अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस्लामाबाद में ईरानी डेलिगेशन के साथ 15 घंटों तक मैराथन बातचीत के बाद कहा है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत बेनतीजा रही है.वेंस ने कहा, "ये एक बुरी खबर है. बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है."
जेडी वेंस ने कहा, "हमारे कई मुद्दों पर गंभीर बहसें हुई हैं. लेकिन किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचने की वजह से हम वापस लौट रहे हैं."
ईरानियों के लिए ज्यादा बुरी खबर है: जेडी वेंस
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा, "ईरानियों के साथ हमारी कई अहम बातचीत हुई है. यह अच्छी खबर है. बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंचे हैं और मुझे लगता है कि यह अमेरिका से कहीं ज़्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है."
कहां बिगड़ गई बात?
जेडी वेंस ने वैसे तो विस्तार से नहीं बताया कि ईरानियों के साथ वार्ता कहां विफल हो गई है. हालांकि वेंस के बयान में न्यूक्लियर हथियार का जिक्र किया गया है.
अमेरिका उपराष्ट्रपति ने कहा, "सीधी सी बात यह है कि हमें यह पक्का वादा देखने की ज़रूरत है कि वे न्यूक्लियर हथियार नहीं बनाएंगे, और वे ऐसे तरीके नहीं अपनाएंगे जिनसे वे जल्दी न्यूक्लियर हथियार बना सकें."
ईरान की क्या मांगे हैं?
ईरान ने शर्तें रखी थी कि उनपर लगे सभी प्राथमिक और माध्यमिक अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाया जाए. इसके साथ ही केवल ईरान ही नहीं, बल्कि लेबनान (हिजबुल्लाह), इराक और यमन में भी हमलों को तुरंत रोका जाए. अमेरिका में फ्रीज हुई ईरान की अरबों डॉलर की संपत्ति को तुरंत रिलीज किया जाए. हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के नियंत्रण और वहां से गुजरने वाले जहाजों से 'ट्रांजिट शुल्क' लेने के अधिकार को मान्यता दी जाए. इसके साथ ही शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के लिए यूरेनियम संवर्धन का अधिकार बना रहे.
अमेरिका क्या चाहता है?
ईरान और अमेरिका की मांगे बेमेल हैं. यानी इसमें बीच का रास्ता निकालना बड़ी टेढ़ी खीर है. अमेरिका बगैर किसी शर्त के होर्मुज स्ट्रेट खुलवाना चाहता है. अमेरिका का कहना है कि वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत और स्थायी रूप से सुरक्षित खोला जाए.
इसके साथ ही ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अपनी सभी कोशिशों को पूरी तरह और सत्यापन योग्य (Verifiable) तरीके से बंद करना होगा.मिसाइल कार्यक्रम पर लगाम भी लगाना होगा. ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल विकास पर कड़े प्रतिबंध लगाने होंगे. ईरान क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों (Proxy Groups) को फंडिंग और हथियार देना बंद करना होगा. अमेरिका ने ये भी शर्त रखी थी कि ईरान में हिरासत में लिए गए अमेरिकी नागरिकों की तत्काल रिहाई हो.
यह भी पढ़ें: क्या गल्फ में बन रहा नया अलायंस, ईरान युद्ध में पाकिस्तान के मध्यस्थ बनने की कहीं ये वजह तो नहीं?














