नेपाल में पिछले साल जेनजी के भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों के बाद गुरुवार को सुबह 7 बजे मतदान शुरू हुआ. ये चुनाव नेपाल की दिग्गज पारंपरिक पार्टियों नेपाली कांग्रेस, सीपीएन-यूएमएल और युवाओं की नुमाइंदगी का दावा करने वाली पार्टियों के लिए बड़ा इम्तेहान है. नेपाल में सुबह से ही राजधानी काठमांडू के बाहर लंबी कतारें मतदाताओं की देखी गईं. लोगों का कहना है कि नेपाल में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद हो रहे ये चुनाव उनके भविष्य के लिए बेहद अहम हैं. नेपाल की राजनीति में बाबूराम भट्टाराई, पुष्प दहल कमल प्रचंड, केपी शर्मा ओली जैसे पूर्व प्रधानमंत्रियों और उनकी पार्टियों का दबदबा रहा है. लेकिन राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी और उनके नेता के तौर पर बालेन शाह युवाओं का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं. महज 35 साल के शाह काठमांडू के पूर्व मेयर और रैपर भी रहे हैं. शाह झापा-5 सीट से पूर्व पीएम ओली के खिलाफ ताल ठोंक रहे हैं.
8 लाख नए युवा वोटर
तीन करोड़ की आबादी वाले नेपाल के चुनाव में 1.9 करोड़ वोटर हैं, जो सितंबर 2005 में युवाओं के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के बाद नई सरकार के चुनाव के लिए वोट कर रहे हैं. इसमें 8 लाख नए युवा वोटर हैं. आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में 77 लोग मारे गए थे. संसद और कई अन्य सरकारी इमारतों को आग के हवाले कर दिया गया था. नेपाल में अंतरिम प्रधानमंत्री के तौर पर सुशीला कार्की ने जिम्मेदारी संभाली थी.
पिछले साल विरोध प्रदर्शन
युवाओं की अगुवाई में नेपाल में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया बैन भी लगाया गया था. देश में बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ युवाओं का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा था. अंतरिम पीएम सुशीला कार्की ने लोगों ने बिना किसी भय के मतदान में हिस्सा लेने को कहा है. इस बार चुनाव में बड़े पैमाने पर युवा उम्मीदवार मैदान में हैं, जो राजनीति में बड़े बदलाव की हुंकार भर रहे हैं.
प्रधानमंत्री पद के कई दावेदार
नेपाल दुनिया की दस सबसे ऊंची चोटियों में से आठ का घर है.विधानसभा क्षेत्रों तक चुनाव प्रचार सामग्री और चुनाव अधिकारियों को पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर्स का इस्तेमाल किया गया. काठमांडू से इतर लोगों का ध्यान इस बार दक्षिणी मैदानी इलाकों में है, जहां प्रधानमंत्री के कई दावेदार चुनाव मैदान में हैं.
केपी शर्मा ओली बनाम बालेंद्र शाह
पिछले साल प्रधानमंत्री पद से हटाए गए 74 साल के मार्क्सवादी नेता केपी शर्मा ओली सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहे हैं. उन्हें उनके गृह क्षेत्र झापा में पूर्व काठमांडू मेयर और 35 वर्षीय रैपर से राजनेता बने बालेंद्र शाह से चुनौती मिल रही है. झंपा-5 सीट पर लगभग 163000 मतदाता है. यहां से तय होगा कि ओली अपनी सीट बरकरार रख पाएंगे या शाह संसद में प्रवेश करेंगे.
परिवर्तन की बयार बहेगी-शाह
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के बालेंद्र शाह ने खुद को युवाओं के नायक के तौर पर पेश किया है. उनका चुनाव चिन्ह भी परिवर्तन की घंटी बजाने वाला है. झापा में वोट डालने के लिए कतार में खड़े 66 साल के टेक बहादुर आले ने कहा, जेन जी के विरोध प्रदर्शन में लोगों ने अपनी जान गंवाई और हमें उम्मीद है कि उनका खून बदलाव लाएगा.
नेपाली कांग्रेस में भी युवा दावेदार
प्रधानमंत्री पद की दौड़ में देश की सबसे पुरानी पार्टी नेपाली कांग्रेस के नए प्रमुख 49 साल के गगन थापा भी शामिल हैं. उनका कहना है कि अनुभवी नेताओं के बार-बार बदलते रहने वाले बुजुर्गों के क्लब को समाप्त करना चाहते हैं. उम्मीद है कि इस बार एक ऐसी सरकार बनेगी जो सुशासन वाली हो और भ्रष्टाचार मुक्त हो.
नेपाली संसद की 165 सीटों पर लड़ाई
संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा (275 सदस्य) के 165 सीटों के लिए प्रत्यक्ष चुनाव में 3400 से अधिक उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. जबकि 110 सीटें पार्टी प्रतिनिधित्व के माध्यम से चुनी जाएंगी. पहाड़ी इलाकों में मतदान खत्म होने के बाद बैलेट बॉक्स को मतगणना केंद्रों तक लाने में वक्त लग सकता है.मुख्य चुनाव आयुक्त राम प्रसाद भंडारी ने कहा कि प्रत्यक्ष चुनाव के प्रारंभिक परिणाम 24 घंटे के भीतर प्रकाशित कर दिए जाएंगे.
चुनावी विश्लेषकों का कहना है कि नेपाल में लोकतंत्र आने के बाद लंबे समय से किसी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिला है. इस बार भी ऐसा होते नहीं दिख रहा है. अगर गठबंधन की नौबत आती है तो नई सरकार शक्ल लेने में काफी वक्त लग सकता है.














