- जापान की पहली महिला PM ताकाइची की पार्टी और उसका गठबंधन निचले सदन में दो-तिहाई से अधिक सीटें जीत रहा है
- जापान और चीन के बीच बढ़े तनाव के बीच ताकाइची की जीत से दोनों देशों के रिश्ते और अधिक तनावपूर्ण हो सकते हैं
- अमेरिका और भारत समेत कई देशों ने ताकाइची को जीत पर बधाई दी है जबकि चीन ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है
जापान की प्रधान मंत्री साने ताकाइची ने इतिहास रच दिया है. जापान की पहली प्रधानमंत्री ताकाइची के नेतृत्व वाली जापान की सत्तारूढ़ पार्टी चुनाव में दो-तिहाई का बहुमत हासिल करने जा रही है. यदि फाइनल नतीजों में इसकी पुष्टि हो जाती है, तो यह चुनावी नतीजा पीएम ताकाइची को अपने रूढ़िवादी एजेंडे को लागू करने के लिए एक मजबूत जनादेश दे देगा. अबतक सामने आए आंकड़ों से पता चलता है कि ताकाइची की लिबरल डेमोक्रेट पार्टी (LDP) के नेतृत्व वाले गठबंधन ने जापान के निचले सदन (लोकसभा जैसे) में 465 में से 352 सीटें जीती हैं, जिसमें अकेले LDP ने 316 का बहुमत हासिल किया है.
जापान की पहली महिला प्रधान मंत्री ने पार्टी नेता बनने के सिर्फ चार महीने बाद चुनाव करवाकर स्पष्ट जनादेश मांगा था. ताकाइची ने वादा किया था कि अगर उनकी पार्टी बहुमत हासिल करने में विफल रही तो वह पद छोड़ देंगी. कुछ लोगों ने समय से पहले चुनाव कराने (स्नैप इलेक्शन) को एक बड़ा जुआ कहा था. लेकिन ताकाइची ने बंपर चुनावी जीत हासिल करके इस दांव को सफल बना दिया है. बता दें कि LDP ने 2024 में संसद के दोनों सदनों में अपना बहुमत खो दिया और कोमिटो पार्टी के साथ उसका दशकों पुराना गठबंधन टूट गया था. चुनावी नतीजे साफ बता रहे हैं कि ताकाइची की व्यक्तिगत लोकप्रियता ने पार्टी को मदद की है, उनकी सरकार के लिए अप्रूवल रेटिंग ज्यादातर 70% से ऊपर रही है.
जीत से जापान- चीन के रिश्तों पर क्या असर होगा?
- जापान के वोटर ताकाइची के सीधे-सादे, मेहनती इमेज से आकर्षित हुए हैं, लेकिन उनकी राष्ट्रवादी सोच और सुरक्षा पर जोर देने से शक्तिशाली पड़ोसी चीन के साथ संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं. ताकाइची की नीतियां चीन को लेकर कड़े रुख के रूप में जानी जाती हैं, खासकर चीन के बढ़ते सैन्य प्रभाव और ताइवान मुद्दे पर. इस जीत के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ सकता है.
- वह जापान की रक्षा क्षमता और सैन्य खर्च बढ़ाना चाहती हैं, जिसका मकसद चीन के बढ़ते प्रभाव से मुकाबला करना है. इससे द्विपक्षीय संबंधों में तनाव की संभावना बढ़ सकती है.
- ताकाइची को चीन ने तुरंत बधाई तक नहीं दी, जो संकेत है कि बीजिंग उनके नेतृत्व को लेकर खास सकारात्मक नहीं है और रिश्तों में ठंडापन रह सकता है. दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लेकर भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी तक ने ताकाइची को जीत पर बधाई दी है.
- जापान के अधिक सक्रिय सुरक्षा रुख के खिलाफ चीन आर्थिक और कूटनीतिक रूप से जवाब दे सकता है. दोनों देशों में व्यापार- निवेश के मुद्दों और क्षेत्रीय मंचों पर टकराव देखने को मिल सकता है. इससे दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है. ताकाइची की जीत से न केवल चीन-जापान संबंध, बल्कि पूरा एशियाई सुरक्षा माहौल बदल सकता है, जिससे चीन और जापान के बीच रणनीतिक मुकाबला और गहरा हो सकता है.
- हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि ताकाइची अब चीन के खिलाफ यह सख्ती कम कर सकती हैं क्योंकि चुनाव खत्म हो गए हैं. एएफफी की रिपोर्ट के अनुसार सिरैक्यूज यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान की एसोसिएट प्रोफेसर मार्गरीटा एस्टेवेज-अबे ने कहा कि ताकाइची अब चीन के साथ तनाव कम कर सकती हैं. उन्होंने वोटिंग से पहले एएफपी को बताया, "अब उन्हें 2028 तक किसी भी चुनाव के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है, जब अगले उच्च सदन के चुनाव होंगे... तो जापान के लिए सबसे अच्छा परिदृश्य यह है कि ताकाइची एक गहरी सांस लें और चीन के साथ संबंधों को सुधारने पर ध्यान केंद्रित करें."
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