जंग जारी है! ट्रंप की जिद्द से इस्लामाबाद वार्ता शुरू होने से पहले ही कैसे संकट में आ गई?

US Iran 2nd Round of Talks in Islamabad: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान ने होर्मुज की नाकेबंदी की ऐसी जिद्द पकड़ी है कि उनकी सेना ने ईरान के ही कार्गो जहाज पर हमला कर दिया है, उसे अपने कब्जे में ले लिया है.

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US Iran War: अमेरिका-ईरान में सीजफायर टूटने की कगार पर, वार्ता से पहले ही होर्मुज में हमला
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  • अमेरिका ने होर्मुज की नाकेबंदी के बीच ईरान के एक कार्गो जहाज पर हमला कर उसे कब्जे में ले लिया है, तनाव बढ़ा है
  • ईरान ने इस हमले को सीजफायर का उल्लंघन करार देते हुए बदला लेने की चेतावनी दी है और वार्ता से इंकार किया है
  • अमेरिका पाकिस्तान में दूसरे दौर की वार्ता के लिए टीम भेज रहा, लेकिन ईरान का वार्ता में शामिल होने से इनकार
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US Iran Talks in Islamabad: मिडिल ईस्ट में जंग फिर से शुरू होती दिख रही है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान ने होर्मुज की नाकेबंदी की ऐसी जिद्द पकड़ी है कि उन्होंने ईरान के ही कार्गो जहाज पर हमला करवा दिया है. इतना ही नहीं अमेरिका ने नाकेबंदी तोड़ने का आरोप लगाते हुए ईरान के इस जहाज को अपने कब्जे में ले लिया है. ईरान ने इसे सीजफायर का उल्लंघन करार दिया है और बदला लेने की बात कही है. इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच समझौते के लिए दूसरे दौर की बातचीत से पहले तनाव इस स्तर पर पहुंच चुका है कि इसे पहले ही संकट में माना जा रहा है. अमेरिका के इस हमले के पहले ही ईरान ने कह दिया था कि वो वार्ता के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान नहीं भेजेगा.

दरअसल ईरान अभी अमेरिका के साथ बातचीत में शामिल होने की योजना नहीं बना रहा है और यह बात ईरान की सरकारी मीडिया ने कहा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी टीम को सोमवार, 20 अप्रैल को पाकिस्तान जाने का आदेश दिया है, क्योंकि दोनों देशों के बीच हुए दो हफ्ते के युद्धविराम को खत्म होने में सिर्फ कुछ दिन बचे हैं.

अमेरिका की नाकेबंदी वाली जिद्द

ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिका की चल रही नाकाबंदी एक बड़ा विवाद का मुद्दा बनी हुई है. यह मामला तब और गंभीर हो गया जब रविवार को एक अमेरिकी युद्धपोत ने एक ईरानी जहाज पर गोली चलाई और उसे पकड़ लिया, क्योंकि वह जहाज नाकाबंदी से बचने की कोशिश कर रहा था. तेहरान ने चेतावनी दी कि वह इसका जवाब देगा. ईरान के सरकारी टीवी चैनल आईआरआईबी ने रविवार को ईरानी सूत्रों के हवाले से कहा कि “अभी ईरान-अमेरिका की अगली बातचीत में शामिल होने की कोई योजना नहीं है.”

वहीं फार्स और तस्नीम न्यूज एजेंसियों ने पहले गुमनाम सूत्रों के हवाले से कहा था कि “कुल मिलाकर माहौल बहुत सकारात्मक नहीं है.” उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत शुरू करने से पहले अमेरिका की नाकाबंदी हटाना जरूरी शर्त है. सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने भी नाकाबंदी और वॉशिंगटन की “अतार्किक और अव्यवहारिक मांगों” का जिक्र करते हुए कहा कि “इन हालात में सफल बातचीत की कोई साफ उम्मीद नहीं है.”

ईरान, अमेरिका और इजरायल- ये तीनों देश उस दो हफ्ते के युद्धविराम के खत्म होने से सिर्फ तीन दिन दूर हैं, जिसने 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के अचानक हमलों के बाद शुरू हुए मिडिल ईस्ट की जंग को रोका था. अब तक सिर्फ एक बार- 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में 21 घंटे की बातचीत हुई है, जो बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई, हालांकि उसके बाद नई बातचीत की तैयारी जारी रही.

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रविवार को डोनाल्ड ट्रंप ने एक पोस्ट में कहा, “हम एक बहुत ही सही और उचित समझौता दे रहे हैं, और मुझे उम्मीद है कि वे इसे मान लेंगे.” साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो ईरान के बिजली- पुल जैसे नागरिक ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) पर हमला किया जा सकता है.

पाकिस्तान में तैयारी लेकिन...

पाकिस्तान में बातचीत को लेकर अनिश्चितता के बावजूद, रविवार को इस्लामाबाद में सुरक्षा काफी बढ़ा दी गई. सरकार ने शहर में कई सड़कों को बंद कर दिया और ट्रैफिक पर पाबंदियां लगा दीं. पास के रावलपिंडी में भी ऐसे ही कदम उठाए गए. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी वार्ता टीम सोमवार शाम को पाकिस्तान की राजधानी पहुंचेंगे, हालांकि उन्होंने उनके नाम नहीं बताए.

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व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि इस टीम का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे. इसमें मिडिल ईस्ट के लिए अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जारेड कुश्नर भी शामिल होंगे. बातचीत में एक बड़ा मुद्दा ईरान के पास मौजूद उच्च स्तर तक समृद्ध (एनरिच्ड) यूरेनियम का भंडार है. शुक्रवार को ट्रंप ने कहा था कि ईरान ने लगभग 440 किलोग्राम यूरेनियम सौंपने पर सहमति जताई है. उन्होंने कहा, “हम इसे ईरान के साथ मिलकर निकालेंगे, बहुत सारी मशीनों (खुदाई करने वाली) के साथ.”

लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह यूरेनियम, जो पिछले साल जून में हुए 12 दिन के युद्ध के दौरान अमेरिकी बमबारी के मलबे के नीचे दबा माना जाता है, “कहीं भी नहीं भेजा जाएगा.” इसे अमेरिका को देने की बात “कभी बातचीत में उठाई ही नहीं गई.” रविवार को राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने सवाल उठाया कि ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम के “कानूनी अधिकार” को क्यों छोड़ना चाहिए.

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