न रूस से दोस्ती काम आई न चीन से रिश्ते... खामेनेई को घर में घुसकर मार गया अमेरिका

तेहरान में अमेरिकी-इजरायली हमले में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद रूस और चीन ने सीधे सैन्य हस्तक्षेप से किनारा कर लिया है, जिससे रणनीतिक साझेदार होने के बावजूद ईरान वैश्विक मंच पर अलग-थलग नजर आ रहा है.

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  • ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की अमेरिका और इजरायल के हमले में तेहरान में मौत हो गई
  • रूस और चीन ने ईरान के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप से परहेज करते हुए कूटनीतिक रवैया अपनाया
  • रूस और चीन दोनों ही ईरान के बड़े रणनीतिक साझेदार हैं
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ईरान के सबसे सुरक्षित शहर तेहरान में इजरायल और अमेरिका ने जमकर बमबारी की. इजरायल के इन ताबड़तोड़ हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई. वो तेहरान में अपने दफ्तर में काम कर रहे थे. अमेरिका और इजरायल ने जिस तरह ईरान में घुसकर वहां के सुप्रीम लीडर की हत्या कर दी, उसने दुनिया सन्न रह गई. ईरान रूस और चीन को अपना दोस्त समझता है. उसे गुरूर था पुतिन के साथ का और चीन के कवच का, लेकिन जब अमेरिका ने तेहरान के कलेजे में घुसकर वार किया, तो न क्रेमलिन की तोपें गरजीं और न बीजिंग का ड्रैगन बीच में आया. खमेनेई की मौत ने एक झटके में बता दिया कि महाशक्तियों की दोस्ती के मायने बहुत अलग होते हैं. ईरान इस समय अलग-थलग दिख रहा है.

ईरान के चीन और रूस के साथ अच्छे संबंध माने जाते हैं. जहां रूस सैन्य और रणनीतिक रूप से साथ देता है, वहीं चीन ईरान का सबसे बड़ा आर्थिक सहारा है. हालांकि अभी जिस संकट में ईरान है, अभी उसे सबसे ज्यादा इन देशों की जरूरत है. लेकिन रूस और चीन दोनों ने सीधे सैन्य हस्तक्षेप से परहेज किया है.

रूस के साथ हथियारों की करता है डील 

रूस के साथ ईरान के पिछले दशक में रिश्ते काफी मजबूत हुए हैं. खासतौर पर पश्चिमी प्रतिबंधों के खिलाफ दोनों देश एक दिखे. ईरान ने यूक्रेन युद्ध में रूस को ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों की आपूर्ति की. बदले में रूस ने ईरान को आधुनिक सैन्य तकनीक, पायलट प्रशिक्षण विमान (Yak-130) और हमलावर Mi-28 हेलीकॉप्टर दिए. इसके अलावा 2015 से रूस और ईरान ने सीरिया में बशर अल-असद की सरकार को बचाने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर काम किया है. जनवरी 2025 में दोनों देशों ने 20 साल के व्यापक रणनीतिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए. दिसंबर 2025 में ईरान ने रूस से 500 Verba MANPADS एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने का समझौता भी किया.

हालांकि रूस ने इस हमले को बेहद गंभीर बताया है और इसे क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करने वाला कदम करार दिया है.रूस ने कहा कि ईरान पर हमला करके अमेरिका ने अपना ‘असली रंग' दिखाया है. रूसी विदेश मंत्रालय ने इसे "एक संप्रभु देश और संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राज्य के खिलाफ पूर्व-नियोजित और बिना उकसावे वाला सशस्त्र हमला" बताया है.

सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाला चीन भी नहीं आया आगे

रूस के साथ चीन भी ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार और तेल का मुख्य खरीदार है. 2021 में चीन और ईरान ने एक 25 साल के सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और सुरक्षा में अरबों डॉलर के निवेश की योजना है. अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद, चीन ईरान से भारी मात्रा में तेल खरीदता है, जो ईरानी अर्थव्यवस्था के लिए लाइफ लाइन का काम करता है. इसके अलावा चीन ने UNSC में हमेशा ईरान के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों का विरोध किया है और परमाणु वार्ता में उसका साथ दिया है.

अब तो इतिहास लिखा जा चुका है. रूस की मिसाइलें और चीन के अरबों डॉलर भी खामेनेई को नहीं बचा सके. तेहरान की गलियों में गूंजता गम एक नए युग की आहट है. ईरान ने कहा है कि वो ऐसा पलटवार करेगा जो पहले कभी नहीं हुआ. अब ये जंग कहां तक जाएगी ये तो देखना होगा. लेकिन ये बात साफ है कि इस नए ग्लोबल ऑर्डर में सिर्फ वही सुरक्षित है, जो अपने दम पर खड़ा है. 

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