- अमेरिकी सेना ने ईरान की सीमा के भीतर घुसकर घायल पायलट को रेस्क्यू कर लिया
- अमेरिकी F-15E फाइटर जेट ईरान में मार गिराया गया था, जिसमें से एक पायलट लापता हो गया था
- इस ऑपरेशन में सैकड़ों स्पेशल ऑपरेशंस सैनिक, लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर और साइबर इंटेलिजेंस शामिल थी
ईरान की सरहद के भीतर घुसकर जख्मी पायलट को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल लेना किसी फिल्मी पटकथा जैसा लग सकता है, लेकिन अमेरिकी सेना ने इस इम्पॉसिबल मिशन को हकीकत में बदल दिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि ईरान में लापता हुए 'वेपन्स ऑफिसर' को एक बेहद साहसी ऑपरेशन के जरिए बचा लिया गया है. ट्रंप ने इसे अमेरिकी इतिहास के सबसे निडर मिशनों में से एक बताया है. यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब दो दिन पहले अमेरिका का एक F-15E फाइटर जेट ईरान के ऊपर मार गिराया गया था.
विमान में सवार एक सदस्य को तो पहले ही सुरक्षित निकाल लिया गया था, लेकिन दूसरा अधिकारी ईरान की दुर्गम पहाड़ियों में लापता हो गया. भूख-प्यास से जुझते हुए अमेरिकी पायलट ने अपने अधिकारियों को सिग्नल भेजा और ईरान में किसी फिल्मी हीरो की तरह दो दिनों तक सर्वाइव करता रहा.
सैकड़ों कमांडो ईरान में घुसकर ले आए लापता पायलट
इस मिशन की पेचीदगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें सैकड़ों स्पेशल ऑपरेशंस सैनिक, दर्जनों लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर और साइबर इंटेलिजेंस की मदद ली गई.
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, लापता अधिकारी पिछले दो दिनों से दुश्मन के इलाके में छिपा हुआ था. उसके पास एक बीकन और सुरक्षित कम्युनिकेशन डिवाइस था. इस डिवाइस के जरिए वह लगातार अपनी लोकेशन की जानकारी दे रहा था. उधर, ईरानी सेना ने भी पूरे इलाके को घेर रखा था और पायलट को पकड़ने के लिए स्थानीय लोगों को इनाम का लालच दिया जा रहा था.
ऑपरेशन रात के अंधेरे में शुरू हुई और सुबह की रोशनी तक चली. जैसे ही अमेरिकी बचाव दल अधिकारी के करीब पहुंचा वहां भीषण गोलीबारी शुरू हो गई, लेकिन भारी प्रतिरोध के बावजूद अमेरिकी सैनिकों ने अपने साथी को सुरक्षित निकाल लिया.
किन विमानों के साथ अमेरिकी फौजियों ने ईरान में मारी एंट्री?
अमेरिकी सेना ने HH-60W 'जॉली ग्रीन II' बचाव हेलीकॉप्टर, A-10 वॉरथॉग हमलावर जेट, HC-130 बचाव मिड-एयर टैंकर, F-35 स्टेल्थ जेट (सुरक्षित दूरी से), विशेष बल और लड़ाकू खोज और बचाव की विशेष इकाई का इस्तेमाल किया है. एक्सीयोस के मुताबिक, सिकोर्स्की HH-60W 'जॉली ग्रीन II' अमेरिकी वायु सेना के सबसे नए विशेष लड़ाकू खोज और बचाव (CSAR) हेलिकॉप्टर हैं.
- इन्हें इस बचाव अभियान का 'धाकड़' कहा जा रहा है.
- HH-60W जॉली ग्रीन II को पुराने हो चुके HH-60G पेव हॉक की जगह लेने के लिए डिज़ाइन किया गया है.
- इसमें रात और खराब मौसम के लिए उन्नत सेंसर लगे हैं. यही वजह रही कि ईरान से पथरीले और बंजर इलाके में रात को ऑपरेशन कामयाब रहा.
ये हेलिकॉप्टर गोलीबारी के बीच भी तेजी से लोगों को निकालने के लिए एक शक्तिशाली होइस्ट (उठाने वाला यंत्र) है. इसके दरवाज़े पर लगी बंदूकें लैंडिंग के दौरान नज़दीकी सुरक्षा प्रदान करती हैं और इसमें पैराट्रूपर्स और बचाव उपकरणों के लिए एक बड़ा केबिन है.
Source: US Media
खुद के विमान को अमेरिका ने क्यों उड़ाया?
पायलट को रेस्क्यू करने के बाद इस मिशन में एक बड़ा मोड़ तब आया जब कमांडो और बचाए गए अधिकारी को ले जाने वाले दो अमेरिकी ट्रांसपोर्ट प्लेन ईरान के एक सुदूर इलाके में फंस गए. हालात बिगड़ते देख कमांडरों ने तुरंत फैसला लिया और तीन नए विमानों को मौके पर भेजा.
उन्होंने यह भी बताया कि इस इलाके में ईरानी सरकार का विरोध करने वाले स्थानीय लोगों ने भी शायद अधिकारी को छिपने में मदद दी थी. CIA ने भी 'अनकन्वेंशनल असिस्टेड रिकवरी' के जरिए नागरिकों से संपर्क साधने में भूमिका निभाई.
राष्ट्रपति ट्रंप ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि दो दिनों में दो अलग-अलग पायलटों को दुश्मन के इलाके से बिना किसी अमेरिकी की जान गंवाए बचा लेना, अमेरिकी एयरफोर्स की काबिलियत का उदाहरण है.
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