ब्रह्मांड में क्या राज छिपा है, खोजने का 100 गुना पावरफुल औजार मिल गया

Roman Space Telescope Explained: रोमन टेलीस्कोप को स्पेस एजेंसी NASA इसी साल सितंबर में SpaceX के रॉकेट पर बैठाकर अंतरिक्ष में लॉन्च करेगी. समझिए यह हबल टेलीस्कोप से भी खास क्यों है.

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Roman Space Telescope Explained: रोमन टेलीस्कोप क्यों है खास
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  • रोमन स्पेस टेलीस्कोप को NASA ने बनाया है और इसे सितंबर में अंतरिक्ष में लॉन्च किया जाएगा
  • यह टेलीस्कोप 300 मेगापिक्सल का इन्फ्रारेड कैमरा लेकर आता है जो अरबों गैलेक्सियों की तस्वीरें लेगा
  • रोमन टेलीस्कोप ब्रह्मांड के बड़े हिस्से का 3D मैप बनाएगा और उसके विकास का अध्ययन करेगा
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Roman Space Telescope Explained: आप बस कल्पना कीजिए कि आप एक ऐसी फोटो लेते हैं जिसमें सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि पूरा महाद्वीप दिखा दे और फिर भी जब आप जूम करें तो उसमें हर एक इमारत तक की डिटेल साफ दिख जाए. खगोलशास्त्री या एस्ट्रोनॉमर्स भी अब ऐसी ही बड़ी छलांग लगाने वाले हैं क्योंकि अब उनके पास नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप है. इसे NASA ने बनाया है और यह इस स्पेस एजेंसी का ब्रह्मांड को मैप करने का सबसे बड़ा मिशन है. अब आपके मन में कई सवाल आ रहे होंगे. यह स्पेस टेलीस्कोप क्या है, इसे क्यों बनाया गया है, यह कितना खास है. चलिए आपको सब बताते हैं.

नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप को जानिए

यह स्पेस टेलीस्कोप 12 मीटर लंबा है. इसमें 2.4 मीटर का दर्पण (मिरर) है और इसका वजन 4,000 किलो से ज्यादा है. इसे बनाने में 4 बिलियन डॉलर से ज्यादा और लगभग 10 साल लगे. भारतीय करेंसी में यह रकम लगभग 30 हजार करोड़ रुपए बैठती है. इसका नाम नैंसी ग्रेस रोमन के नाम पर रखा गया है, जिन्हें “मदर ऑफ हबल” कहा जाता है. वजह है कि उन्होंने हबल स्पेस टेलीस्कोप को बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी. NASA के मुताबिक रोमन टेलीस्कोप को इसी साल सितंबर में SpaceX के रॉकेट पर बैठाकर अंतरिक्ष में लॉन्च किया जाएगा.

ऐसा कैमरा जो पहले कभी अंतरिक्ष में नहीं गया 

रोमन का सबसे खास हिस्सा उसका वाइड फील्ड इंस्ट्रूमेंट है, जो 300 मेगापिक्सल का इन्फ्रारेड कैमरा है. यह इतना ताकतवर है कि अपने पूरे लाइफटाइम में यह 1 अरब (बिलियन) गैलेक्सियों की फोटो लेगा. यह हबल जितनी ही साफ तस्वीरें तो लेता ही है, लेकिन साथ ही एक बार में आसमान का 100 गुना बड़ा हिस्सा कवर करता है. इसी वजह से, सिर्फ 5 साल में रोमन उतना क्षेत्र देख लेगा जो हबल ने 30 साल में भी नहीं देखा (50 गुना से ज्यादा).

आसान भाषा में समझें तो रोमन की एक फोटो = हबल की 100 तस्वीरें जोड़कर बनाई गई एक फोटो.

इस कैमरे की मदद से रोमन ब्रह्मांड का एक बहुत बड़ा 3D मैप बनाएगा और देखेगा कि अरबों साल में यह कैसे बदला है. यह उस समय तक भी देखेगा जब ब्रह्मांड अपनी उम्र में आज की अपेक्षा कहीं छोटा था. ऐसा करने लिए यह विस्फोटित तारे (सुपरनोवा), गैलेक्सी के समूह और लाखों गैलेक्सियों की रोशनी को स्टडी करेगा. ब्रह्मांड की उम्र जानने का एक खास क्लू यह होता है कि दूर की गैलेक्सियों की रोशनी लाल रंग (इन्फ्रारेड) की तरफ खिसक जाती है, जिससे पता चलता है कि वे कितनी दूर हैं और ब्रह्मांड कितना फैल चुका है. इसी शिफ्ट को यह टेलीस्कोप कैद करेगा और अपना ब्रह्मांड कैसे वक्त के साथ बदल रहा है, यह बताएगा.

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इसके अलावा रोमन टेलीस्कोप अल्बर्ट आइंस्टीन की बताई हुई एक चीज का भी उपयोग करेगा, जिसे ग्रैविटेशनल लेंसिंग कहते हैं. इसमें भारी गैलेक्सियां मैग्निफाइंग ग्लास की तरह काम करती हैं और अपने पीछे की चीजों की रोशनी को मोड़ देती (बेंडिंग एंड डिस्टॉर्टिंग) हैं. इन छोटे-छोटे बदलावों को मापकर रोमन नजर न आने वाले यानी इन्विजिबल डार्क मैटर का मैप बनाएगा और डार्क एनर्जी को समझने की कोशिश करेगा, जो ब्रह्मांड को तेजी से फैलाने का काम कर रही है. ये दोनों साइंस फिल्ड के सबसे बड़े रहस्यों में से हैं.

हमारे सौर मंडल के बाहर की दुनिया खोजेगा रोमन टेलीस्कोप

इसी रोशनी के मुड़ने वाली ट्रिक यानी ग्रैविटेशनल माइक्रोलेंसिंग से रोमन दूसरे ग्रह भी खोजेगा. जब कोई तारा किसी दूसरे दूर के तारे के सामने आता है, तो उसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति उस तारे की रोशनी को थोड़ी देर के लिए ज्यादा चमका देती है. अगर उस तारे के पास अपने ग्रह होंगे, तो वे भी इस चमक में छोटे-छोटे बदलाव पैदा करेंगे. ये घटनाएं सिर्फ कुछ घंटों तक चलती हैं, इसलिए रोमन एक साथ 10 करोड़ (100 मिलियन) तारों को देखेगा.

अपने मिशन में रोमन लगभग 2,500 नए ग्रह खोज सकता है, जिनमें छोटे पत्थरीले ग्रह भी होंगे, जहां पानी और शायद जीवन भी हो सकता है. यह मंगल से छोटे ग्रह भी खोज सकता है, और बहुत पास से लेकर बहुत दूर (प्लूटो जितनी दूरी से भी ज्यादा) तक ग्रह ढूंढ सकता है. हमने धरती के पार देखने की आजतक जितनी कोशिश की है, उससे भी आगे देखने की ताकत रोमन हमें देने वाला है.

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पहली बार सीधे ग्रहों की फोटो

रोमन का दूसरा खास हिस्सा है कोरोनाग्राफ. यह तेज रोशनी वाले तारों की चमक को ब्लॉक करता है, ताकि उनके आसपास घूम रहे ग्रहों की सीधी फोटो ली जा सके. अगर यह सफल रहा, तो यह सूर्य जैसे तारों के आसपास घूमते बृहस्पति जैसे बड़े ग्रहों की सीधी तस्वीर ले सकता है.

आखिर इसकी जरूरत क्यों है?

अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि अगर रोमन टेलीस्कोप यह सब कर भी ले तो इससे होगा क्या. आपको और हमें सवालों के जवाब मिलेंगे. सवाल जैसे- ब्रह्मांड कैसे शुरू हुआ? इसका अंत कैसे होगा? ग्रह कैसे बनते हैं? क्या पृथ्वी के बाहर भी जीवन है? इन्हीं सवालों के जवाब खोजने के लिए रोमन टेलीस्कोप बनाया गया है. इसे इस साल सितंबर में SpaceX के रॉकेट से केनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जाएगा. और जब यह लॉन्च होगा, तो यह हमेशा के लिए हमारे ब्रह्मांड को देखने का तरीका बदल देगा.

(लेखक डॉ. केतन आर. संड कनाडा के ट्रॉटियर स्पेस इंस्टीट्यूट, मैकगिल यूनिवर्सिटी में रिसर्च साइंटिस्ट हैं.)

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