पाकिस्तान में 8 फरवरी को कौन सा भूचाल आने वाला है? शहबाज शरीफ और पाक फौज के हाथ-पांव क्यों फूले

Pakistan's 8 February Protest: विपक्षी पार्टियों ने संसद और जनता को विश्वास में लिए बिना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने के पाकिस्तान सरकार के फैसले की भी आलोचना की है.

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पाकिस्तान की शहबार शरीफ सरकार के सामने विपक्ष की चुनौती
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  • पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियां 8 फरवरी को आम चुनावों में धांधली के विरोध में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगी
  • तहरीक तहफुज आईन-ए-पाकिस्तान ने 8 फरवरी को जेल भरो आंदोलन और पूरे पाकिस्तान में हड़ताल का आह्वान किया है
  • जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल ने रावलपिंडी में 8 फरवरी को चुनाव धांधली के खिलाफ रैली करने का निर्णय लिया है
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पाकिस्तान की शहबार शरीफ सरकार की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही. अपने ही पाले हुए आतंकवाद से जूझ रही शहबाज सरकार को घेरने के लिए पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियां कमर कस चुकी हैं. पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों ने साल 2024 के आम चुनावों में हुई कथित धांधली के विरोध में सरकार को घेरने के लिए 8 फरवरी की तारीख तय की है और इसके लिए योजना भी बना ली है. यह रिपोर्ट पाकिस्तान अखबार डॉन ने छापी है.

रिपोर्ट के अनुसार तहरीक तहफुज आईन-ए-पाकिस्तान (TTPA) ने संकेत दिया है कि 8 फरवरी को जेल भरो तरीख (खुद से गिरफ्तारी देना) की घोषणा कर सकती है और लोगों से पूरा पाकिस्तान बंद रखने का आग्रह कर सकती है. इसे इमरान खान की पार्टी PTI भी अपना सपोर्ट देगी. दूसरी तरफ जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (JUI-F) ने रावलपिंडी में एक सार्वजनिक सभा करने का फैसला किया है.

पाकिस्तान के विपक्ष का प्लान क्या है?

डॉन की रिपोर्ट के अनुसार TTPA के अध्यक्ष महमूद खान अचकजई ने सोमवार को कहा कि उसने 8 फरवरी को देश भर में विरोध-प्रदर्शन का जो आह्वान किया है, उसे भी परिस्थिति में वापस नहीं लिया जाएगा. उन्होंने जनता से उस दिन सब कुछ बंद करने का आग्रह किया है. विरोध प्रदर्शन के लिए 8 फरवरी का दिन इसलिए चुना गया है क्योंकि 2024 में इसी तारीख को आम चुनाव हुए थे.

उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि विपक्षी पार्टियों का गठबंधन 8 फरवरी को 'जेल भरो तारीख' की घोषणा कर सकता है. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत होगी और इसके बाद और कदम उठाए जाएंगे. रिपोर्ट के अनुसार अचकजई ही इस बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे. इसमें गठबंधन के उप प्रमुख सीनेटर अल्लामा राजा नासिर अब्बास, इमरान खान की पार्टी PTI के अध्यक्ष बैरिस्टर गौहर अली खान, सिंध के पूर्व गवर्नर जुबैर उमर, असद कैसर, डॉ अम्मार अली जान, मुस्तफा नवाज खोखर, अखुनजादा हुसैन यूसुफजई और वकील खालिद चौधरी ने भाग लिया. यहां फैसला लिया गया कि 8 फरवरी को काला दिवस के रूप में मनाया जाएगा और पूरे देश में हड़ताल की जाएगी.

इन विपक्षी पार्टियों ने संसद और जनता को विश्वास में लिए बिना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने के पाकिस्तान सरकार के फैसले की भी आलोचना की है.

उधर जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल कर्फ्यू में करेगी रैली

इस बीच, जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी 2024 आम चुनावों में हुई धांधली के विरोध में 8 फरवरी को रावलपिंडी में एक रैली करेगी. JUI-F रावलपिंडी जिले के प्रवक्ता हाफिज जियाउल्लाह के अनुसार, पार्टी प्रमुख सार्वजनिक सभा को संबोधित करेंगे. पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि 8 फरवरी के चुनाव "जनता के जनादेश की हत्या के समान" और देश के वोट का "अपमान" था, और "किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा".

हालांकि दूसरी तरफ याद रहे कि रावलपिंडी प्रशासन ने दिसंबर से ही जिले में धारा 144 लागू कर रखी है. इस कर्फ्यू को हर हफ्ते आगे बढ़ाया जा रहा है. धारा 144 के तहत किसी तरह की सार्वजनिक समारोहों की अनुमति नहीं है. अभी 23 जनवरी से 6 फरवरी तक कर्फ्यू लगाया गया है और इसे आगे भी बढ़ाया जाएगा. यानी अगर JUI-F रावलपिंडी में रैली करती है तो उसका स्थानीय पुलिस से टकराव होनी तय ही है.

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