में सेंसर, जमीन पर इंटरसेप्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से चलने वाले कमांड सिस्टम और डायरेक्टेड एनर्जी हथियार जैसी नई तकनीक शामिल होंगी.

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इस सिस्टम का उद्देश्य ड्रोन, क्रूज मिसाइल, हाइपरसोनिक हथियार और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे सभी खतरों से निपटना है और पूरे अमेरिका को सुरक्षा देना है. अमेरिकी स्पेस फोर्स के जनरल माइकल ए गुएटलाइन इस प्रोग्राम को देख रहे हैं. उन्होंने कहा कि हालात तेजी से बदल गए हैं. उन्होंने कहा, “एक पीढ़ी में पहली बार हमारे देश की सुरक्षा का मार्जिन खत्म हो गया है.” उन्होंने यह भी कहा कि “आज अमेरिका का मुख्य क्षेत्र खुला हुआ है और पर्याप्त सुरक्षा नहीं है.”

अधिकारियों ने बताया कि 2028 तक इस सिस्टम को शुरू करने का लक्ष्य है, लेकिन इसकी लागत 175 से 185 बिलियन डॉलर के बीच हो सकती है.

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