पाकिस्तान के पंजाब में मुस्लिम ने नाबालिग ईसाई लड़की का अपहरण कर कराया धर्मांतरण, फिर कर ली शादी

वीओपीएम का आरोप है कि घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद लड़की की बरामदगी में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है. इस बीच परिवार को लगातार धमकियों का सामना करना पड़ रहा है.

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पाकिस्तान की पुलिस ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं करती.
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  • पीड़िता के माता-पिता शारीरिक रूप से असक्षम हैं और गरीबी में जीवन यापन कर रहे हैं, जिससे उनकी मदद करना कठिन है
  • मानवाधिकार संगठन ने बताया कि लड़की के अपहरण के बावजूद उसकी बरामदगी में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है
  • परिवार को लगातार धमकियां मिल रही हैं ताकि वे इस मामले में कानूनी कार्रवाई न कर सकें और चुप रहें
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पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से एक गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन का मामला सामने आया है. यहां एक नाबालिग ईसाई लड़की का अपहरण कर जबरन इस्लाम धर्म अपनाने और मुस्लिम युवक से शादी कराने का आरोप लगा है. एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि यह घटना देश में बच्चों और धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है.

गरीब घर की है बच्ची

वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी (वीओपीएम) के अनुसार, पंजाब के साहीवाल जिले की रहने वाली कक्षा छह की छात्रा 13 वर्षीय ईसाई लड़की का कथित तौर पर अपहरण किया गया. इसके बाद उसे दो ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर किया गया, जिनके लिए कोई भी बच्चा सहमति देने में सक्षम नहीं होता, जबरन धर्मांतरण और जबरन विवाह. मानवाधिकार संगठन ने बताया कि लड़की के माता-पिता खुद को बेहद असहाय और कमजोर स्थिति में रह रहे हैं. पीड़िता की मां पैर में फ्रैक्चर के कारण दिव्यांग हैं, जबकि पिता शारीरिक रूप से अक्षम हैं और अंडे बेचकर परिवार का गुजारा करते हैं. संगठन ने कहा, “जिस घर में हर रुपया मायने रखता है और हर दिन संघर्ष से भरा है, वहां बेटी का गायब हो जाना ऐसा डरावना सपना बन गया है, जो सुबह होने पर भी खत्म नहीं होता.”

परिवार को धमका भी रहे

वीओपीएम का आरोप है कि घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद लड़की की बरामदगी में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है. इस बीच परिवार को लगातार धमकियों का सामना करना पड़ रहा है, ताकि वे कानूनी कार्रवाई न कर सकें. संगठन ने कहा, “यह क्रूरता पर क्रूरता है- पहले बच्चे को छीन लिया जाता है और फिर माता-पिता से कहा जाता है कि इसे स्वीकार करो या नुकसान झेलो. विकलांगता और गरीबी से जूझ रहे परिवारों के लिए डर एक पिंजरा बन जाता है.” संगठन ने जोर देकर कहा कि इस केस को किसी “निजी मामला” मानकर दबाया न जाए, बल्कि इसे एक नाबालिग के खिलाफ गंभीर अपराध के रूप में देखा जाए.

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