गधों के सहारे चीन का कर्ज और एहसान उतारेगा पाकिस्तान!

पाकिस्तान ने ग्वादर बंदरगाह से चीन को गधे के मांस और खाल के निर्यात को मंजूरी दे दी है.

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गधों के सहारे चीन का कर्ज और एहसान उतारेगा पाकिस्तान!

आपने कहावत सुनी होगी कि मजबूरी में गधे को भी बाप बनाना पड़ता है. पाकिस्तान की कहानी लेकिन दूसरी है. उसे मजबूरी में गधा बेचना पड़ता है. पाकिस्तान के आर्थिक समन्वय समिति ने सोमवार, 27 अप्रैल को ग्वादर बंदरगाह से चीन को गधे के मांस और खाल के निर्यात को मंजूरी दे दी. खास बात है कि चीन में पाकिस्तान से आए गधों की खाल से एक खास तरह का दवाई बनाई जाती है. चलिए आपको पहले बताते हैं कि पाकिस्तान ने क्या फैसला लिया है और चीन में पाकिस्तानी गधों की इतनी मांग क्यों है.

पाकिस्तान ने क्या फैसला लिया है?

डॉन की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के आर्थिक समन्वय समिति ने खाद्य सुरक्षा विभाग की सलाह पर विचार करने के बाद अपनी मंजूरी दे दी. अब आधिकारिक तौर पर ग्वादर बंदरगाह से चीन को गधे के मांस और खाल का निर्यात हो सकेगा. इस बैठक की अध्यक्षता पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने की. इस बैठक में इस बात पर संतोष जताया गया कि महंगाई का दबाव कम हो रहा है, आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में गिरावट आ रही है और रुझान "धीरे-धीरे स्थिरीकरण" की ओर इशारा कर रहे हैं.

चीन में पाकिस्तानी गधों की इतनी मांग क्यों है?

चीन में गधे से बनने वाली एक खास दवाई तैयार की जाती है, जिसे एजियाओ कहा जाता है. इस दवाई की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए हर साल बड़ी संख्या में गधों को मारा जाता है. एजियाओ असल में एक तरह का जिलेटिन होता है, जिसका इस्तेमाल पारंपरिक चीनी चिकित्सा में किया जाता है. इसे बनाने के लिए मरे हुए गधे की खाल को उबालकर एक तरल पदार्थ तैयार किया जाता है.

अब सवाल यह उठता है कि सूप जैसा दिखने वाला यह एजियाओ इतना खास क्यों है. दरअसल, पारंपरिक चीनी चिकित्सा में इसे तीन सबसे महत्वपूर्ण टॉनिक में गिना जाता है. डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में इसका इस्तेमाल करीब 3,000 सालों से होता आ रहा है. पिछले कुछ दशकों में इसका चलन चीन के बाहर भी बढ़ा है, जैसे इंडोनेशिया, सिंगापुर और हॉन्गकॉन्ग में. इसके साथ ही, इसे बनाने वाली कंपनियों ने दुनियाभर में अपने कारोबार और उपयोग को फैलाया है.

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रिपोर्ट बताती है कि एजियाओ का इस्तेमाल थकान कम करने, इम्यून सिस्टम मजबूत करने, ट्यूमर खत्म करने और एनीमिया दूर करने के लिए क्लीनिकों में किया जाता है. 2013 से 2016 के बीच चीन में इसका सालाना उत्पादन 3,200 टन से बढ़कर 5,600 टन तक पहुंच गया, जो करीब 20 प्रतिशत की वार्षिक बढ़ोतरी थी. इसके बाद अगले पांच सालों में उत्पादन में 160 प्रतिशत तक की बड़ी छलांग देखी गई. चीन में मिडिल क्लास के बढ़ने के साथ एजियाओ की मांग भी तेजी से बढ़ी है, और इस मांग को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में गधों की खाल की जरूरत पड़ रही है.

स्थिति ऐसी हो गई है कि चीन को पाकिस्तान से गधे मंगाने पड़ रहे हैं. इसका कारण यह है कि चीन में खुद गधों की संख्या तेजी से घट गई है. रिपोर्ट के अनुसार, 1990 में जहां गधों की आबादी 56 लाख थी, वहीं 2022 तक यह घटकर सिर्फ 8.6 लाख रह गई, यानी लगभग 80 प्रतिशत की गिरावट. इसी कमी के चलते चीन को अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और एशिया के अन्य देशों से सप्लाई लेनी पड़ रही है. हालांकि, 2024 में अफ्रीकी यूनियन ने गधों की खाल के व्यापार पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसके बाद चीन के लिए पाकिस्तान ही एक प्रमुख सप्लायर के रूप में बचा है.

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