वेनेजुएला पर अमेरिका का 'कंट्रोल' या सिर्फ तेल नाकाबंदी? ट्रंप के बयान पर मार्को रुबियो का यू-टर्न

अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने कहा वेनेजुएला के रोजमर्रा के शासन में अमेरिका सीधे हस्तक्षेप नहीं करेगा, बल्कि तेल नाकाबंदी को सख्ती से लागू करेगा.

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वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के तख्तापलट और उन्हें अमेरिकी सेना द्वारा न्यूयॉर्क ले जाए जाने के बाद पूरी दुनिया की नजरें अब इस दक्षिण अमेरिकी देश के भविष्य पर टिकी हैं. शनिवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि अब अमेरिका वेनेजुएला को चलाएगा (Run Venezuela), जिससे अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल मच गई थी. हालांकि, रविवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस पर सफाई देते हुए स्थिति को स्पष्ट करने की कोशिश की.

क्या अमेरिका करेगा सीधा शासन? 

मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका वेनेजुएला के रोजमर्रा के शासन में सीधी भूमिका नहीं निभाएगा. रुबियो के अनुसार, ट्रंप के 'कंट्रोल' का अर्थ वहां की मौजूदा 'ऑयल क्वारंटीन' (तेल नाकाबंदी) को सख्ती से लागू करना है. रुबियो ने CBS के शो 'फेस द नेशन' में कहा, 'हम तेल उद्योग पर अपना नियंत्रण जारी रखेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि तेल का लाभ वहां की जनता को मिले और ड्रग तस्करी पर लगाम लगे.'

इराक और लीबिया जैसी स्थिति नहीं 

रुबियो का यह बयान उन चिंताओं को दूर करने के लिए आया है जिसमें कयास लगाए जा रहे थे कि वेनेजुएला में इराक या अफगानिस्तान जैसा लंबा सैन्य हस्तक्षेप हो सकता है. रुबियो ने विदेश नीति विशेषज्ञों की आलोचना करते हुए कहा कि यह मध्य पूर्व नहीं है, बल्कि पश्चिमी गोलार्ध है और यहाँ हमारा मिशन पूरी तरह अलग है. उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका फिलहाल मादुरो के उन अधीनस्थों को शासन करने का समय देगा जो अभी वहां सत्ता में हैं.

मादुरो की पहली अदालती पेशी आज 

दूसरी ओर, निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोर्स को शनिवार रात न्यूयॉर्क लाया गया. मादुरो पर नार्को-टेररिज्म और ड्रग तस्करी के गंभीर आरोप हैं. सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में मादुरो को मुस्कुराते हुए DEA एजेंटों के साथ देखा गया. उन्हें सोमवार को मैनहट्टन की फेडरल कोर्ट में पहली बार पेश किया जाएगा.

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इस बीच, वेनेजुएला की राजधानी कराकस में सन्नाटा पसरा हुआ है. व्यापारिक संस्थान और चर्च बंद हैं. वेनेजुएला की उप-राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने खुद को अंतरिम राष्ट्रपति घोषित करते हुए मादुरो की तत्काल रिहाई की मांग की है. हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि वह मादुरो को वैध नेता नहीं मानता और सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी होने तक अपनी पकड़ मजबूत रखेगा.

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