भारत, चीन, फिलीपीन और म्यांमा से सहायक पुलिस अधिकारियों की भर्ती करने पर विचार कर रहा है सिंगापुर

‘चैनल न्यूज़ एशिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें संभवत: चीन, भारत, फिलीपीन और म्यांमा जैसे एशियाई देशों को शामिल किया गया है. ‘टुडे’ अखबार ने मंत्री के हवाले से कहा, ‘‘हमें सुरक्षा सेवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सहायक पुलिस बलों को विदेशी एपीओ की भर्ती करने की अनुमति देने की जरूरत है.’’

विज्ञापन
Read Time: 6 mins

Law and Home Affairs Minister K Shanmugam: सिंगापुर भारत, चीन, फिलीपीन और म्यांमा से सहायक पुलिस अधिकारियों (एपीओ) को नियुक्त करने पर विचार कर रहा है. कानून और गृह मामलों के मंत्री के. षणमुगम ने बुधवार को संसद में यह जानकारी दी. सिंगापुर उन अधिकार क्षेत्रों का विस्तार करने पर विचार कर रहा है जहां से वह एपीओ की भर्ती करता है क्योंकि हाल के कुछ वर्षों में ताइवान से इस संख्या में गिरावट आई है. इसके परिणामस्वरूप गृह मंत्रालय उन अधिकार क्षेत्रों का विस्तार करने पर विचार कर रहा है जहां से सहायक पुलिस अधिकारी (एपीओ) भर्ती किए जा सकते हैं.

‘चैनल न्यूज़ एशिया' की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें संभवत: चीन, भारत, फिलीपीन और म्यांमा जैसे एशियाई देशों को शामिल किया गया है. ‘टुडे' अखबार ने मंत्री के हवाले से कहा, ‘‘हमें सुरक्षा सेवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सहायक पुलिस बलों को विदेशी एपीओ की भर्ती करने की अनुमति देने की जरूरत है.''

मंत्री ने सांसदों और विपक्षी दल ‘वर्कर्स पार्टी' की अध्यक्ष सिल्विया लिम के प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा, ‘‘स्थानीय कार्यबल में कमी, शारीरिक फिटनेस जैसी आवश्यकताओं और सिंगापुरवासियों के पास नौकरी के विकल्पों को देखते हुए (सहायक पुलिस बल को) एपीओ की पर्याप्त संख्या बनाए रखने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.''

मंत्री से पूछा गया था कि क्या सिंगापुर अब भी ताइवान से एपीओ की नियुक्ति कर रहा है क्योंकि ऐसा वह 2017 से कर रहा है.

षणमुगम ने कहा कि सहायक पुलिस बल ताइवानी एपीओ को नियुक्त करना जारी रखेंगे, आम तौर पर सकारात्मक कार्य अनुभव के बावजूद उनकी संख्या में गिरावट जारी है. उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें भर्ती करना और उन्हें नौकरी में टिकाए रखना एक चुनौती रही है.''

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
Featured Video Of The Day
Trump vs Khamenei: America के टारगेट सेट हो चुके हैं? | Iran Protest | Shubhankar Mishra | Kachehri