अमेरिका-ईरान वार्ता छोड़िए... पहले समझिए आखिर फारस की खाड़ी में ही क्यों भरा है इतना तेल और गैस?

फारस की खाड़ी में तेल और गैस के विशाल भंडार करोड़ों वर्षों की भूगर्भीय हलचलों और प्राकृतिक संरचनाओं का नतीजा हैं. अभी भी फारस की खाड़ी में अरबों बैरल तेल और ट्रिलियन क्यूबिक मीटर गैस छिपी है, जिसे नई तकनीकों से निकाला जा रहा है.

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ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में वार्ता पूरी नहीं होने के बाद दुनियाभर में होर्मुज से निकलने वाले तेल और गैस वाले जहाजों के लिए एक बार फिर अनिश्चितता बरकरार है. आपने अक्सर सुना होगा कि अरब देशों के पास अथाह तेल है, लेकिन क्या कभी सोचा है कि कुदरत ने इसी खास हिस्से पर इतनी मेहरबानी क्यों दिखाई है? आखिर क्या वजह है कि दुनिया के कुल तेल भंडार का लगभग आधा हिस्सा और गैस का 40% हिस्सा पृथ्वी के महज 3% इलाके में सिमटा हुआ है? 

यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि करोड़ों साल की भूगर्भीय हलचलों और कुदरत की एक बेहद सटीक 'केमिस्ट्री' का नतीजा है. फारस की खाड़ी की जमीन के नीचे छिपे इस खजाने के पीछे सबसे बड़ा हाथ यहां की अनोखी भौगोलिक बनावट का है. यहां के एक-एक कुएं से रोजाना रूस या नॉर्थ सी के मुकाबले दो से पांच गुना ज्यादा तेल निकलता है. 

वैज्ञानिकों के लिए यह क्षेत्र आज भी किसी अजूबे से कम नहीं है, जहां 'घवार' जैसे विशाल तेल क्षेत्र और 'साउथ पार्स' जैसे दुनिया के सबसे बड़े गैस भंडार मौजूद हैं.

Photo Credit: AFP

करोड़ों साल पुराने अतीत में छिपा है जवाब

इस कहानी की शुरुआत लगभग 3.5 करोड़ साल पहले हुई थी. फारस की खाड़ी उस जगह पर स्थित है जहां दो विशाल टेक्टोनिक प्लेटें अरब प्लेट और यूरेशियन प्लेट आपस में टकरा रही हैं. इस जबरदस्त टकराव के कारण जमीन के अंदर ऐसी संरचनाएं बनीं, जो तेल और गैस को सोखने और सहेजने के लिए बिल्कुल सही थीं. 

ईरानी हिस्से में इस टक्कर से 'जाग्रोस' पर्वतमाला बनी, जहां चट्टानों के मुड़ने से प्राकृतिक चैंबर बन गए. वहीं अरबी हिस्से में जमीन के भीतर विशाल गुंबद जैसी आकृतियां तैयार हुईं. ये हजारों किलोमीटर तक फैली हैं.

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  • अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार, लाखों साल पहले यह पूरा इलाका एक उथले और शांत समुद्र के नीचे था.
  • इस समुद्र में भारी मात्रा में समुद्री जीव, प्लवक और शैवाल (Algae) मौजूद थे.
  • जब ये जीव मरकर समुद्र की तलहटी में जमा हुए, तो समय के साथ उन पर तलछट की परतें चढ़ती गईं.
  • इन अवशेषों को सड़ने के बजाय उच्च तापमान और भारी दबाव के बीच दबने का मौका मिला, जिसने धीरे-धीरे उन्हें हाइड्रोकार्बन यानी तेल और गैस में बदल दिया.

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'सोर्स रॉक्स' की खासियत है असली वजह?

तेल बनने के लिए चट्टानों में कम से कम 2% कार्बनिक पदार्थ होना जरूरी है, लेकिन फारस की खाड़ी की चट्टानों में यह मात्रा 1% से लेकर 13% तक पाई जाती है. यहां की 'सोर्स रॉक्स' इतनी मोटी और समृद्ध हैं कि वे लगातार भारी मात्रा में तेल पैदा करती रहीं. इतना ही नहीं, ईरान की चूना पत्थर वाली चट्टानें स्पंज की तरह काम करती हैं. इन चट्टानों के बीच छोटे-छोटे छेद और दरारें हैं. इनमें तेल और गैस बड़ी आसानी से जमा हो जाते हैं और जरूरत पड़ने पर आसानी से बाहर भी निकल आते हैं.

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फारस के इलाके में तेल का भंडार सुरक्षित रहने का एक और बड़ा कारण 'कैप रॉक्स' हैं. तेल और गैस हल्की होने के कारण ऊपर की तरफ भागने की कोशिश करते हैं, लेकिन यहां उनके ऊपर नमक और कठोर पत्थरों की ऐसी अभेद्य परतें थीं, जिन्होंने इस खजाने को लाखों सालों तक जमीन के अंदर कैद रखा. यही वजह है कि यहां तेल का रिसाव कम हुआ और भंडारण बढ़ता चला गया.

अभी और कितना तेल है बाकी?

सौ साल से ज्यादा समय तक लगातार ड्रिलिंग और उत्पादन के बावजूद, वैज्ञानिकों का मानना है कि फारस की खाड़ी का खजाना अभी खत्म नहीं हुआ है. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुमानों के मुताबिक, इस इलाके में अभी भी अरबों बैरल तेल और ट्रिलियन क्यूबिक मीटर गैस ऐसी चट्टानों में छिपी हो सकती है, जिन्हें अभी तक ढूंढा नहीं गया है. 

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नई तकनीकों जैसे हॉरिजॉन्टल ड्रिलिंग और फ्रैकिंग के जरिए सऊदी अरब और यूएई अब उन हिस्सों से भी तेल निकालने की कोशिश कर रहे हैं जो पहले पहुंच से बाहर थे.

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