पाकिस्तान की सरपस्ती में आजाद जीवन जी रहे 7 आतंकी नेता, जिसे भारत सहित पूरी दुनिया तलाश रही

लश्कर के आतंकियों ने 2000 में दिल्ली के लाल किले पर भी हमला किया था. इन सभी आतंकी हमलों के पीछे हाफिज सईद है. जिसे अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकवादी घोषित किया जा चुका है और उस पर 1 करोड़ डॉलर का इनाम है, लेकिन वह लाहौर में आराम से रह रहा है.

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लश्कर-ए-तैयबा चीफ हाफिज सईद.
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  • पाकिस्तान में कई कुख्यात आतंकी नेता भारत और अन्य देशों के खिलाफ साजिश रचते हुए आराम से रह रहे हैं.
  • लश्कर-ए-तैयबा के चीफ हाफिज सईद पर कई बड़े आतंकी हमलों का दोष है और उस पर करोड़ों रुपए का इनाम है.
  • जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पुलवामा और उरी हमलों का मास्टरमाइंड है और संयुक्त राष्ट्र ने उसे वैश्विक आतंकी घोषित किया है.
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Terrorist Leader in Pakistan: दर्जनों आतंकी साजिशों के सूत्रधार, सैकड़ों हमलों के साजिशकर्ता, हजारों लोगों की मौत के गुनाहगार, करोड़ों रुपए के इनामी... भारत, अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों की एजेंसियां जिन कुख्यात आतंकियों को तलाश रही है, वो पाकिस्तान में आजाद जीवन जी रहे हैं. इन्हें पकड़े या मारे जाने का खौफ तो है लेकिन उन्हें यह भी पता है कि पाकिस्तानी रहनुमा उनके साथ है. साथ ही इन्हें खुद की बनाई आंतकी आर्मी पर भी भरोसा है. ये सभी बैखौफ होकर भारत और भारतीयों पर आतंकी हमलों की साजिश रचते हैं, हिंसा को अंजाम देने के लिए युवक-युवतियों की भर्ती और उन्हें कट्टरपंथी बनाते हैं, और एक ऐशो-आराम की जिंदगी जीते हैं.

22 अप्रैल को भारत के जम्मू कश्मीर में पहलगाम में हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी लेने वाले लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट को अमेरिका ने आतंकी संगठन घोषित कर दिया है. भारत की एजेसियां सीमापार से आतंकी साजिश रचने वालों पर न केवल नजर रख रही है. बल्कि आतंकी नेताओं के ढेर सारे सबूत जमा कर चुकी है.

भारत के पास इन आतंकी नेताओं की लिस्ट भी है. जो पाकिस्तान में रह कर भारत के खिलाफ साजिश बनाते रहते हैं. आईए जानते हैं पाकिस्तान में छिपे ऐसे ही 7 आतंकी नेताओं की कहानी.

लश्कर-ए-तैयबा चीफ हाफिज सईद

पाकिस्तान में छिपे बड़े आतंकी नेताओं की लिस्ट में सबसे पहला नाम लश्कर-ए-तैयबा चीफ हाफिज सईद का है. हाफिज सईद ने 1990 के दशक की शुरुआत में LeT नामक आतंकवादी संगठन की स्थापना की. पाकिस्तान स्थित इस्लामी कट्टरपंथी मिशनरी समूह मरकज़-उद-दावा-वल-इरशाद की सैन्य शाखा के रूप में लश्कर-ए-तैयबा की स्थापना की गई थी.

ODNI की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि लश्कर "देश भर में भारतीय सैनिकों और नागरिक ठिकानों पर कई हमलों" के लिए ज़िम्मेदार है. भारत पर लश्कर के हमलों की सूची लंबी है. इसमें 2006 में मुंबई में ट्रेनों पर बमबारी के साथ 26/11 के हमले शामिल हैं. इन दो आतंकी हमलों में 360 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

लश्कर के आतंकियों ने 2000 में दिल्ली के लाल किले पर भी हमला किया था. इन सभी आतंकी हमलों के पीछे हाफिज सईद है. जिसे अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकवादी घोषित किया जा चुका है और उस पर 1 करोड़ डॉलर का इनाम है, लेकिन वह लाहौर में सशस्त्र सुरक्षा के बीच आराम से रह रहा है.

पाकिस्तान के मंत्री बिलावल भुट्टो ने पिछले महीने दावा किया था कि हाफ़िज़ सईद 'नज़रबंद' है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने मुरीदके स्थित लश्कर मुख्यालय को नष्ट कर दिया था.

जैश-ए-मोहम्मद का चीफ मसूद अजहर

फाहिज सईद के बाद नंबर आता है मसूद अज़हर का. जो जैश-ए-मोहम्मद आतंकवादी समूह का सरगना है, जो पाकिस्तान में स्थित है और पाकिस्तानी सेना व डीप स्टेट द्वारा संरक्षित है. पुलवामा और उरी के भयावह आतंकवादी हमलों के मास्टरमाइंड - जिसमें 59 सैनिक मारे गए और दर्जनों घायल हुए. अज़हर को 2019 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा 'वैश्विक आतंकवादी' घोषित किया गया था.

नवंबर में उसने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक इस्लामी मदरसे में भाषण दिया था और भारत पर और आतंकी हमले करने की कसम खाई थी. भारत सरकार ने उसकी तुरंत गिरफ़्तारी की माँग की थी, लेकिन पाकिस्तान ने फिर से टालमटोल करते हुए दावा किया कि उसके पास उसके ठिकाने के बारे में जानकारी थी, और अब भी नहीं है.

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इस महीने की शुरुआत में भुट्टो ने दावा किया था कि अज़हर अफ़ग़ानिस्तान में हो सकता है. हालांकि, खुफिया जानकारी बताती है कि अज़हर पाकिस्तान के बहावलपुर से अपनी गतिविधियाँ जारी रखे हुए है, जो ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मिसाइल हमलों में तबाह हुए आतंकी शिविरों में से एक था.

शायद लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आकाओं को दी जा रही सुरक्षा का सबसे बड़ा संकेत ये खबरें हैं कि पाक सरकार ने तबाह हुए लॉन्चपैड्स और आतंकी शिविरों का पुनर्निर्माण शुरू कर दिया है.

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लश्कर-ए-तैयबा के सीनियर सदस्य जकीउर रहमान लखवी

अगला नाम ज़कीउर रहमान लखवी का है, जो एक कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक और लश्कर-ए-तैयबा का एक सीनियर सदस्य है. दरअसल, बताया जाता है कि वह इस आतंकवादी समूह का सैन्य प्रमुख है और 26/11 के मुंबई हमले का मुख्य साजिशकर्ता था.

उसे कुछ समय के लिए पाकिस्तान ने जेल में डाला था. लेकिन बाद में उसे ज़मानत पर रिहा कर दिया गया. यह तब हुआ जब भारत ने मुंबई हमले में उसकी भूमिका के सबूत पेश किए थे.

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लखवी के पंजाब प्रांत और यहाँ तक कि इस्लामाबाद में भी पते दर्ज हैं. ऐसा माना जाता है कि उसे पाकिस्तानी सेना और यहाँ तक कि चीन का भी संरक्षण प्राप्त है; बीजिंग ने उसे आतंकवादियों की एक प्रमुख सूची में डालने के संयुक्त राष्ट्र के प्रयास को रोक दिया था.

हिज्बुल मुजाहिद्दीन चीफ सैयद सलाहुद्दीन

सूची में चौथे स्थान पर सैयद सलाहुद्दीन है, जो हिज्बुल मुजाहिद्दीन आतंकवादी समूह का प्रमुख है और जिसने कश्मीर घाटी को "भारतीय बलों के लिए कब्रिस्तान" में बदलने की कसम खाई है. अमेरिकी विदेश विभाग और भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा आतंकवादी घोषित किये जाने के बावजूद वह अभी भी पाक अधिकृत कश्मीर में भारत विरोधी रैलियों का नेतृत्व कर रहा है और भारत के खिलाफ जिहाद का आह्वान कर रहा है.

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डी कंपनी का मुखिया दाऊद इब्राहिम

अगला नाम दाऊद इब्राहिम का है, जो एक अंडर वर्ल्ड का डॉन कहलाता है. दुनिया के सबसे वांछित भगोड़ों में से एक है. कुख्यात डी-कंपनी अपराध सिंडिकेट का मुखिया, वह हत्या और भाड़े पर हत्या, जबरन वसूली, मादक पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद के आरोपों में वांछित है.

एक दशक पहले मुंबई में हुए बम धमाकों में उसकी भूमिका के लिए उसे 2003 में भारत और अमेरिका ने 'वैश्विक आतंकवादी' घोषित किया था, और वह अमेरिकी संघीय जाँच ब्यूरो की 'सर्वाधिक वांछित' सूची में भी शामिल था. उसके सिर पर 2.5 करोड़ डॉलर का इनाम ही उसकी नापाक हैसियत को दर्शाता है. उसे कराची में ट्रैक किया गया है.

इंडियन मुजाहिदीन का संस्थापक इकबाल भटकल और रियाज भटकल

इसके बाद इकबाल भटकल का नाम भी शामिल है. जिसने इंडियन मुजाहिदीन की स्थापना की थी, और उसका भाई रियाज़ भटकल, जिसने इस समूह की सह-स्थापना की और इसके लिए धन मुहैया कराया, कराची में रहता है और भारत में गुप्त सेल चलाता है.

कई आतंकवादी समूह और आतंकवादी भारतीय क्षेत्र पर हमला करने के लिए पाकिस्तान को एक लॉन्चपैड के रूप में इस्तेमाल करते हैं, और भारत द्वारा अंतरराष्ट्रीय समुदाय में सर्वोच्च स्तर पर इस मुद्दे को उठाने के बावजूद यह स्थिति बनी हुई है.

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