- दुनिया की तेल सप्लाई के अहम समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से कई जहाज आने-जाने लगे हैं
- ईरान ने अपने मित्र देशों के जहाजों को आने-जाने की छूट दी है. कम से कम 20 जहाज होर्मुज पार कर चुके हैं
- कई शिप ईरान को चकमा देने के लिए खुद को चीनी बता रहे तो कोई मुस्लिम जहाज बता रहा है
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz). दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई की सबसे अहम रास्ता. एक तरफ ईरान और दूसरी तरफ ओमान-यूएई को जोड़ने वाले, महज 33 किलोमीटर चौड़े इस समुद्री रास्ते से होकर दुनिया में तेल की कुल सप्लाई का 20 फीसदी गुजरता है. लेकिन अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद से ईरान ने इसे बंद कर रखा है. हालांकि मित्र राष्ट्रों को लेकर ईरान के रुख में नरमी के बाद यहां से कुछ जहाजों की आवाजाही शुरू हो गई है.
कम से कम 20 जहाज होर्मुज से निकल चुके
डेटा एजेंसी Kpler का दावा है कि पिछले सोमवार से कम से कम 20 जहाज होर्मुज से निकल चुके हैं. होर्मुज स्ट्रेट से निकलने के लिए कई जहाज चालाकी भी दिखा रहे हैं. दरअसल ईरान ने धमकी दी है कि वह अमेरिका-इजरायल और उनके समर्थक देशों के जहाजों को इस रास्ते से नहीं गुजरने देगा, लेकिन चीन-रूस जैसे अपने मित्र देशों के जहाजों को उसने छूट दे रखी है. इसका फायदा उठाकर कई जहाज खुद को 'चाइनीज' दिखा रहे हैं और रिस्क लेकर आगे बढ़ रहे हैं.
खुद को 'चीनी' कैसे बता रहे जहाज?
जहाज खुद को 'चाइनीज' कैसे दिखा रहे हैं, इसका तरीका भी दिलचस्प है. दरअसल समुद्र में जहाज की पहचान उसके ट्रांसपोंडर से निकलने वाले सिग्नल से होती है. होर्मुज में फंसे कुछ जहाज अपने ट्रांसपोंडर सिग्नल में बदलाव कर ले रहे हैं और मैसेज भेजते हैं कि उसका मालिक चीनी नागरिक है और उस पर चीन के नाविक सवार हैं. कई जहाज चीन का झंडा लगा लेते हैं. ईरान के सैनिक उसे चीन का जहाज समझकर निकलने की छूट दे देते हैं.
'मुस्लिम' बताकर निकलने की कोशिश
जहाज के मालिक होर्मुज से निकलने के लिए कई और तिकड़म भी लगा रहा है. एक जहाज ने तो खुद को 'मुस्लिम जहाज' बताकर स्ट्रेट से निकलने की कोशिश की थी. कई जहाज होर्मुज के नजदीक आते ही अपने ट्रांसपोंडर बंद कर लेते हैं और रिस्क लेकर आगे बढ़ते जाते हैं. अगर बिना नुकसान निकल गए तो आगे जाकर ट्रांसपोंडर ऑन कर लेते हैं.
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10 जहाजों पर ईरान ने किए हमले
लेकिन ये चालाकी हर बार काम नहीं आती है. जहाजों की आवाजाही के मरीन ट्रैफिक के आंकड़ों के आधार पर AFP ने दावा किया है कि इस दौरान कम से कम 10 जहाजों पर हमले किए जा चुके हैं. यही कारण है कि अमेरिका के ऐलान के बावजूद जहाज मालिक आगे बढ़ने का खतरा मोल नहीं ले रहे. होर्मुज के दोनों तरफ इतने जहाज इकट्ठा हो गए हैं कि ट्रैफिक जाम जैसी नौबत है. कच्चे तेल की सप्लाई ठप होने से दाम आसमान छू रहे हैं.
ट्रंप की बातों पर अभी पूरा भरोसा नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐलान किया है कि वो होर्मुज से निकलने वाले जहाजों की सुरक्षा देंगे. गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के इस ऐलान के बाद कम से कम 2 जहाज होर्मुज से निकलने में कामयाब रहे हैं. इनमें से एक जहाज ने अपना ट्रांसपोंडर बंद कर दिया था, जबकि दूसरा जहाज खुद को चाइनीज दिखाकर पार निकल गया.
कहां जाते हैं होर्मुज से निकले जहाज
US Energy Information Administration (EIA) का अनुमान है कि होर्मुज से होकर गुजरने वाले कच्चे तेल और अन्य ईंधन के कुल शिपमेंट में से 82 फीसदी एशियाई देशों को जाते हैं. इसमें से भी 70 फीसदी हिस्सा सिर्फ चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया में पहुंचता है. भारत अपने कच्चे तेल का 40 फीसदी आयात इस रास्ते से करता है, वहीं LNG यानी प्राकृतिक गैस की 54 फीसदी आपूर्ति भी इसी रास्ते से होती है. साल 2024 में भारत ने 54 फीसदी प्राकृतिक गैस खाड़ी देशों से आयात की थी, जिसमें से अकेले कतर का हिस्सा 80 फीसदी से ज्यादा था.
ईरान ने रास्ता खोलने की रखी नई शर्त
ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) ने अब कहा है कि वो अरब और यूरोप के उन देशों के जहाजों को भी होर्मुज से निकलने की छूट दे सकता है, जो अमेरिका और इजरायल से राजनयिक संबंध खत्म कर लेंगे और उनके राजनयिकों को निष्कासित कर देंगे. उधर अमेरिका अपना तीसरा विमानवाहक पोत मिडिल ईस्ट की तरफ भेज रहा है. माना जा रहा है कि इसके जरिए होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा दी जाएगी.













