- इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने कहा- पाकिस्तान को अमेरिका-ईरान सीजफायर वार्ता में भरोसेमंद मध्यस्थ नहीं मानते
- इजरायल का लक्ष्य दक्षिणी लेबनान से हिजबुल्लाह के आतंकवादी ढांचे को पूरी तरह खत्म करना है- राजदूत
- इजरायल ने लितानी नदी के दक्षिण में हिजबुल्लाह की मौजूदगी स्वीकार नहीं की और निरस्त्रीकरण की मांग की है
भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने ईरान और अमेरिका के बीच चल रही सीजफायर वार्ता में पाकिस्तान की मध्यस्थ की भूमिका पर संदेह जताया है. उन्होंने कहा कि इजरायली सरकार पाकिस्तान को एक “भरोसेमंद खिलाड़ी” के रूप में नहीं देखती. इजरायली दूत ने कहा कि अमेरिकी सरकार के अपने कारण हो सकते हैं जिनकी वजह से वह पाकिस्तान की “सेवाओं” का उपयोग कर रहा है, लेकिन इजरायली सरकार का लक्ष्य दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के आतंकवादी ढांचे को खत्म करना है.
उन्होंने न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा, “हम पाकिस्तान को एक भरोसेमंद खिलाड़ी नहीं मानते. मेरा मानना है कि अमेरिका ने अपने कारणों से पाकिस्तान की सहायता का उपयोग करने का फैसला किया है.” उन्होंने पाकिस्तान द्वारा कराए गए अमेरिका-ईरान सीजफायर की तुलना उस समय से की, जब ट्रंप की टीम ने कतर और तुर्की जैसे देशों के साथ मिलकर गाजा में युद्धविराम समझौते कराने की कोशिश की थी, जिनमें हमास के साथ समझौते भी शामिल थे.
सीजफायर में लेबनान क्यों नहीं शामिल?
रूवेन अजार ने हिजबुल्लाह और ईरान के साथ इजरायल के संघर्ष को अलग-अलग मुद्दा बताया. उन्होंने कहा कि ईरान के साथ अस्थायी युद्धविराम को समर्थन दिया जा सकता है, लेकिन दक्षिणी लेबनान को लेकर इजरायली सरकार का लक्ष्य वही बना रहेगा.
उन्होंने कहा: “इसका ईरान में चल रहे ऑपरेशन से कोई संबंध नहीं है. जब बात लेबनान की आती है, तो हमें ऐसी स्थिति बनानी होगी जिसमें दक्षिणी लेबनान से हिजबुल्लाह के आतंकवादी ढांचे को पूरी तरह साफ कर दिया जाए. यह लेबनानी सरकार की जिम्मेदारी है. जब बात ईरान की है, तो हमें उम्मीद है कि यह बातचीत उन शर्तों तक पहुंचेगी जो 15-प्वाइंट योजना का हिस्सा हैं.”
इजरायली दूत ने कहा कि इजरायल को अपनी उत्तरी सीमा की रक्षा करने का अधिकार है, क्योंकि वहां से हिजबुल्लाह के हमले होते हैं.
उन्होंने कहा: “पिछले कुछ घंटों में इजरायली वायुसेना ने एक बड़ा अभियान चलाया है. हमने पूरे लेबनान में 250 से ज्यादा हिजबुल्लाह आतंकवादियों को खत्म किया है. हम बहुत स्पष्ट हैं कि पिछले साल जो सीजफायर की शर्तें तय की गई थीं, उन्हें बनाए रखना होगा. हम लितानी नदी के दक्षिण में हिजबुल्लाह की मौजूदगी स्वीकार नहीं कर सकते. उन्हें निरस्त्र (हथियार छीनना) किया जाना चाहिए. और हम उम्मीद करते हैं कि लेबनानी सरकार ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी- सिर्फ बातों से नहीं बल्कि हिजबुल्लाह की क्षमताओं को खत्म करके, ताकि हमें यकीन हो सके कि उत्तर में हमारे समुदायों पर फिर हमला नहीं होगा.”
अमेरिका-ईरान सीजफायर पर राजदूत ने क्या कहा
रूवेन अजार ने ईरान के साथ युद्धविराम के बारे में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह बातचीत दो बड़े खतरों को खत्म करने की ओर ले जाएगी. उनके अनुसार ये खतरे हैं- ईरान का परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल का उत्पादन.
उन्होंने कहा: “हमने आधिकारिक रूप से कहा है कि हम इस युद्धविराम का समर्थन करते हैं, और अब अमेरिका के नेतृत्व में बातचीत होने वाली है. मुझे लगता है कि यह एक बहुत अच्छा संकेत है.”













