Bangladesh Violence: बांग्लादेश में हिंदुओं की टारगेट किलिंग से हिला संयुक्त राष्ट्र, UN ने यूनुस सरकार को दी ये बड़ी नसीहत!

Bangladesh News in Hindi: बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी बर्बरता ने अब अंतरराष्ट्रीय सीमाएं लांघ दी हैं. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बांग्लादेश के खूनी मंजर पर जो कहा है, उसने ढाका से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मचा दिया है.

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बांग्लादेश के ढाका में एक परिसर में आग लगाने के बाद कैमरे के सामने प्रतिक्रिया देता प्रदर्शनकारी.
PTI

Bangladesh News: बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खलबली मचा दी है. संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बांग्लादेश के बिगड़ते हालातों पर गहरी चिंता जताते हुए साफ कहा है कि अब पानी सिर के ऊपर जा रहा है.

'हर अल्पसंख्यक को मिलना चाहिए सुरक्षा का अहसास'

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टेफन दुजारिक ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को आईना दिखाया. उन्होंने हाल ही में हुई हिंदुओं की 'मॉब लिंचिंग' पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, 'चाहे बांग्लादेश हो या दुनिया का कोई भी देश, जो लोग बहुसंख्यक नहीं हैं, उन्हें पूरी सुरक्षा मिलनी चाहिए. हर नागरिक को अपने ही देश में सुरक्षित महसूस करने का हक है.'

राजनीति से कोई लेना-देना नहीं, फिर भी बन रहे निशाना!

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले दो हफ्तों में हिंसा का स्तर फिर से बढ़ गया है. चौंकाने वाली बात यह है कि भीड़ उन हिंदुओं को भी निशाना बना रही है जिनका राजनीति से कोई वास्ता नहीं है. केवल धर्म के आधार पर उन्हें घर से निकालकर पीटा जा रहा है.

बांग्लादेश में हिंसा क्यों हो रही है

बांग्लादेश में जारी हिंसा की जड़ों में पिछले साल अगस्त में हुआ सत्ता परिवर्तन है. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से राज्य में शुरू हुआ अस्थिरता का दौर रुकने का नाम नहीं ले रहा है और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा लगातार जारी है. हाल के दिनों में इस तनाव को तब और हवा मिली जब 'इंकलाब मंच' से जुड़े युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत हो गई, जिसके बाद अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय पर हमले और भी तेज हो गए हैं.

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बांग्लादेश हिंसा की अमेरिका में गूंज

इस हिंसा की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई दे रही है. अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया गया है. अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के सदस्य राजा कृष्णमूर्ति और सुहास सुब्रमण्यम ने हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा की गई नृशंस हत्या की कड़ी निंदा की है. सांसदों ने इसे अस्थिरता के दौर की एक खतरनाक घटना बताते हुए अल्पसंख्यकों के घरों और मंदिरों को निशाना बनाए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है.

फरवरी चुनाव पर मंडरा रहा खतरा?

संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि फरवरी में होने वाले चुनावों के लिए शांतिपूर्ण माहौल होना अनिवार्य है. मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने कहा है कि "बदला और प्रतिशोध" समाज को बर्बाद कर देगा. उन्होंने यूनुस सरकार से अपील की है कि वे कट्टरपंथियों पर लगाम लगाएं और मंदिरों व घरों की सुरक्षा सुनिश्चित करें.

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क्या यूनुस सरकार बचा पाएगी अल्पसंख्यकों को?

UN ने हालांकि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार पर भरोसा जताया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. मंदिरों पर हमले और हिंदुओं की टारगेट किलिंग ने पूरी दुनिया में मानवाधिकारों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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