'खून की एक-एक बूंद की कीमत चुकानी होगी', लारिजानी की हत्या पर ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का बड़ा बयान

अली लारिजानी की मौत को लेकर इजरायल ने कुछ दिन पहले ही दावा किया था. इजरायल ने कहा था कि इस हमले में हमने अली लारिजानी को मार दिया है. इजरायल के इस दावे का बाद में ईरान ने भी पुष्टि कर दी थी और उसने ये मान लिया था कि अली लारिजानी अब जिंदा नहीं हैं.

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ईरान के सुप्रीम लीडर का बड़ा बयान
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  • ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अली लारिजानी की मौत का बदला लेने की कड़ी चेतावनी दी है
  • अली लारिजानी ने दस साल ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टिंग विभाग के प्रमुख के रूप में काम किया था
  • उन्होंने 2005 में सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव और मुख्य परमाणु वार्ताकार के रूप में कार्य किया था
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ईरान के सिक्योरिटी चीफ अली लारिजानी की मौत को लेकर सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि लारिजानी की मौत यूं ही नहीं जाएगी, हम खून की हर बूंद का बदला लेंगे. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इंसाफ जरूर होगा. उन्होंने इस हमले को लेकर एक बयान भी जारी किया है. इस बयान में ईरान के सुप्रीम लीडर ने कहा कि आतंक के ऐसे काम करके केवल दुश्मनों की शत्रुता को दर्शाते हैं और इस्लामी राष्ट्र के संकल्प को मजबूत करेंगे. निस्संदेह, न्याय मिलेगा. 

आखिर ईरान के लिए इतने अहम क्यों थे अली लारिजानी?

आपको बता दें कि अली लारिजानी पहले 10 सालों तक ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर के प्रमुख थे और सबकुछ उनके कंट्रोल में था. फिर 2004 में देश के सुप्रीम लीडर खामेनेई के सुरक्षा सलाहकार बनने के लिए उन्होंने वह पद छोड़ दिया था. 2005 में, लारिजानी को ईरान की शीर्ष सुरक्षा संस्था, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का सचिव नियुक्त किया गया.

2005 में उन्हें ईरान की ओर से शीर्ष परमाणु वार्ताकार नियुक्त किया गया और इसके बाद उन्होंने परमाणु फाइल पर सख्त रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने अपने परमाणु फ्यूल को छोड़ने के बदले में उस समय यूरोपीय संघ द्वारा दिए जा रहे छूट को स्वीकार करता है, तो यह एक मोती देकर टॉफी लेने के बराबर होगा.  लारिजानी ने अक्टूबर 2007 में ईरान के मुख्य परमाणु वार्ताकार का पद छोड़ दिया. 

अली लारिजानी की मौत खामेनेई की मौत से बड़ा झटका क्यों?

रिपोर्ट के अनुसार ईरान की अली लारिजानी की मौत ईरान के लिए एक विनाशकारी झटका है और संभवतः युद्ध की शुरुआत में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत से भी बड़ा उलटफेर है. ईरानी नेतृत्व को कमजोर करने के किसी भी प्रयास में, लारिजानी हमेशा मुख्य टारगेट माने जा रहे थे- मुख्य रूप से ईरानी राजनीति के कई स्तरों पर फैलने की उनकी क्षमता और न केवल ईरान में बल्कि चीन और रूस सहित दूसरे देशों में उनके विशाल व्यक्तिगत प्रभाव के कारण. रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2020 में बगदाद में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के नेता कासिम सुलेमानी की अमेरिका द्वारा हत्या के बाद से ईरानी शासन के लिए शायद इससे बड़ा कोई नुकसान नहीं हुआ है.

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