- इजरायली लड़ाकू विमानों ने तेहरान के कई सरकारी और सैन्य ठिकानों पर एक साथ बमबारी की
- गांधी अस्पताल को हुए हमले में भारी नुकसान पहुंचा और मरीजों को तुरंत सुरक्षित बाहर निकाला गया
- ईरान ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइलें और ड्रोन से पलटवार किया
ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच छिड़ी जंग अब एक बेहद खौफनाक मोड़ ले चुकी है. रविवार को उत्तरी तेहरान स्थित 'गांधी अस्पताल' (Gandhi Hospital) इजरायली हवाई हमलों का सीधा निशाना बना. इजरायली रक्षा बल (IDF) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने पुष्टि की है कि एक साथ 100 इजरायली लड़ाकू विमानों ने तेहरान के कई सरकारी और सैन्य ठिकानों पर एक साथ बमबारी की है. इन हमलों में विशेष रूप से ईरान की वायु सेना, मिसाइल कमांड और सुरक्षा बलों के ठिकानों को निशाना बनाया गया. यह पूरी कार्रवाई अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद चलाए जा रहे संयुक्त अमेरिकी-इजरायली सैन्य अभियान के दूसरे दिन का हिस्सा है.
अस्पताल में बिखरा मलबा, मरीजों का रेस्क्यू
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस भीषण हमले में गांधी अस्पताल को भारी नुकसान पहुंचा है. गांधी स्ट्रीट इलाके में मौजूद चश्मदीदों ने बताया कि इमारत के क्षतिग्रस्त होने के बाद मरीजों को आनन-फानन में अस्पताल से सुरक्षित बाहर निकाला गया. ईरान की फार्स और मिजान जैसी समाचार एजेंसियों द्वारा जारी किए गए वीडियो फुटेज में अस्पताल के अंदर फर्श पर और व्हीलचेयर के पास मलबा बिखरा हुआ साफ देखा जा सकता है. ईरान की ISNA न्यूज एजेंसी ने इस बर्बादी के लिए अमेरिकी हवाई हमलों को जिम्मेदार ठहराया है.
ईरान का भयंकर पलटवार, दुबई से लेकर सऊदी तक दागी मिसाइलें
इजरायल ने स्पष्ट किया है कि वह ईरानी राजधानी के मध्य इलाकों में अपने हमले केंद्रित कर रहा है. इसके जवाब में ईरान ने भी शांत न बैठते हुए भयानक पलटवार किया. रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने इजरायल, खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों, सऊदी अरब की राजधानी और दुबई की तरफ ताबड़तोड़ मिसाइलें और ड्रोन दागे. इन हमलों से यह साफ है कि यह युद्ध अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसकी आग पूरे मिडिल ईस्ट तक पहुंच रही हैं.
खामेनेई के बाद कौन चला रहा है ईरान?
इस युद्ध के बीच ईरान एक बड़े आंतरिक संकट और सत्ता हस्तांतरण से भी गुजर रहा है. खामेनेई की मौत के बाद अयातुल्ला अली रजा अराफी को अंतरिम सुप्रीम लीडर की जिम्मेदारी सौंपी गई है. अराफी तीन सदस्यों वाली लीडरशिप काउंसिल के सदस्य हैं. जब तक ईरान को नया सुप्रीम लीडर नहीं मिल जाता तब तक यही काउंसिल ईरान की सत्ता संभालेगी.
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