क्या सोशल मीडिया बच्चों की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है? यह सवाल लंबे समय से उठता रहा है, लेकिन अब इस पर बड़ी कानूनी कार्रवाई भी होने लगी है. अमेरिका में एक स्कूल विभाग ने आरोप लगाया था कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक, यूट्यूब और स्नैपचैट जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म छात्रों में तनाव, नींद की कमी, भावनात्मक परेशानियां और दूसरी मानसिक समस्याओं को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं. जब मामला अदालत तक पहुंचा तो अब कई बड़ी टेक कंपनियों ने करोड़ों डॉलर देकर समझौता कर लिया है. चलिए पूरा मामला समझाते हैं.
एक स्कूल विभाग को मिलेंगे 256 करोड़ रुपए
सोमवार को सामने आए अदालत के डॉक्यूमेंट के अनुसार, कई सोशल मीडिया कंपनियां अमेरिका के केंटकी के एक स्कूल जिले (स्कूल डिस्ट्रिक्ट) को करीब 2.7 करोड़ डॉलर (256 करोड़ भारतीय रुपए) देने पर सहमत हो गई हैं. यह समझौता उस मुकदमे को खत्म करने के लिए किया गया है, जिसमें इन कंपनियों पर छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य संकट के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया गया था.
कौन सी कंपनी कितने रुपए देगी?
इस रकम में इंस्टाग्राम और फेसबुक की मूल कंपनी मेटा 90 लाख डॉलर देगी. स्नैपचैट की मूल कंपनी स्नैप और टिकटॉक की मालिक बाइटडांस 80-80 लाख डॉलर देंगी. वहीं यूट्यूब की मालिक गूगल करीब 20 लाख डॉलर नकद देगी और 9 लाख डॉलर मूल्य की ट्रेनिंग तथा सॉफ्टवेयर लाइसेंस भी उपलब्ध कराएगी.
जिले के शिक्षा विभाग को करोड़ों रुपए क्यों मिल रहे?
यह मामला ब्रैथिट काउंटी स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने दायर किया था. पूर्वी केंटकी का यह गांव वाला स्कूल डिस्ट्रिक्ट देशभर में ऐसे ही दायर किए गए 1,200 से अधिक मुकदमों में एक परीक्षण मामले (टेस्ट केस) के रूप में चुना गया था. इस स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने 15 साल के मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के लिए 6 करोड़ डॉलर से अधिक की मांग की थी. इसके अलावा वह सोशल मीडिया के कारण छात्रों पर पड़े असर, जैसे नींद की समस्याएं, भावनात्मक तनाव और आपसी टकराव जैसी समस्याओं को दूर करने की लागत भी वसूलना चाहता था.
इस मामले की सुनवाई इसी महीने ओकलैंड, कैलिफोर्निया में शुरू होने वाली थी, लेकिन उससे पहले ही चारों कंपनियों ने समझौता कर लिया है.
गूगल की ओर से दिए जाने वाले लाभों में स्कूल में एक पेशेवर ट्रेनिंग कोच की सुविधा, उसके गूगल एआई फॉर एजुकेशन सॉफ्टवेयर का तीन साल का लाइसेंस, चार साल का "सोशल इमोशनल लर्निंग" कार्यक्रम और गूगल वर्कस्पेस टूल्स के लिए तकनीकी सहायता शामिल है. हालांकि, इन समझौतों में किसी भी कंपनी ने यह स्वीकार नहीं किया है कि उसने कोई गलती की है.
यह बड़ी बात क्यों है?
माना जा रहा है कि इस समझौते से सोशल मीडिया कंपनियों पर बाकी मामलों में भी समझौता करने का दबाव बढ़ेगा. इन सभी मामलों की निगरानी जज इवोन गोंजालेज रोजर्स कर रही हैं. हाल ही में उन्होंने एलन मस्क और सैम ऑल्टमैन से जुड़े एक चर्चित मामले की भी सुनवाई की थी.
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब सोशल मीडिया कंपनियों को लगातार कानूनी झटके मिल रहे हैं. मार्च में लॉस एंजिलिस की एक जूरी ने मेटा और गूगल को उनके इंस्टाग्राम और यूट्यूब प्लेटफॉर्म की लत लगाने वाली प्रकृति के लिए जिम्मेदार माना था. इस फैसले को भविष्य में सोशल मीडिया की लत से जुड़े मुकदमों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है.
उसी महीने न्यू मैक्सिको की एक जूरी ने मेटा को 37.5 करोड़ डॉलर (375 मिलियन डॉलर) का भुगतान करने का आदेश दिया था. कंपनी पर आरोप था कि उसने नाबालिगों को अनुचित सामग्री और यौन शिकारियों के संपर्क में आने के खतरे में डाला. इसके अलावा, अमेरिका के 30 से अधिक राज्य भी मेटा के खिलाफ इसी तरह के आरोपों को लेकर अलग मुकदमा लड़ रहे हैं. इस मामले की सुनवाई अगस्त में ओकलैंड में शुरू हो सकती है.











