ईरान के तेल नेटवर्क पर अमेरिका की बड़ी कार्रवाई, 15 मिलियन डॉलर जब्त करने की प्रक्रिया शुरू

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, मोहम्मद हुसैन शमखानी नाम का व्यक्ति कंपनियों और सहयोगियों का एक नेटवर्क चला रहा था, जो ईरानी तेल की बिक्री और शिपिंग करता था. आरोप है कि यह नेटवर्क तेल के असली स्रोत और ईरान से उसके संबंधों को छिपाने के लिए कई तरीके अपनाता था.

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  • अमेरिका ने ईरान के अवैध तेल नेटवर्क से जुड़ी 15.3 मिलियन डॉलर की राशि जब्त करने के लिए कार्रवाई शुरू की है.
  • आरोप है कि नेटवर्क अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर बिक्री और शिपिंग के लिए फर्जी कंपनियों का उपयोग करता था.
  • जब्त राशि में से अधिकांश वेलब्रेड कैपिटल और सी लीड शिपिंग जैसी कंपनियों के जरिए नेटवर्क संचालित किया गया था.
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अमेरिका ने एक बड़े कदम के तहत करीब 1.5 करोड़ डॉलर (15 मिलियन डॉलर) से अधिक की रकम जब्त करने के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू की है. अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि यह पैसा ईरान के अवैध तेल वितरण नेटवर्क से जुड़ा हुआ है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली का इस्तेमाल कर रहा था और इससे ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े संगठनों को मदद मिल रही थी. अमेरिकी न्याय विभाग ने बताया कि इस मामले में कोलंबिया जिले की अमेरिकी जिला अदालत में सिविल फॉरफीचर (संपत्ति जब्ती) से जुड़े मुकदमे दायर किए गए हैं. इन मुकदमों में आरोप लगाया गया है कि 15.3 मिलियन डॉलर से अधिक की रकम ऐसे नेटवर्क को फंड करने के लिए इस्तेमाल की गई, जो अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए ईरानी तेल की बिक्री और शिपिंग कर रहा था.

मुकदमे के अनुसार, यह पैसा अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (आईईईपीए) के तहत लगाए गए प्रतिबंधों के उल्लंघन को आसान बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था. साथ ही यह धनराशि नेशनल ईरानियन ऑयल कंपनी, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) और उसकी कुद्स फोर्स (आईआरजीसी-क्यूएफ) जैसे संगठनों को प्रभाव और आर्थिक समर्थन देने से भी जुड़ी बताई गई है. अमेरिका ने आईआरजीसी और आईआरजीसी-क्यूएफ दोनों को पहले ही विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है.

ईरानी पेट्रोलियम के असली स्रोत को छिपाने का आरोप

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, मोहम्मद हुसैन शमखानी नाम का व्यक्ति कंपनियों और सहयोगियों का एक नेटवर्क चला रहा था, जो ईरानी तेल की बिक्री और शिपिंग करता था. आरोप है कि यह नेटवर्क तेल के असली स्रोत और ईरान से उसके संबंधों को छिपाने के लिए कई तरीके अपनाता था.

जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क ने फर्जी कंपनियों, शिपिंग ऑपरेशनों और फ्रंट फर्मों का इस्तेमाल किया ताकि ईरानी पेट्रोलियम के असली स्रोत को छिपाया जा सके और अंतरराष्ट्रीय लेन-देन आसानी से हो सके.

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) ने जुलाई 2025 में शमखानी पर प्रतिबंध लगाए थे. ओएफएसी के मुताबिक, मोहम्मद हुसैन शमखानी, अली शमखानी के बेटे हैं, जो ईरान के सर्वोच्च नेता के एक शीर्ष राजनीतिक सलाहकार माने जाते हैं. अली शमखानी पहले ईरान की नेशनल डिफेंस काउंसिल के प्रमुख भी रह चुके हैं.

ओएफएसी ने इस पूरे ऑपरेशन को जहाजों, शिपिंग कंपनियों और फ्रंट कंपनियों के एक विशाल नेटवर्क के रूप में बताया है, जो दुनिया भर में तेल की बिक्री से अरबों डॉलर का मुनाफा कमा रहा था. एजेंसी के मुताबिक, यह नेटवर्क अक्सर ईरान और रूस के कच्चे तेल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री से पैसा कमाता था, और इनका सबसे बड़ा खरीदार आमतौर पर चीन होता था.

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ओएफएसी ने यह भी कहा कि यह नेटवर्क अपनी गतिविधियों को छिपाने के लिए कई जटिल तरीकों का इस्तेमाल करता था ताकि इसका संबंध शमखानी परिवार, ईरान और रूस से सीधे तौर पर न जुड़ सके.

आरोपी ने आईआरजीसी को लाखों डॉलर की मदद पहुंचाई: बॉन्‍डी

अमेरिका की अटॉर्नी जनरल पामेला बॉन्डी ने कहा कि अमेरिका अपनी वित्तीय प्रणाली का इस्तेमाल प्रतिबंधित संगठनों की मदद के लिए बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा.

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उन्होंने आगे कहा कि आरोपी ने कथित तौर पर आईआरजीसी को लाखों डॉलर की मदद पहुंचाई और अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन किया, जिसके लिए उसे अब भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.

वहीं सहायक अटॉर्नी जनरल टाइसन ए. डुवा ने कहा कि यह मामला दिखाता है कि ईरान से जुड़े नेटवर्क किस तरह अमेरिकी बैंकिंग सिस्टम का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं. उन्होंने कहा कि शमखानी और उसके सहयोगियों ने गुप्त तरीके से अमेरिकी वित्तीय संस्थानों का इस्तेमाल कर खुद को अमीर बनाने और ईरान से जुड़े आतंकी नेटवर्क को फायदा पहुंचाने की कोशिश की.

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अधिकारियों के मुताबिक, जब्त की जाने वाली राशि में से करीब 12.97 मिलियन डॉलर वेलब्रेड कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड और उसकी सहायक कंपनी वेलब्रेड ट्रेडिंग डीएमसीसी के लिए इस्तेमाल होने थे. आरोप है कि इन कंपनियों को शमखानी और उसके सहयोगियों ने इस तरह से संचालित किया ताकि उनका ईरान से सीधा संबंध सार्वजनिक रूप से सामने न आए.

इसके अलावा लगभग 2.4 मिलियन डॉलर सी लीड शिपिंग प्राइवेट लिमिटेड और उसकी सहयोगी कंपनी सी लीड शिपिंग एजेंसी इंडिया प्राइवेट के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले थे. जांचकर्ताओं का कहना है कि इन कंपनियों को इस नेटवर्क के लिए शिपिंग सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस्तेमाल किया जा रहा था.

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