- यूक्रेनी राष्ट्रपति ने दावा किया कि पहली बार युद्ध में केवल रोबोटिक सिस्टम्स ने रूस की टुकड़ी को सरेंडर कराया
- जंग में पहली बार यूक्रेनी सेनाओं ने ड्रोन और ग्राउंड रोबोट्स की मदद से दुश्मन के पोजिशन पर कब्जा किया- दावा
- पिछले तीन महीनों में यूक्रेनी ग्राउंड रोबोटिक सिस्टम ने 22,000 से अधिक मिशनों को अंजाम दिया - जेलेंस्की
यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लाडिमीर जेलेंस्की ने कुछ ऐसा दावा किया है जो मॉर्डन युग में जंग की तस्वीर को हमेशा के लिए बदल सकता है. अब जंग के मैदान में फ्रंटलाइन पर इंसान नहीं, सिर्फ रोबोट लड़ सकते हैं और जीत भी हासिल कर सकते हैं. राष्ट्रपति जेलेंस्की ने दावा किया है कि 2022 में रूस के साथ जंग शुरू होने के बाद पहली बार यूक्रेनी सेनाओं ने केवल ड्रोन और मानव रहित ग्राउंड रोबोटिक सिस्टम (UGVs) की मदद से रूसी सेना की एक टुकड़ी को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया है, उनके पोजिशन पर कब्जा कर लिया है.
यूक्रेनी गनस्मिथ दिवस के मौके पर एक फंक्शन में बोलते हुए, जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन का हथियार क्षेत्र एक प्रमुख ताकत के रूप में विकसित हुआ है, जो न केवल फर्स्ट-पर्सन-व्यू (एफपीवी) ड्रोन की सप्लाई करता है, बल्कि लंबी दूरी की मिसाइलों, इंटरसेप्टर, गोले और रोबोटिक सिस्टम की भी सप्लाई करता है जो पहले से ही युद्ध के मैदान में सक्रिय उपयोग में हैं. जेलेंस्की ने कहा, "यूक्रेन के रक्षा उद्योग की क्षमताएं हर साल लाखों एफपीवी ड्रोन बनाने हैं."
राष्ट्रपति व्लोडिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर देश के हथियारों को दिखाते हुए लिखा, "भविष्य पहले से ही अग्रिम पंक्ति में है- और यूक्रेन इसका निर्माण कर रहा है." उन्होंने पोस्ट में कहा, "ये हमारे ग्राउंड रोबोटिक सिस्टम हैं. इस युद्ध के इतिहास में पहली बार, दुश्मन के पोजिशन को खास रूप से मानव रहित प्लेटफार्मों - ग्राउंड सिस्टम और ड्रोन द्वारा कब्जे में लिया गया है."
जेलेंस्की ने दावा किया कि इसमें कोई पैदल सेना शामिल नहीं थी, उसकी ओर से कोई नुकसान नहीं हुआ और रूसी सैनिकों ने सरेंडर कर दिया. राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि पिछले तीन महीनों में, यूक्रेनी ग्राउंड रोबोटिक सिस्टम ने 22,000 से अधिक मिशनों को अंजाम दिया है, जिसमें "रैटेल", "टर्मिट", "अर्डाल", "रिस", "ज़मी", "प्रोटेक्टर", "वोला" और अन्य सिस्टम शामिल हैं.
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