भारत से लौट रहे ईरानी युद्धपोत पर टॉरपीडो हमले में 87 नौसैनिक मारे गए, अमेरिका ने जारी किया वीडियो

भारत के 'मिलान 2026' अभ्यास से लौट रहे ईरानी युद्धपोत 'IRIS Dena' को अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका तट के पास टारपीडो से डुबा दिया, जिसमें 87 नाविकों की मौत हो गई और 148 अब भी लापता हैं.

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  • हिंद महासागर में श्रीलंका के तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत को टारपीडो हमले से डुबो दिया
  • इस हमले में कम से कम 80 लोगों के मारे जाने की खबर है और 148 नाविक अभी भी लापता
  • IRIS देना भारत में नेवी एक्सरसाइज मिलान 2026 में भाग लेने के बाद अपने देश लौट रहा था
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अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब बेहद खतरनाक मोड़ ले चुका है. हिंद महासागर में श्रीलंका के तट के पास एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के नेवी वॉरशिप 'आईआरआईएस देना' (IRIS Dena) को टारपीडो हमले से गहरे समंदर में डुबा दिया है, जिसमें कम से कम 87 लोगों के मारे जाने की खबर है. यह ईरानी वॉरशिप भारत में नेवी एक्सरसाइज 'मिलान 2026' (MILAN 2026) में भाग लेने के बाद वापस अपने देश लौट रहा था. अमेरिका ने इस हमले का वीडियो भी जारी किया है.

148 नाविक लापता, बचने की उम्मीद न के बराबर

श्रीलंकाई अधिकारियों ने जानकारी दी है कि उन्होंने इस भीषण हमले के बाद 'आईआरआईएस देना' के 32 क्रू सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया है. लेकिन अभी भी 148 अन्य नाविक अभी भी लापता हैं और उनके बचने उम्मीद बहुत कम है.

अमेरिका ने जारी किया हमले का लाइव वीडियो

ईरान पर किए गए हमले का एक लाइव वीडियो जारी किया है. अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस पनडुब्बी हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिका दुनिया में कहीं भी वार कर सकता है. हेगसेथ ने इसे क्वाईट डेथ यानी शांत मौत करार दिया. उन्होंने बताया कि ईरान का यह जहाज अंतरराष्ट्रीय समुद्र में खुद को सुरक्षित मान रहा था, लेकिन अमेरिकी टारपीडो ने उसे वहीं खत्म कर दिया.

हैरानी की बात यह है कि अमेरिकी वॉर डिपार्टमेंट ने इस हमले का एक ब्लैक एंड व्हाइट वीडियो भी जारी किया है, जिसमें पनडुब्बी के पेरिस्कोप से दूर हो रहे धमाके को साफ देखा जा सकता है. सैन्य इतिहास में किसी पनडुब्बी हमले के ऐसे 'रियल-टाइम' विजुअल जारी करना अपने आप में अभूतपूर्व है और यह युद्ध लड़ने के बदलते तरीकों को बयां करता है.

क्या अमेरिका कर रहा था जासूसी?

डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसा भी हो सकता है कि अमेरिकी पनडुब्बी ईरान से भारत तक इस जहाज के पूरे सफर में उसका पीछा कर रही थी. ईरानी वॉरशिप अमेरिका की इस पनडुब्बी को पेरिस्कोप की गहराई पर भी नहीं पकड़ सका, जो अमेरिकी नौसेना की ताकत और रणनीति को दर्शाता है.

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