- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर ईरान में युद्ध अपराध करने के आरोप लग रहे हैं
- अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार केवल सैन्य जरूरत के कारण ही नागरिक ठिकानों पर हमला किया जाना मान्य है
- ट्रंप ने ईरान के खिलाफ धमकी दी है कि वे देश को पाषाण युग में पहुंचा देंगे और अधिक विनाश करेंगे
US Iran War: क्या अमेरिका के राष्ट्रपति ईरान में वॉर क्राइम या युद्ध अपराध कर रहे हैं? जब जंग के नाम पर नागरिकों की जानबूझकर हत्या की जाए,अस्पतालों या स्कूलों पर हमला किए जाए या सैन्य आवश्यकता से अधिक विनाश किया जाए तो उसे युद्ध अपराध कहा जाता है. ट्रंप पर अब यही आरोप लग रहे हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की बिजली और पानी के प्लांट को नष्ट करने और 9 करोड़ आबादी वाले इस देश को पाषाण युग में पहुंचाने की धमकी दी है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा करके ट्रंप एक पुरानी परंपरा तोड़ रहे हैं. वे सिर्फ ऐसे कामों को स्वीकार ही नहीं कर रहे, बल्कि उन पर गर्व भी कर रहे हैं, जिन्हें संभावित युद्ध अपराध माना जा सकता है.
चलिए समझते हैं कि इस मुद्दे पर विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं, कैसे ट्रंप के यह कदम ईरान के आम नागरिकों की जिंदगी तबाह कर रहे हैं और क्या ट्रंप को इसके लिए कोई सजा मिल सकती है
ट्रंप के खिलाफ कैसे लामबंद हो रहे कानूनी एक्सपर्ट
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार हार्वर्ड, येल, स्टैनफोर्ड और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया जैसी यूनिवर्सिटी के 100 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों ने गुरुवार को जारी एक ओपन लेटर में कहा कि अमेरिकी सेना के काम और अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों के बयान “अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के उल्लंघन को लेकर गंभीर चिंता पैदा करते हैं, जिनमें संभावित युद्ध अपराध भी शामिल हैं.”
ट्रंप पर युद्ध अपराध के आरोप क्यों लग रहे?
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बने जिनेवा कन्वेंशन में युद्ध के नियम तय किए गए थे. इसके अनुसार उन चीजों को नष्ट करना मना है जो आम लोगों के जीवित रहने के लिए जरूरी हों. अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार बिजली घरों जैसे नागरिक ठिकानों पर हमला तभी किया जा सकता है जब यह साबित हो कि वे मुख्य रूप से सेना की मदद कर रहे हैं. 2024 में इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने रूस के चार सैन्य अधिकारियों पर यूक्रेन की बिजली व्यवस्था पर लगातार हमले करने के आरोप में मुकदमा चलाया था.
उधर ईरान ने बताया कि लगभग 100 साल पुराने एक मेडिकल रिसर्च केंद्र पाश्चर इंस्टीट्यूट को भी भारी नुकसान हुआ है. ट्रंप ने तेल के कुओं पर हमला करने की धमकी भी दी है. 1991 में पहले गल्फ युद्ध के दौरान जब इराक की सेना कुवैत से पीछे हट रही थी, तब उसने तेल के कुओं में आग लगा दी थी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत निंदा हुई थी.
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि ईरान पर “पूरा दिन आसमान से मौत और तबाही बरसेगी.” उन्होंने यह भी कहा कि वे बेकार के युद्ध नियमों को मानने से इनकार करेंगे.
जंग के पहले ही दिन अमेरिका ने ईरान में लड़कियों के स्कूल पर हमला किया था. इस मिसाइल हमले में 170 से अधिक लोग, अधिकतर छात्राएं, मारे गए. तेहरान में सबसे बड़े हॉस्पिटल (गांधी हॉस्पिटल) को भी निशाना बनाया गया.
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आम लोगों पर क्या असर होगा?
ह्यूमन राइट्स वॉच की वॉशिंगटन डायरेक्टर सारा यागर ने कहा कि अगर ईरान के बिजली घर नष्ट कर दिए गए, तो इससे आम लोगों को बहुत बड़ा नुकसान होगा. इससे अस्पतालों, पानी की सप्लाई और अन्य जरूरी सेवाओं की बिजली बंद हो जाएगी. उन्होंने कहा, “अमेरिकी सेना के पास ऐसे नियम होते हैं जो आम लोगों को नुकसान से बचाने के लिए बनाए गए हैं. लेकिन जब राष्ट्रपति इस तरह की भाषा बोलते हैं, तो यह संकेत मिलता है कि इन नियमों को मानना जरूरी नहीं है. यही इस समय को बहुत खतरनाक बनाता है.”
क्या ट्रंप को सजा मिल सकती है?
अगर अमेरिका युद्ध अपराध करता भी है, तो भी अभी के समय में ट्रंप, उनके रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और दूसरे अधिकारियों के लिए तुरंत कोई बड़ा खतरा नहीं दिखता.
ट्रंप सरकार ने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट को कमजोर करने की कोशिश की है, क्योंकि इस अदालत ने गाजा युद्ध के मामले में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था. विशेषज्ञों के अनुसार, कम से कम अभी के समय में ट्रंप को इसके लिए शायद कोई सजा नहीं होगी, क्योंकि उनकी सरकार उन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रही है जो नियमों और कानूनों को लागू करने का काम करती हैं.
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