ईरान ही नहीं, इन देशों में भी US Army ने किया है खतरनाक रेड और रेस्क्यू ; मौत से खेलनी पड़ी थी आंख मिचौली

अमेरिका ने ईरान से अपने जख्मी पायलट को रेस्क्यू कर लिया है. पहले भी US ने ऑपरेशन ईगल क्लॉ, प्राइम चांस, निफ्टी पैकेज और जेरोनिमो को अंजाम दिया है. कई मिशन ने सैनिकों की जांबाजी दिखाई.

विज्ञापन
Read Time: 7 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • अमेरिका ने ईरान में गिर चुके एफ-15ई फाइटर जेट के वेपन ऑफिसर को सरहद पार कर रेस्क्यू कर लिया है
  • इस तरह ही अमेरिकी ने पहले भी कई रेस्क्यू और रेड मिशन को अंजाम दिया है.
  • हालांकि कुछ मिशन असफल रहे लेकिन फौजियों की बहादुरी की वजह से आज भी याद किया जाता है.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

अमेरिका ने ईरान में गिर चुके फाइटर जेट के फौजी को रेस्क्यू कर लिया है. इस ऑपरेशन में सैकड़ों अमेरिकी कमांडो ने ईरानी सरहद लांघकर कर F-15E फाइटर जेट के वेपन ऑफिसर को बचा लिया. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस रेस्क्यू की आधिकारिक पुष्टि कर दी है. दुनिया के इतिहास में कई ऐसी जंगे हुईं जिन्होंने नक्शे बदल दिए, लेकिन कुछ मिशन ऐसे थे जो मौत के जबड़े से जिंदगी को छीन लाए. ये जान पर खेलने वाले ऐसे फौजियों की कहानियां है जिन्होंने सरहद पार जाकर ऑपरेशन को अंजाम दिया और कई ऑपरेशन में रेस्क्यू भी किया. इस आर्टिकल में जानेंगे दुनिया के वो 10 रेस्क्यू और रेड ऑपरेशन जो मौत को चकमा देकर आने के बराबर था और लगभग नामुमकिन था.  

इन ऑपरेशन्स ने दुनिया को बताया कि जब हौसले फौलादी हों, तो दुश्मन के घर में घुसकर हिसाब चुकता किया जाता है. हालांकि कुछ ऐसे मिशन भी थे जो भले ही नाकाम हो गए लेकिन फौजियों की जांबाजी की वजह से उसे आज भी याद रखा जाता है.

ऑपरेशन ईगल क्लॉ

1979 में ईरान के भीतर अमेरिकी बंधकों को छुड़ाने के लिए अमेरिकी 'डेल्टा फोर्स' को पहली बार मैदान में उतारा गया था. यह मिशन 'ऑपरेशन ईगल क्लॉ' के नाम से जाना जाता है. उस वक्त तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कब्जे के बाद 53 अमेरिकियों को कैद कर लिया गया था. फिर अमेरिका ने अपने सबसे बेहतरीन कमांडोज को वहां भेजा, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था.

रेगिस्तान में आए अचानक रेत के तूफान ने हेलिकॉप्टरों को भारी नुकसान पहुंचाया. हालात इतने बिगड़ गए कि राष्ट्रपति कार्टर को मिशन बीच में ही रोकने का आदेश देना पड़ा. 

वापसी के दौरान एक हेलिकॉप्टर और ईंधन भरने वाले जहाज के बीच टक्कर हो गई, जिससे कई जवान शहीद हुए और मिशन के गोपनीय दस्तावेज ईरानियों के हाथ लग गए. भले ही यह ऑपरेशन नाकाम रहा, लेकिन इसी ने बाद में 'सील्स टीम 6' जैसी घातक फोर्स को जन्म दिया.

Advertisement

ऑपरेशन प्राइम चांस

ईरान-इराक युद्ध के दौरान 1987 से 1989 के बीच अमेरिकी तेल टैंकरों पर खतरा मंडरा रहा था. इस दौरान नेवी सील्स ने 'ऑपरेशन प्राइम चांस' के जरिए फारस की खाड़ी में अपनी ताकत का लोहा मनवाया था. यह पहली बार था जब कमांडोज ने नाइट विजन तकनीक और इन्फ्रारेड उपकरणों का इस्तेमाल कर समंदर की सतह से महज 30 फीट ऊपर हेलिकॉप्टर उड़ाए थे.

21 सितंबर 1987 को जब ईरानी जहाज 'ईरान अज्र' समंदर में चोरी-छिपे माइंस बिछा रहा था, तब अमेरिकी टीम ने अंधेरे का फायदा उठाकर उन पर रॉकेट और मशीनी गनों से हमला बोल दिया. इसमें 5 ईरानी सैनिक मारे गए थे और 26 को बंदी बना लिया गया था.

Advertisement

ऑपरेशन निफ्टी पैकेज

दिसंबर 1989 में जब अमेरिका ने पनामा के तानाशाह मैनुअल नोरिएगा को सत्ता से बेदखल करने का मन बनाया, तो 'सील्स टीम 4' को एक खास जिम्मेदारी सौंपी गई. मिशन था नोरिएगा के निजी जेट को तबाह करना ताकि वह मुल्क छोड़कर भाग न सके. फिर ऑपरेशन के तहत, 48 कमांडोज पनामा सिटी के एक तटीय हवाई अड्डे पर खामोशी से दाखिल हुए.

लेकिन वहां पनामा की फौज पहले से ही मुस्तैद थी. इस वजह से चंद अमेरिकी फौजी और पनामा के भारी सेना के बीच गोलीबारी शुरू हो गई. इस मुठभेड़ में चार अमेरिकी सील्स कमांडोज मारे हुए और आठ जख्मी हुए थे. 

पनामा की ओर से मारे गए सैनिकों का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. हालांकि इस मिशन की भारी कीमत चुकाने के बावजूद, अमेरिकी कमांडोज ने 'CT4' एंटी-टैंक मिसाइल से उस जेट को उड़ा दिया. यह मिशन भले ही महंगा पड़ा, लेकिन इसने नोरिएगा के भागने के सारे रास्ते बंद कर दिए थे. इसे भी इतिहास के सबसे खतरनाक ऑपरेशन में से एक माना जाता है. 

यह भी पढ़ें: स्वदेशी मिसाइल और सेंसर सिस्टम... AI वीडियोज में देखिए- ईरान ने अमेरिकी विमानों को ऐसे मार गिराया

ऑपरेशन गोथिक सर्पेंट

सोमालिया में 1993 में ऑपरेशन 'ब्लैक हॉक डाउन' को अंजाम दिया गया. अकाल और गृहयुद्ध से जूझ रहे सोमालिया में जब 24 संयुक्त राष्ट्र सैनिकों की हत्या हुई, तो वहां के खूंखार वॉरलॉर्ड मोहम्मद फराह ऐदीद को पकड़ने का आदेश दिया गया. मिशन के दौरान अमेरिका के दो 'ब्लैक हॉक' हेलिकॉप्टर रॉकेट लॉन्चरों से गिरा दिए गए.

Advertisement

जमीनी हालात इतने खराब थे कि अमेरिकी जवान चारों तरफ से घिर चुके थे. ऐसे में अमेरिकी डेल्टा फोर्स के जवानों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए मोर्चा संभाला. 

इस भीषण लड़ाई में 18 अमेरिकी सैनिक मारे गए, लेकिन वे अपने साथियों को मलेशियाई सेना की मदद से सुरक्षित निकालने में कामयाब रहे. यह वियतनाम युद्ध के बाद सबसे भयानक आमने-सामने की लड़ाई मानी जाती है.

ऑपरेशन अर्जेंट फ्यूरी

1983 में ग्रेनाडा में तख्तापलट और कम्युनिस्टों के बढ़ते असर को रोकने के लिए अमेरिका ने 'ऑपरेशन अर्जेंट फ्यूरी' लॉन्च किया था. अमेरिकी डेल्टा फोर्स को एक पुराने किले में कैद राजनीतिक कैदियों को छुड़ाने का जिम्मा मिला. यह किला एक पहाड़ी पर था और वहां पहुंचने का रास्ता बेहद संकरा था.

Advertisement

जैसे ही कमांडोज वहां पहुंचे, ग्रेनाडा की सेना ने उन पर गोलियों की बौछार कर दी. हालात इतने खराब थे कि कुछ हेलिकॉप्टर पायलटों ने बिना आदेश के ही मिशन छोड़ दिया. 

हालांकि, बाद में सेना ने कंट्रोल हासिल किया, लेकिन पायलटों के इस पीछे हटने से डेल्टा फोर्स के जवान काफी नाराज हुए और उन्होंने उन पर कायरता के आरोप तक लगाए. हालांकि इस ऑपरेशन को सफल मान गया है, लेकिन कई अमेरिकी फौजियों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी.

ऑपरेशन एनाकोंडा

साल 2002 में अफगानिस्तान की शा-ए-कोट घाटी में छिपे तालिबानियों को जड़ से खत्म करने के लिए 'ऑपरेशन एनाकोंडा' शुरू किया गया. नेवी सील्स को दो ऊंची चोटियों पर ऑब्जर्वेशन पोस्ट बनाने के लिए भेजा गया था. लेकिन जब वे वहां पहुंचे, तो पता चला कि उन चोटियों पर पहले से ही तालिबान का कब्जा था.

इसे 'ताकुर घर की लड़ाई' या 'रॉबर्ट्स रिज' के नाम से जाना जाता है. यहां बर्फबारी और भीषण गोलाबारी के बीच अमेरिकी सील्स फोर्स और तालिबान के बीच सीधी जंग हुई. 

इस मिशन में 8 अमेरिकी सैनिक मारे गए. आखिरकार, चोटियों पर कब्जा तो कर लिया गया, लेकिन तालिबान ने इस इलाके में अमेरिकी सैनिकों को लगभग हार का स्वाद चखा दिया था.

यह भी पढ़ें: फाइटर जेट गंवाने के बाद आर-पार के मूड में अमेरिका, ईरान में उतारा सबसे घातक मिसाइलों का जखीरा; क्यों पड़ी जरूरत?

जेसिका लिंच का रेस्क्यू

2003 के इराक युद्ध में 19 साल की प्राइवेट जेसिका लिंच का रेस्क्यू सबसे ज्यादा चर्चा में रहा. लिंच को इराकी सेना ने एक हमले के बाद बंदी बना लिया था. 

मरीन, रेंजर्स और नेवी सील्स की एक संयुक्त टीम ने अस्पताल पर छापा मारकर जेसिका को वहां से निकाला और 8 अन्य अमेरिकी सैनिकों के शव भी बरामद किए.

इस मिशन को लेकर बाद में काफी विवाद और प्रोपेगेंडा की बातें भी हुईं, लेकिन एक घायल सिपाही को दुश्मन के इलाके से निकाल लाना अमेरिकी सेना के लिए बड़ी कामयाबी माना गया. जेसिका को बाद में सम्मान के साथ छुट्टी दे दी गई. 

यह भी पढ़ें: ईरान युद्ध में अलग-थलग पड़ गए ट्रंप? फ्रांस ने कह दी कड़वी बात, होर्मुज खुलवाने की प्लानिंग में अकेले जुटे ब्रिटेन-यूरोप

ऑपरेशन रेड विंग्स

2005 में अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में अमेरिकी सील टीम को तालिबानी नेता अहमद शाह को मारने के लिए भेजा गया. मिशन के दौरान टीम के सामने कुछ स्थानीय चरवाहे आ गए. कमांडोज के पास दो रास्ते थे या तो उन्हें मार दें या छोड़ दें. नियमों और नैतिकता के दबाव में उन्होंने चरवाहों को छोड़ दिया.

यही फैसला उनके लिए काल बन गया. उन चरवाहों ने तालिबान को खबर दे दी और 200 तालिबानियों ने अमेरिकी फौजियों को घेर लिया. उन्हें बचाने आए सात हेलिकॉप्टरों में से एक को गिरा दिया गया. हालांकि ये मिशन सफल नहीं हो सका था. 

ऑपरेशन जेरोनिमो

2 मई 2011 के दिन अमेरिकी सेना ने पाकिस्तान के एबटाबाद में घुसकर दुनिया के सबसे बड़े आतंकी ओसामा बिन लादेन को ढेर कर दिया था. महीने भर चले अभ्यास के बाद, दो खास तौर पर तैयार किए गए हेलिकॉप्टर आधी रात को सीमा पार कर पाकिस्तान में दाखिल हुए. इस ऑपरेशन को ऑपरेशन जेरोनिमो कहते हैं, हालांकि आधिकारिक तौर पर ऑपरेशन नेपच्यून स्पीयर के नाम से जाना जाता है.

40 मिनट चले इस ऑपरेशन में किसी भी अमेरिकी जवान को खरोंच तक नहीं आई. हाई-टेक फेशियल रिकॉग्निशन और बायोमेट्रिक्स का इस्तेमाल कर ये पक्का किया गया कि निशाना लादेन ही है.

यह भी पढ़ें: दुश्मन ईरान की जमीन से पायलट को अमेरिका ने कैसे किया रेस्क्यू, ट्रंप ने कहा-सबसे साहसी मिशन

Featured Video Of The Day
Iran War: Trump का बड़ा दावा, Strait of Hormuz खोलने की बात, Iran को Stone Age में भेजने की चेतावनी
Topics mentioned in this article