- अमेरिका और ईरान के बीच लगभग चालीस दिनों से जारी जंग दो हफ्ते के लिए सीजफायर पर सहमति से रुकी है
- पाकिस्तान ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई लेकिन चीन ने ईरान को सीजफायर के लिए मनाने में अहम योगदान दिया
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की कि चीन ने ही ईरान को बातचीत के लिए प्रेरित किया था
US Iran Ceasefire Deal: अमेरिका और ईरान के बीच लगभग 40 दिनों से जारी जंग रुक गई है. दोनों देश 2 हफ्ते के सीजफायर के लिए राजी हो गए हैं. इस बीच एक बड़ी बात यह सामने आई है कि भले पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच बिचौलिए की भूमिक निभाई हो लेकिन ईरान को सीजफायर के लिए मनाने वाला देश चीन ही थी. इस बार पर खुद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी मुहर लगा दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने मंगलवार, 8 अप्रैल को न्यूज एजेंसी एएफपी से बात करते हुए इस बात की पुष्टि की कि चीन ने ही ईरान को सीजफायर समझौते पर सहमत होने और बातचीत की मेज पर लाने में मदद की है. इतना ही नहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने इस इंटरव्यू में कई और अहम सवाल के जवाब भी दिए हैं जैसे कि अगर 2 हफ्ते में परमानेंट सीजफायर पर बात नहीं बनती है तो क्या जंग फिर से शुरू हो जाएगी.
सवाल: क्या आप आज ईरान के साथ अपने शांति समझौते के बाद जीत का दावा कर सकते हैं?
राष्ट्रपति ट्रंप का जवाब: "पूर्ण और पूर्ण जीत. 100 प्रतिशत. इसके बारे में कोई सवाल नहीं ही नहीं है."
सवाल: ऐसा लगता है कि अभी भी बहुत सी बातों पर सहमति होनी बाकी है, उदाहरण के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य पर?
राष्ट्रपति ट्रंप का जवाब: "अच्छा, मुझे नहीं पता. हमारे पास कई प्वाइंट हैं. हम कुल 15-प्वाइंट पर बात कर रहे हैं, जिनमें से अधिकांश चीजों पर सहमति हो गई है. हम आगे देखेंगे कि क्या होता है. हम देखेंगे कि क्या यह वहां तक पहुंचता है."
सवाल: और यदि वे (ईरान) सहमत नहीं हुए तो क्या होगा, क्या आप अपनी धमकी पर वापस लौटेंगे?
राष्ट्रपति ट्रंप का जवाब: "अच्छा, यह तो आपको आगे पता चलेगा."
सवाल: क्या चीन इस समझौते में ईरान को मेज पर लाने में शामिल था?
राष्ट्रपति ट्रंप का जवाब: "मैंने हां सुना है. हां, वे थे."
सवाल: और (ईरान के पास मौजूद) यूरेनियम के बारे में क्या?
राष्ट्रपति ट्रंप का जवाब: "इसका पूरी तरह से ध्यान रखा जाएगा, अगर ऐसा नहीं होता तो मैं समझौता ही नहीं करता."
सवाल: क्या मैं यह पूछ सकता हूं कि यह कैसे किया जाएगा?
राष्ट्रपति ट्रंप का जवाब: "(अगर ऐसा नहीं होता तो) मैं समझौता नहीं करता. ठीक है, बहुत-बहुत धन्यवाद."













