पूरी दुनिया में जब यह बहस छिड़ी है कि क्या AI इंसानी नौकरियों को निगल जाएगा, तब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने सबको चौंका दिया है. UAE अब दुनिया की पहली ऐसी सरकार बनने जा रही है, जहां अगले दो साल के भीतर आधे से ज्यादा सरकारी कामकाज इंसान नहीं, बल्कि 'Agentic AI' संभालेंगे. दुबई के शासक और UAE के उपराष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस ऐतिहासिक योजना का एलान किया.
उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि UAE के राष्ट्रपति के निर्देशों के तहत एक नया सरकारी मॉडल लॉन्च किया जा रहा है. इसके तहत अगले 24 महीनों के भीतर 50% सरकारी सेक्टर, सेवाएं और ऑपरेशंस पूरी तरह से ऑटोनॉमस सिस्टम यानी एआई एजेंट्स के जरिए संचालित होंगे.
एआई अब 'एग्जीक्यूटिव पार्टनर'
सरकार का मानना है कि एआई अब केवल टाइपिंग या डेटा ढूंढने वाला टूल नहीं रह गया है. शेख मोहम्मद के मुताबिक, "एआई अब विश्लेषण करता है, फैसले लेता है, उन्हें लागू करता है और रियल-टाइम में खुद में सुधार भी करता है." यही वजह है कि इसे अब एक 'एग्जीक्यूटिव पार्टनर' के तौर पर देखा जा रहा है. इसका सीधा मतलब यह है कि फाइलें आगे बढ़ाने से लेकर महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लेने तक में एआई की भूमिका मुख्य होगी, जिससे सरकारी कामकाज की रफ्तार कई गुना बढ़ जाएगी.
इस बदलाव के लिए सरकार ने बेहद सख्त समय सीमा तय की है. सिर्फ दो साल के भीतर इस लक्ष्य को हासिल करना होगा. हर सरकारी विभाग की कार्यक्षमता का आकलन अब इस आधार पर किया जाएगा कि उन्होंने कितनी जल्दी एआई को अपनाया, उसे कितनी गुणवत्ता के साथ लागू किया और सरकारी काम को फिर से डिजाइन करने में कितनी महारत हासिल की.
हर कर्मचारी को दी जाएगी 'AI ट्रेनिंग'
जब सरकारी कामकाज का आधा हिस्सा एआई के पास चला जाएगा, तो सबसे बड़ा सवाल कर्मचारियों के भविष्य पर उठता है. इस पर सरकार का कहना है कि वे अपने लोगों पर निवेश कर रहे हैं. योजना के तहत, हर संघीय कर्मचारी (Federal Employee) को एआई में महारत हासिल करने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी. सरकार का लक्ष्य दुनिया की सबसे मजबूत 'AI-संचालित कार्यक्षमता' तैयार करना है, जहां इंसान और मशीन मिलकर काम करेंगे.
इस महात्वाकांक्षी मिशन की निगरानी की जिम्मेदारी शेख मंसूर बिन जायद को सौंपी गई है. वहीं, मोहम्मद अल गरगावी की अध्यक्षता में एक समर्पित टास्कफोर्स बनाई गई है जो इस पूरी योजना के क्रियान्वयन को जमीन पर उतारेगी. सरकार का तर्क है कि तकनीक भले ही तेज हो रही है, लेकिन उनका मूल सिद्धांत 'ह्यूमन फर्स्ट' ही रहेगा.
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