अगर कोई देश ग्रीनलैंड पर साथ नहीं देता है, तो मैं उस पर टैरिफ लगा सकता हूं: ट्रंप

ट्रंप ने ग्रीनलैंड को हासिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया और वेनेज़ुएला और ईरान में हाल ही में किए गए अमेरिकी अभियानों का हवाला देते हुए अपनी सैन्य शक्ति के बारे में भी बात की.

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  • ट्रंप ने ग्रीनलैंड को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताते हुए डेनमार्क से इसे खरीदने की मांग की है
  • डेनमार्क और अन्य नाटो सदस्य देशों ने ग्रीनलैंड को अमेरिका को सौंपने से साफ इनकार किया है
  • रूस ने ग्रीनलैंड पर कोई दावेदारी नहीं जताई और पश्चिमी देशों की अंतरराष्ट्रीय नियम व्यवस्था को विफल बताया है
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को हासिल करने की वाशिंगटन की योजना का विरोध करने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है. उन्होंने कहा, “अगर कोई देश ग्रीनलैंड के मामले में साथ नहीं देता है, तो मैं उस पर टैरिफ लगा सकता हूं, क्योंकि हमें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड की आवश्यकता है.” ट्रंप बार-बार यह दावा करते रहे हैं कि आर्कटिक महासागर में रूस और चीन की उपस्थिति से अमेरिका की रक्षा के लिए ग्रीनलैंड महत्वपूर्ण है, और उन्होंने डेनमार्क साम्राज्य से इस स्वशासित क्षेत्र को बेचने की मांग की है.

हालांकि, डेनमार्क और अन्य नाटो सहयोगियों ने इस क्षेत्र को अमेरिका को सौंपने से इनकार कर दिया है. फ्रांस, जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों ने सुरक्षा बढ़ाने में मदद के लिए ग्रीनलैंड में अपनी सेनाएं भेजी हैं.

नाटो से चल रही बातचीत

साउथ लॉन में पत्रकारों से बात करते हुए, ट्रंप ने ग्रीनलैंड को हासिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया और वेनेज़ुएला और ईरान में हाल ही में किए गए अमेरिकी अभियानों का हवाला देते हुए अपनी सैन्य शक्ति के बारे में भी बात की. उन्होंने कहा, "नाटो ग्रीनलैंड के मुद्दे पर हमसे बातचीत कर रहा है. राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हमें ग्रीनलैंड की सख्त जरूरत है. अगर यह हमारे पास नहीं होगा, तो राष्ट्रीय सुरक्षा में एक बड़ा छेद हो जाएगा, खासकर गोल्डन डोम और अन्य परियोजनाओं के संदर्भ में."

ट्रंप ने आगे कहा, “हमने सेना में बहुत निवेश किया है. हमारे पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है, और यह लगातार मजबूत होती जा रही है. आपने वेनेजुएला के मामले में यह देखा. आपने ईरान पर हमले में, उनकी परमाणु क्षमताओं को नष्ट करने में यह देखा.” 

रूस ने क्या कहा

हालांकि, रूस ने हमेशा यह कहा है कि उसका ग्रीनलैंड को हासिल करने का कोई इरादा नहीं है. हाल के घटनाक्रम को लेकर पश्चिमी देशों की आलोचना करते हुए रूस ने कहा कि पश्चिम नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने में “विफल” रहा है.

रूस के विदेश मंत्रालय ने X पर एक पोस्ट में जखारोवा के हवाले से कहा, "ग्रीनलैंड को लेकर मौजूदा तनाव पश्चिम की तथाकथित 'नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था' की विफलता को स्पष्ट रूप से उजागर करता है. यह साफ दिख रहा है कि अमेरिका के प्रति कोपेनहेगन की बिना शर्त अधीनता की दीर्घकालिक नीति मौलिक रूप से त्रुटिपूर्ण है." बुधवार को डेनमार्क ने कहा कि वह ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने की योजना बना रहा है. यह घोषणा डेनमार्क और ग्रीनलैंड के विदेश मंत्रियों की वाशिंगटन डीसी में व्हाइट हाउस के प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद की गई. अल जजीरा के अनुसार, इस बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वैंस अपने रुख से पीछे नहीं हटे.
 

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