खामोश बेचैनी और... मिडिल ईस्ट जंग के बीच दुबई के अल सत्वा से NDTV की Ground Report

माइग्रेंट वर्कर्स और व्यापारियों के लिए ये व्यस्त बाजार जीवन रेखा है. युद्ध को लेकर लगातार आ रही चेतावनियां तनाव का कारण बन रही हैं. फिर भी, अधिकांश का कहना है कि वे घबरा नहीं रहे हैं. इसके बजाय, वे अपनी दुकानें खोलकर अपने रोज के काम में लगे हुए हैं.

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मिडिल ईस्ट जंग के कारण पूरी दुनिया तनाव में है. अब सोचिए ऐसे में मिडिल ईस्ट के देशों में कैसा माहौल होगा? NDTV की टीम जब UAE पहुंची तो दुबई के अल सत्वा का दौरा किया. अल सत्वा, दुबई के सबसे पुराने बाजारों में से एक है. यहां एनडीटीवी ने देखा कि लगभग सभी दुकानें खुली हैं और कारोबार आम दिनों की तरह ही चल रहा है, हालांकि, निवासियों में एक खामोश बेचैनी साफ महसूस की जा सकती है. 

ये दुबई में मिठाई की दुकान है

अल सत्वा में ज्यादातर एशियाई समुदाय के लोग रहते हैं. इनमें भारतीय, पाकिस्तानी और फिलिपिनो शामिल हैं. ये वर्षों से यहां रह रहे हैं और काम कर रहे हैं. सुबह-सुबह अल सत्वा की संकरी गलियों और पारंपरिक बाजार मार्गों से गुजरते हुए एनडीटीवी ने देखा कि दुकानें खुल रही हैं, व्यापारी अपने स्टोर के बाहर सामान सजा रहे थे और छोटे-छोटे भोजनालय वर्कर्स को उनके दिन की शुरुआत के लिए भोजन परोस रहे थे.
पहली नजर में तो सब कुछ सामान्य लगता है.

रात में तेज आवाजें...

भारतीय व्यापारी और छोटे व्यवसायी कहते हैं कि वे अपनी दुकानें पहले की तरह ही चला रहे हैं. कई लोगों का कहना है कि उन्हें यूएई के अधिकारियों पर भरोसा है और उन्हें विश्वास है कि सरकार क्षेत्रीय स्थिति में हो रहे बदलावों से निपटने के लिए तैयार है. हालांकि, निवासी ये भी स्वीकार करते हैं कि सब कुछ सामान्य होने के बाद भी माहौल कुछ असामान्य सा तो है. इलाके में रहने वाले कई लोगों ने बताया कि उन्हें हाल ही में रात में तेज आवाजें सुनाई दे रही हैं और उनके मोबाइल फोन पर मिसाइल या आपातकालीन चेतावनी आ रही हैं. कई लोगों का कहना है कि यूएई में रहते हुए उन्होंने ऐसा पहले कभी अनुभव नहीं किया था.

दुबई में खाने-पीने की दुकान में काम करते एक एशियाई नागरिक.

यूएई पर भरोसा

माइग्रेंट वर्कर्स और व्यापारियों के लिए ये व्यस्त बाजार जीवन रेखा है. युद्ध को लेकर लगातार आ रही चेतावनियां तनाव का कारण बन रही हैं. फिर भी, अधिकांश का कहना है कि वे घबरा नहीं रहे हैं. इसके बजाय, वे अपनी दुकानें खोलकर अपने रोज के काम में लगे हुए हैं. ये क्षेत्रीय तनावों के बारे में चिंता और देश की सुरक्षा व्यवस्था में विश्वास दोनों को दर्शाता है. उत्तर प्रदेश, लखनऊ, उत्तराखंड और नैनीताल जैसे भारत के कई हिस्सों से आए वर्कर्स ने कहा कि हमने पिछले 16 वर्षों में ऐसी स्थिति कभी नहीं देखी. हां, भारत में हमारे परिवार चिंतित हैं, लेकिन यूएई के अधिकारी हमारे साथ सहयोग कर रहे हैं.

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