- ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने सेना और कूटनीतिक टीमों पर नियंत्रण कर लिया है- रिपोर्ट
- अमेरिका ने होर्मुज में ईरानी कार्गो जहाज पर हमला कर स्थिति को और जटिल बना दिया, जिससे कट्टरपंथी मजबूत हुए हैं
- IRGC के कमांडर अहमद वाहिदी और मोहम्मद बाघेर जोलघदर ने मिलकर नेतृत्व संभाला है
US Iran War Updates: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ वार्ता के बीच सैन्य दबाव बनाने की कोशिश करके अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है. ईरान से शांति समझौता करने की उम्मीद लगातार कम होती जा रही है. ईरान की स्पेशल फोर्स- इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कट्टरपंथियों ने बीते विकेंड (शनिवार-रविवार) में ईरान की सेना और कूटनीतिक बातचीत करने वाली टीमों पर लगभग पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है. यह जानकारी द न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में क्षेत्रीय विशेषज्ञों के हवाले से दी गई है.
अमेरिका ने होर्मुज में ईरान के कार्गो जहाज पर हमला करके स्थिति को और खराब कर दिया है. डोनाल्ड ट्रंप की सेना की यह कार्रवाई ईरान में कट्टरपंथी ताकतों को और मजबूत करेगी.
IRGC के कमांडर मेजर जनरल अहमद वाहिदी और उनके करीबी लोगों ने कथित तौर पर ईरान की नेतृत्व जिम्मेदारी संभाल ली है. इस अंदरूनी सत्ता बदलाव का संकेत होर्मुज जलडमरूमध्य में हाल की समुद्री झड़पों और अमेरिका के साथ तय शांति वार्ता को टालने के फैसले से मिलता है. वॉशिंगटन स्थित इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) ने कहा कि इस बदलाव का मतलब है कि नरपंथी सोच वाले नेताओं, जैसे विदेश मंत्री अब्बास अराघची, को किनारे कर दिया गया है. अराघची ने पहले ट्रंप प्रशासन से बातचीत के बाद इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से खोलने पर सहमति जताई थी, लेकिन IRGC ने इस फैसले को रद्द कर दिया और कहा कि अमेरिकी नाकाबंदी के जवाब में जलडमरूमध्य बंद ही रहेगा.
ईरान में क्या चल रहा?
विकेंड में तनाव तब बढ़ गया जब ईरान ने कम से कम तीन जहाजों को निशाना बनाया, जो इस जलमार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहे थे. इससे फारस की खाड़ी में सैकड़ों जहाज फंस गए, और यह साफ संदेश गया कि तेल का यह रास्ता IRGC की सख्त नाकाबंदी में है. वाहिदी और जोलघदर की साझेदारी का असर सीधे कूटनीति पर भी पड़ा है. इसी महीने की शुरुआत में जोलघदर को ईरानी बातचीत टीम में शामिल किया गया था, ताकि IRGC और सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जा सके.
द न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार, ISW ने टीम के अंदर मतभेद की बात भी कही. थिंक टैंक के मुताबिक, “जोलघदर ने IRGC के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें लगभग निश्चित रूप से वाहिदी भी शामिल हैं, को शिकायत भेजी कि अराघची ने बातचीत के दौरान अपनी सीमा से ज्यादा लचीलापन दिखाया, खासकर ‘एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस' के समर्थन को लेकर.”
इस अंदरूनी विवाद के बाद कार्रवाई भी हुई. ISW ने कहा, “जोलघदर के गुस्से के कारण तेहरान के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें IRGC इंटेलिजेंस संगठन के पूर्व प्रमुख और मोजतबा के करीबी हुसैन ताएब शामिल हैं, ने बातचीत करने वाली टीम को वापस तेहरान बुला लिया.” द न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अब वाहिदी मुख्य फैसले लेने वाले नेता बन गए हैं, साथ में मोजतबा खामेनेई भी हैं, जो हवाई हमलों में घायल होने के बाद से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं.
ISW का कहना है कि इस तरह की सत्ता व्यवस्था पश्चिमी देशों के साथ किसी भी गंभीर बातचीत को बहुत मुश्किल बना देती है, क्योंकि अराघची और गालिबाफ के पास फैसले लेने की असली ताकत नहीं है.
द न्यूयॉर्क पोस्ट ने यह भी बताया कि ये घटनाएं वॉशिंगटन के उस दावे को चुनौती देती हैं, जिसमें कहा गया था कि युद्ध के दौरान बड़े अधिकारियों की मौत के बाद ईरान की सरकार में सुधार हुआ है. अभी यह भी साफ नहीं है कि मंगलवार तक तय किया गया अमेरिका के साथ नाजुक युद्धविराम आगे जारी रहेगा या नहीं.













