US और ईरान बातचीत में 'सरपंच' शहबाज कैसे हो गए फेल; पाकिस्तान की नौसिखिया डिप्लोमेसी ने डुबोई वार्ता की नैया?

अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता विफल रही, जिससे क्षेत्रीय युद्ध के खतरे बढ़ गए हैं. पाकिस्तान की मध्यस्थता अनुभवहीन और पक्षपातपूर्ण साबित हुई, जिससे उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठे.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता पूरी तरह बेनतीजा रही और क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ गया है
  • पाकिस्तान ने शांतिदूत की भूमिका निभाने का दावा किया पर उसकी कूटनीति ने वार्ता को डिरेल कर दिया
  • पाकिस्तान की अनुभवहीनता और निष्पक्षता के अभाव ने उसे वैश्विक शक्तियों के बीच कमजोर साबित किया
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

Islamabad Talks Failed: अमेरिका और ईरान के बीच की वार्ता पूरी तरह बेनतीजा साबित हुई. दुनिया जिस शांति की उम्मीद लगाए बैठी थी, वह अब एक भीषण क्षेत्रीय युद्ध के मुहाने पर खड़ी है इस पूरी कवायद में सबसे ज्यादा किरकिरी पाकिस्तान की हुई है. पाकिस्तान ने पूरे प्रकरण में खुद को 'शांतिदूत' के तौर पर पेश तो किया, लेकिन उसकी अनुभवहीन कूटनीति ने पूरी वार्ता को ही डिरेल कर दिया. 

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर जिस मध्यस्थता का डंका पीट रहे थे, वह असल में पाकिस्तान की एक ऐसी कूटनीतिक लाचारी बनकर उभरी, जिसने वाशिंगटन के सामने इस्लामाबाद को पूरी तरह बौना साबित कर दिया था.

अमेरिकी का कहना है कि उन्होंने काफी लचीला रुख अपनाया था, लेकिन ईरान अपनी शर्तों से टस से मस नहीं हुआ. दूसरी ओर ईरान का कहना है कि अमेरिका बातचीत की मेज पर वो सब कुछ हासिल करना चाहता था, जो वह जंग के मैदान में नहीं जीत पाया. इस खींचतान के बीच सबसे बड़ा सवाल पाकिस्तान की भूमिका पर है. 

अनुभवहीनता का शिकार हुई इस्लामाबाद की मध्यस्थता?

पाकिस्तान के पास इस तरह की जटिल और बेहद संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं को संभालने का कोई ठोस कूटनीतिक इतिहास नहीं है. अमेरिका और ईरान जैसे धुर विरोधियों को एक मंच पर लाना किसी खेल से कम नहीं था, लेकिन शहबाज सरकार ने इसे एक इवेंट की तरह लिया.

जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान इस पूरे मामले की गंभीरता को भांपने में नाकाम रहा जब बात वैश्विक शक्तियों की होती है, तो वहां शब्दों का चयन और निष्पक्षता की साख सबसे जरूरी होती है. पाकिस्तान के पास इसी निष्पक्षता का अभाव दिखा. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: बुरी खबर है, ईरान ने हमारी शर्तें नहीं मानी, बातचीत रही बेनतीजा : अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस

पाकिस्तानी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने इस बात का सबूत दे दिया पाकिस्तान अमेरिका और ईरान को बराबर नहीं देख रहा है. बीते दिनों मुनीर ने अमेरिका राष्ट्रपति जेडी वेंस का स्वागत सूट पहन कर किया था और वहीं ईरानी डेलिगेशन को फौजी लिबास में मिलने गए थे.

इसपर सवाल उठे थे कि पाकिस्तान दोनों देशों को लेकर निष्पक्ष नहीं है. गौरतलब है कि पाकिस्तान और ईरान में बीते सालों सरहद को लेकर तनाव भी रहा है और मिसाइल दागने जैसी नौबत तक आ गई थी.

Advertisement

आर्थिक बदहाली से जूझ रहे पाकिस्तान की गर्दन अमेरिका के कर्ज तले दबी है ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी था कि क्या पाकिस्तान वास्तव में एक निष्पक्ष 'रेफरी' की भूमिका निभा रहा था या वह केवल एक पोस्टमैन बनकर रह गया था. 

अमेरिका के सामने लाचार दिखे शहबाज और मुनीर

इस पूरी वार्ता में पाकिस्तान की स्थिति एक सशक्त मध्यस्थ के बजाय महज एक 'सुविधा प्रदाता' (Facilitator) जैसी रही. अमेरिका के दबाव के सामने पाकिस्तानी नेतृत्व इतना कमजोर दिखा कि वह ईरान को किसी भी ठोस समझौते के लिए आश्वस्त नहीं कर सका.

वार्ता के नाकाम होने का सीधा मतलब है कि अब मिडिल ईस्ट में फिर से अशांति की लपटें तेज हो सकती हैं. अमेरिका के सामने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर लाचार दिखे.

यह भी पढ़ें: अमेरिका-ईरान की वार्ता फेल तो अब होर्मुज का क्या होगा... 4 प्वाइंट्स में समझें इसका मतलब

Featured Video Of The Day
'बुरी खबर है, Iran ने हमारी शर्तें नहीं मानी, बातचीत रही बेनतीजा': US VC JD Vance | Iran US war
Topics mentioned in this article