- इजरायली सेना पर दक्षिणी लेबनान के योहमोर गांव में सफेद फॉस्फोरस गोले के गैरकानूनी इस्तेमाल का आरोप
- ह्यूमन राइट्स वॉच ने दावा किया कि इजरायल ने लेबनान में आवासीय इलाकों को निशाना बनाकर तोपखाने से हमला किया
- जंग में सफेद फॉस्फोरस के इस्तेमाल को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध और खतरनाक माना जाता है
क्या जंग में सबकुछ जायज है? मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच यह सवाल इजरायल और उसकी सेना से पूछा जा रहा है. इसकी वजह है कि मानवाधिकार समूह ह्यूमन राइट्स वॉच ने सोमवार, 9 मार्च को एक रिपोर्ट में कहा कि इजरायली सेना ने "गैरकानूनी रूप से" दक्षिणी लेबनान के एक गांव पर सफेद फॉस्फोरस वाले गोले से हमला किया. चलिए आपको बताते हैं कि इस रिपोर्ट में क्या कहा गया है. यह भी जानेंगे कि सफेद फॉस्फोरस के इस्तेमाल को अवैध और खतरनाक क्यों माना जाता है.
इजरायल पर क्या आरोप लगे हैं?
जियोलोकेटिंग और सात तस्वीरों को वेरिफाई करने के बाद, ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा कि इजरायल ने दक्षिणी लेबनानी गांव योहमोर के आवासीय क्षेत्रों में तोपखाने का उपयोग करके सफेद फॉस्फोरस दागा. यह हमला इजरायली सेना द्वारा गांव के निवासियों और दक्षिणी लेबनान के दर्जनों अन्य गांवों के लोगों को खाली करने की चेतावनी देने के कुछ घंटों बाद हुआ.
बता दें कि इजरायल ने 2024 के युद्धविराम के बावजूद हिजबुल्लाह को निशाना बनाकर लेबनान में हमले जारी रखे हैं. उसने ईरान से जंग शुरू होने के बाद पिछले सप्ताह से लेबनान में लगातार कई हमले किए और ईरान समर्थित समूह (हिजबुल्लाह) के हमले के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में जमीनी सेना भी भेजी हैं.
जंग में सफेद फॉस्फोरस का इस्तेमाल खतरनाक क्यों है?
मानवाधिकार अधिवक्ताओं का कहना है कि किसी जंग में हमले के लिए सफेद फॉस्फोरस का उपयोग अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध है. सफेद फॉस्फोरस एक ऐसा केमिकल है जो ऑक्सीजन के संपर्क में आने पर जल उठता है. इसका उपयोग स्मोकस्क्रीन (धुआं पैदा करने के लिए ताकी कुछ नजर न आए) बनाने और युद्धक्षेत्रों को रोशन करने के लिए किया जा सकता है. लेकिन जब इसका उपयोग हथियार के रूप में होता है तो यह इमारतों में आग लगा सकता है और मानव मांस को हड्डी तक जला सकता है. अगर इसके हमले से जीवित बच भी गए तो उन लोगों को संक्रमण और अंग या श्वसन विफलता का खतरा होता है, भले ही उनकी जलन छोटी हो.
एपी की रिपोर्ट के अनुसार ह्यूमन राइट्स वॉच के लेबनान रिसर्चर रामजी कैस ने कहा, "इजरायली सेना द्वारा आवासीय क्षेत्रों में सफेद फॉस्फोरस का गैरकानूनी उपयोग बेहद चिंताजनक है और इसके नागरिकों के लिए गंभीर परिणाम होंगे." रिपोर्ट के अनुसार इजरायली सेना ने टिप्पणी के अनुरोध का तुरंत जवाब नहीं दिया है. अतीत में, उसने कहा था कि वह सफेद फॉस्फोरस का उपयोग स्मोक स्क्रीन के रूप में करता है, न कि नागरिकों को निशाना बनाने के लिए.
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