ट्रंप के H-1B Visa फैसले का असर अब भारतीयों पर दिखना शुरू, गूगल और एप्पल ने दी चेतावनी

सोशल मीडिया पर होने वाली यह जांच, स्किल्ड फॉरेन वर्कर्स के लिए आव्रजन का प्रमुख मार्ग माने जाने वाले एच-1बी कार्यक्रम की नवीनतम जांच है, जिस पर ट्रंप प्रशासन की ओर से लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है.

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  • इस महीने भारत लौटे सैकड़ों एच-1बी वीजाधारकों के वीजा इंटरव्यू अगले वर्ष मार्च तक स्थगित कर दिए गए हैं
  • अमेरिकी विदेश विभाग की नई सोशल मीडिया जांच नीति के कारण वीजा प्रोसेसिंग में गंभीर देरी और बाधाएं आई हैं
  • गूगल और एप्पल जैसी बड़ी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को विदेश यात्रा से बचने की चेतावनी जारी की है
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इस महीने की शुरुआत में अपने वर्क परमिट रिन्यू कराने के लिए सैकड़ों एच-1बी वीजा होल्डर भारत लौटे थे, मगर अमेरिकी विदेश विभाग की नई सोशल मीडिया जांच नीति के चलते अचानक उनकी अपॉइंटमेंट अगले साल के लिए स्थगित कर दी गई हैं. इसके चलते वे फंस गए हैं.

कैसे फंसे भारतीय

दिसंबर के मध्य से अंत तक तय वीजा इंटरव्यू कथित तौर पर अगले वर्ष मार्च तक स्थगित कर दिए गए हैं. कई प्रमुख कानूनी फर्मों ने कहा है कि उनके सैकड़ों मुवक्किल भारत में फंसे हुए हैं. भारत में आव्रजन मामलों की वकील वीना विजय अनंत ने वाशिंगटन पोस्ट को बताया, "यह अब तक की सबसे बड़ी गड़बड़ी है. मुझे नहीं लगता कि इसका कोई समाधान है."

जॉब छूटने का डर

खबरों के मुताबिक, डेट्रॉइट के बाहरी इलाके में रहने वाले एक शख्स इस महीने एक शादी में शामिल होने के लिए भारत लौटे थे. उसकी 17 और 23 दिसंबर को दूतावास में मुलाकातें तय थीं, लेकिन अब उनकी समय सीमा समाप्त हो चुकी है. विशेषज्ञों को इस बात की चिंता है कि जिन कंपनियों के लिए ये प्रोफेशनल्स काम कर रहे है, वे उसके लौटने का कब तक इंतजार करेंगी.

अमेरिकी विदेश विभाग ने एक ईमेल के जरिए भारतीय प्रोफेशनल्स को बताया कि सोशल मीडिया पर नई जांच नीति के कारण उनके इंटरव्यू स्थगित कर दिए गए हैं. इस नीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी आवेदक अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा न बने.

अमेरिकी दूतावास की चेतावनी

भारत में अमेरिकी दूतावास ने 9 दिसंबर को एक चेतावनी जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि यदि किसी वीजा आवेदक को इंटरव्यू की तिथि में बदलाव की सूचना मिलने के बाद भी वह पहले से निर्धारित तिथि पर दूतावास पहुंचता है, तो उसे एंट्री नहीं दिया जाएगा. चेतावनी में कहा गया था, "यदि आपको ईमेल द्वारा सूचित किया गया है कि आपके वीजा इंटरव्यू की तिथि बदल दी गई है, तो भारत में स्थित अमेरिकी दूतावास आपकी नई तिथि पर आपकी सहायता करने के लिए तत्पर है. पहले से निर्धारित तिथि पर पहुंचने पर आपको दूतावास या वाणिज्य दूतावास में प्रवेश नहीं दिया जाएगा."

अप्रैल में अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) की एक रिपोर्ट के अनुसार, H-1B वीजा होल्डर्स में से 71 प्रतिशत भारत से हैं.

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गूगल और एप्पल ने क्या कहा

बिजनेस इनसाइडर ने आंतरिक मेमो का हवाला देते हुए बताया कि अमेरिकी टेक दिग्गज गूगल और एप्पल ने अपने कुछ कर्मचारियों को विदेश यात्रा न करने की चेतावनी दी है. ये चेतावनी अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में वीजा री-एंट्री प्रक्रिया में हो रही काफी देरी के बाद दी गई है, जो 12 महीने तक बढ़ सकती है. गूगल के एक्सटरनल कानूनी सलाहकार बीएएल इमिग्रेशन लॉ ने एक ईमेल में प्रभावित प्रोफेशनल्स से राजनयिक मिशनों में असामान्य रूप से लंबी अपॉइंटमेंट बैकलॉग के कारण अंतरराष्ट्रीय यात्राओं से बचने का आग्रह किया और यात्रियों को चेतावनी दी कि उन्हें अमेरिका से बाहर लंबे समय तक रहने का जोखिम हो सकता है.

अमेरिका की सोशल मीडिया जांच नीति

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी और इसके आश्रित एच-4 वीजा आवेदकों की गहन जांच और छानबीन शुरू कर दी है, जिसमें उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच भी शामिल है. यह कदम विदेश विभाग द्वारा सभी वीजा धारकों को अपनी गोपनीयता सेटिंग्स को 'सार्वजनिक' करने का निर्देश देने के कुछ सप्ताह बाद उठाया गया है. छात्रों और एक्सचेंज विजिटर्स पर पहले से ही इस तरह की जांच लागू थी, जिसे अब श्रमिकों तक बढ़ा दिया गया है. विदेश विभाग ने कहा कि प्रत्येक वीजा संबंधी निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा होता है.

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एच-1बी में क्या बदला

सोशल मीडिया पर होने वाली यह जांच, स्किल्ड फॉरेन वर्कर्स के लिए आव्रजन का प्रमुख मार्ग माने जाने वाले एच-1बी कार्यक्रम की नवीनतम जांच है, जिस पर ट्रंप प्रशासन की ओर से लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है. सितंबर में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए एच-1बी वर्क वीजा पर एकमुश्त 100,000 डॉलर का शुल्क लगाया - एक ऐसा आदेश जिसका अमेरिका में अस्थायी रोजगार की तलाश कर रहे भारतीय कामगारों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है. बाद में, एक अफगान नागरिक द्वारा नेशनल गार्ड के सैनिकों पर गोलीबारी की घटना के बाद, अमेरिका ने 19 "चिंताजनक देशों" से आने वाले लोगों के लिए ग्रीन कार्ड, अमेरिकी नागरिकता और अन्य आव्रजन आवेदनों को भी रोक दिया.

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