नॉर्थ कोरिया के अंतरिक्ष कार्यक्रम को बड़ा घटका, जासूसी उपग्रह ले जा रहे रॉकेट में हुआ विस्फोट

रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आया है कि रॉकेट के फटने का कारण रॉकेट मोटर में आया इंधन था लेकिन इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं, जिनकी जांच की जा रही है.

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(फाइल फोटो)

उत्तर कोरिया द्वारा सोमवार को जासूसी उपग्रह को लॉन्च करने का प्रयास उस वक्त विफल हो गया जब रॉकेट हवा में ही विस्फोट हो गया. प्योंगयांग द्वारा रॉकेट को लेकर जारी की गई चेतावनी के कुछ घंटों बाद ही इसे लॉन्च कर दिया गया था, जो ओर्बिट में उनका दूसरा जासूसी उपग्रह होता. 

हालांकि, उत्तर कोरिया द्वारा लॉन्च किया गया यह रॉकेट हवा में ही फट गया. इससे पहले पिछले साल नवंबर में उत्तर कोरिया ने अपने एक जासूसी रॉकेट को सफलतापूर्वक ओर्बिट में लॉन्च किया था. उत्तर कोरिया के नेशनल एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी एडमिनिस्ट्रेशन के उप महानिदेशक ने राज्य मीडिया द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा, "नए उपग्रह वाहक रॉकेट का प्रक्षेपण उस समय विफल हो गया जब पहले चरण की उड़ान के दौरान यह मध्य हवा में फट गया."

रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आया है कि रॉकेट के फटने का कारण रॉकेट मोटर में आया इंधन था लेकिन इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं, जिनकी जांच की जा रही है. दक्षिण कोरिया और जापान के अधिकारियों ने पहले बताया था कि प्रक्षेपण विफल हो गया है. 

दक्षिण के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (जेसीएस) ने कहा कि उत्तर कोरिया ने रात में लगभग 10 बजकर 44 मिनट पर अपने पश्चिमी तट से दक्षिणी पथ पर प्रक्षेप्य दागा था. जापानी मुख्य कैबिनेट सचिव योशिमासा हयाशी ने संवाददाताओं को बताया कि उत्तर कोरिया द्वारा प्रक्षेपित वस्तु पीले सागर के ऊपर गायब हो गई. 

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हयाशी ने कहा, "ये प्रक्षेपण प्रासंगिक सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन हैं और हमारे लोगों की सुरक्षा से संबंधित एक गंभीर मामला है." विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा, संयुक्त राज्य अमेरिका ने लॉन्च की निंदा की, "जिसमें ऐसी प्रौद्योगिकियां शामिल थीं जो सीधे तौर पर डीपीआरके के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से संबंधित हैं और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के कई प्रस्तावों का उल्लंघन है." 

यह लॉन्च चीन, दक्षिण कोरिया और जापान द्वारा सियोल में एक दुर्लभ तीन-तरफा शिखर सम्मेलन संपन्न होने के कुछ घंटों बाद हुआ. दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यूं सुक येओल और जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने उत्तर कोरिया से लॉन्च को आगे नहीं बढ़ाने का आह्वान किया था. चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग ने लॉन्च का उल्लेख नहीं किया, लेकिन सभी पक्षों से प्रायद्वीप पर तनाव कम करने का आह्वान किया.

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