- अमेरिकी सेना ने ईरान में अपने पायलटों के रेस्क्यू मिशन की पल-पल की जानकारी ट्रंप से जानबूझकर छिपाई- रिपोर्ट
- प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने ट्रंप को अपडेट न देकर उनके जल्दबाजी वाले रवैये से बचने की कोशिश की
- रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप पर सेना का भरोसा कम हो गया है और वे उनसे महत्वपूर्ण जानकारी छिपा रहे हैं
US Iran War: क्या अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बड़बोलेपन को देखकर अब वहां की सेना भी उनसे बाते छिपाने लगी है? क्या अमेरिका की सेना को डर है कि उनके 'कमांडर इन चीफ' यानी राष्ट्रपति शेखी बघारने के चक्कर में उसके सैन्य मिशन को ही खतरे में डाल सकते हैं? अबतक ऐसे सिर्फ कयास लगाए जा रहे थे लेकिन ईरान जंग के बीच एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जिसमें ठीक यही दावा किया गया है. द वाल स्ट्रीट जनरल की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि जब ईरान में गिरे अपने पायलट को अमेरिकी सेना रेस्क्यू करने के लिए मिशन चला रही थी तब जानबूझकर ट्रंप को अपडेट नहीं दिया गया. रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के कई देर बाद उन्हें जानकारी दी गई.
ट्रंप को मिशन अपडेट देने से बच रहे अमेरिकी सैन्य अधिकारी- रिपोर्ट
द वाल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के अनुसार 3 अप्रैल की दोपहर के तुरंत बाद राष्ट्रपति ट्रंप को पता चला कि ईरान में एक अमेरिकी जेट को मार गिराया गया है, जिसमें दो वायुसैनिक लापता हैं. ट्रंप अपने सहयोगियों पर घंटों तक चिल्लाते रहे. उन्होंने बार-बार कहा कि यूरोपीय देश मदद नहीं कर रहे हैं. उन्हें 1979 का वो मंजर याद आने लगा जब ईरान में अमेरिकी दूतावास कर्मियों को बंधक बना लिया गया था.
ट्रंप ने मांग की कि सेना उन दोनों वायुसैनिक को तुरंत बचाकर लाए. लेकिन 1979 में सरकार के तख्तापलट के बाद से अमेरिकी सैनिक ईरान की जमीन पर उतरी नहीं थी. अमेरिकी सैनिक को पहले यह पता लगाने की जरूरत थी कि ईरानी इलाके में कैसे पहुंचा जाए और ईरानी सेना से अपनी सेना से कैसे बचा जाए.
रिपोर्ट के अनुसार एक एयरमैन को तुरंत रेस्क्यू कर लिया गया, लेकिन शनिवार देर रात तक ट्रंप को खबर नहीं मिली कि दूसरे एयरमैन को भी एक हाई रिस्क वाले रेस्क्यू मिशन के बाद बचा लिया गया है. यह रिपोर्ट दिखाती है कि ट्रंप पर अब उनकी सेना को भी भरोसा नहीं रह गया है.













