- बी-2 बॉम्बर ने 1999 में कोसोवा युद्ध में नाटो के ऑपरेशन एलाइड फोर्स के दौरान पहली बार युद्ध में हिस्सा लिया था
- 2001-2002 में तालिबान के गुप्त ठिकानों को नष्ट करने के लिए अमेरिका ने बी-2 बॉम्बर का उपयोग किया था
- मार्च 2003 में इराक युद्ध में बी-2 ने सद्दाम के कमांड सेंटरों और मिसाइल सुविधाओं को निशाना बनाया था
दुनिया के सबसे खतरनाक और महंगे स्टील्थ बमवर्षकों में शामिल अमेरिका का बी‑2 बॉम्बर जब भी किसी मिशन पर निकला है, उसने दुश्मन को हिला कर रख दिया है. रडार से लगभग अदृश्य रहने की क्षमता, हजारों किलोमीटर दूर तक बिना रुके उड़ान और सटीक हमला करने की ताकत बी‑2 बॉम्बर को आधुनिक युद्धों में गेम‑चेंजर साबित करती है. अमेरिका का बी-2 बॉम्बर अब तक कई अभियानों में शामिल रहा है और हर अभियान में इसने खुद को साबित किया है. आइए जानते हैं कि अमेरिका का B-2 बॉम्बर कौन-कौनसे अभियानों में शामिल रहा है.
बी-2 बॉम्बर ने पहली उड़ान 1989 में भरी और 1993 में पहली बार इसे सेवा में शामिल किया गया. इन बॉम्बर की सबसे खास बात है कि यह कई किमी दूर तक जाकर ज्यादा वजनी बम गिरा सकते हैं. इसलिए कई बड़े अभियानों में अमेरिका ने इनका इस्तेमाल किया है.
इन अभियानों में बी-2 बॉम्बर का इस्तेमाल
- कोसोवो: बी-2 ने पूर्व यूगोस्लाविया में नाटो के ऑपरेशन एलाइड फोर्स के दौरान कोसोवा युद्ध में पहली बार 1999 में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी. अमेरिका के मिसौरी से इन बमवर्षक विमानों ने सर्बियाई ठिकानों पर सटीक हमले किए और वापस लौटा. हर मिशन 30 घंटे से अधिक समय तक चला था.
- अफगानिस्तान : अफगानिस्तान युद्ध के शुरुआती दौर में 2001-2002 में तालिबान के बंकरों, प्रशिक्षण शिविरों और गुफाओं में बने गुप्त ठिकानों को नष्ट करने के लिए इन विमानों का इस्तेमाल किया गया. ये मिशन अमेरिका से ही शुरू हुए थे और हवा में ईंधन भरने की सुविधा के कारण ये विमान बिना रुके अपने लक्ष्यों तक पहुंचते थे.
- इराक: मार्च 2003 में इराक युद्ध के शुरुआती हमलों में बी-2 बमवर्षक विमानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. बमवर्ष ने सद्दाम हुसैन से जुड़े संदिग्ध कमांड सेंटरों और मिसाइल सुविधाओं पर बंकर रोधी बम गिराए. इन हमलों ने इराक की शुरुआती हवाई सुरक्षा और लीडरशिप स्ट्रक्चर को बड़ा नुकसान पहुंचाया था.
- लीबिया: 2011 में नाटो के ऑपरेशन ओडिसी डॉन के दौरान तीन बी-2 बमवर्षक विमानों को अमेरिका से लीबिया भेजा गया. उन्होंने एयरफील्ड और एयरक्राफ्ट शेल्टर्स को निशाना बनाया, जिससे कुछ ही घंटों में नो-फ्लाई जोन लागू करने में मदद मिली; इस हमले ने लीबिया की हवाई क्षमताओं को कमजोर कर दिया और सैन्य अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
- सीरिया: कई रिपोर्टों में कहा गया है कि 2017 में पूर्वी सीरिया में ISIS के ठिकानों पर हमला करने के लिए B-2 बमवर्षक विमानों का इस्तेमाल किया गया था. हालांकि इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है. माना जाता है कि इन अभियानों में GBU-57 बंकर बस्टर बमों का इस्तेमाल किया गया था, जिनका इस्तेमाल बेहद सुरक्षित ठिकानों को नष्ट करने के लिए किया जाता है.
- यमन: अक्टूबर 2024 में अमेरिका ने यमन में हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर हमला करने के लिए इन विमानों को तैनात किया. हूती विद्रोहियों को कथित तौर पर ईरान का समर्थन प्राप्त था. पेंटागन के अनुसार, यह मिशन विमानों की क्षमता का "अद्वितीय प्रदर्शन" था.
- ईरान: बी-2 बॉम्बर से अमेरिका ने 22 जून 2025 को ईरान के तीन परमाणु स्थलों फोर्डो, नतान्ज और इस्फहान पर हमला किया. इस ऑपरेशन की पुष्टि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की थी और कहा था कि यह एक शानदार सैन्य सफलता थी. साथ ही ट्रंप ने कहा था कि परमाणु सुविधाएं पूरी तरह से नष्ट हो गईं.
- ईरान: 2026 में एक बार फिर अमेरिका ने ईरान पर हमले के लिए बी-2 बॉम्बर का इस्तेमाल किया है. अमेरिकी बॉम्बर्स ने ईरान पर 2000 पाउंड के कई बम गिराए हैं, जिसके कारण ईरान में बड़ी तबाही मची.
बी-2 बॉम्बर इस कारण बेहद खतरनाक
बी‑2 की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टील्थ तकनीक है. यह दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देकर सीधे हाई‑वैल्यू टारगेट पर वार करता है. यह जीपीएस‑गाइडेड बम और बंकर‑बस्टर जैसे हथियार गिराकर भूमिगत कमांड सेंटर, रनवे और हथियार डिपो को नष्ट करने में सक्षम है. साथ ही लंबी दूरी तक उड़ान भरने की खूबी और हवा में ईंधन भरने की सुविधा के कारण यह अमेरिका से उड़कर दुनिया के किसी भी कोने में हमला करने में सक्षम है.
दुनिया में कितने बी‑2 बॉम्बर
बी‑2 बॉम्बर की संख्या बेहद सीमित है. कुल 21 बी‑2 बॉम्बर बनाए गए हैं. हालांकि पूर्व में 132 ऐसे विमान बनाने की तैयारी थी. हालांकि अरबों डॉलर की लागत वाले इन विमानों को इतने बड़े पैमाने पर बनाने की योजना को टाल दिया गया. वहीं 21 में से एक हादसे में नष्ट हुआ, जबकि शेष सीमित संख्या में आज भी अमेरिकी वायुसेना की सेवा में हैं. यही वजह है कि हर मिशन में इसका इस्तेमाल बेहद सोच‑समझकर किया जाता है.
कितनी है बी‑2 बॉम्बर की कीमत
बी‑2 को दुनिया का सबसे महंगा सैन्य विमान माना जाता है. एक बी‑2 बॉम्बर की औसत लागत करीब 2 अरब डॉलर से अधिक बताई जाती है. इसमें रिसर्च, स्टील्थ तकनीक, सॉफ्टवेयर और मेंटेनेंस का खर्च शामिल है. यही कारण है कि बड़ी ताकत होने के बावजूद इसकी संख्या में इजाफा नहीं किया गया है. यह इकलौता ऐसा बॉम्बर है जो बंकर बस्टर जीबीयू-57 ए/बी मैसिव आर्डनेंस पेनिट्रेटर बम (GBU‑57 bunker buster) गिराने में सक्षम है.
चार इंजन वाला विमान है बी-2 बॉम्बर
- इंजन: चार जनरल इलेक्ट्रिक एफ118- जीई-100 इंजन
- विंगस्पैन: 52.12 मीटर
- लंबाई: 20.9 मीटर
- ऊंचाई: 5.1 मीटर
- वजन: 72,575 किलोग्राम
- आयुध: पारंपरिक या परमाणु हथियार
- चालक दल: दो पायलट
- रेंज (बिना ईंधन भरे): 11 हजार किमी
- रेंज (एक बार रिफ्यूलिंग) : 18,500 किमी














