अमेरिका के हमलों के बावजूद अब भी मजबूत ईरान, 70% मिसाइल तैयार, अंडरग्राउंड मिसाइल सिटी से निकाल रहा हथियार

अमेरिका के साथ चली जंग में हुए नुकसान के बावजूद ईरान तेजी से अपनी क्षमता को और भी बढ़ा रहा है, ऐसा माना जा रहा है कि ईरान अपने ड्रोन जखीरे का 70 प्रतिशत हिस्सा तक वापस हासिल कर सकता है और ऐसा तभी मुमकिन है जब अब भी ईरान का ड्रोन प्रोडक्शन जारी है.

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  • ईरान ने अमेरिकी हमलों के बावजूद ईरान के पास अभी भी अपने ड्रोन जखीरे का करीब 40% हिस्सा मौजूद है.
  • ईरान ने अपनी अंडरग्राउंड मिसाइल सिटी से हथियारों को निकालना शुरू कर दिया है और सैन्य ताकत बढ़ा रहा है.
  • अप्रैल 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के पास करीब 70% बैलिस्टिक मिसाइलें बची हैं.
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ईरान ने साफ कर दिया है कि उसकी सैन्य ताकत को कम आंकना बड़ी भूल होगी. सीजफायर से पहले ईरान ने इस बात को साबित कर दिया है कि उसका जखीरा बहुत बड़ा है. युद्धविराम से पहले जब जंग जारी थी, तब ईरान की मिसाइलों और ड्रोन्स ने अपनी ताकत दिखाई. अमेरिका कहता रहा है कि जंग में ईरान के ड्रोन और मिसाइल भंडारों को उसने करीब-करीब खत्म कर दिया. हालांकि अमेरिका ने ये जो 'करीब-करीब' का इस्तेमाल किया, वो अपने आप में बहुत कुछ बयां करता है.

कुछ रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के मिसाइलों के जखीरे में कोई बड़ी कमी नहीं आई है. अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर चल रहा है, लेकिन इस बीच ईरान अपनी सैन्य शक्ति और भी बढ़ा रहा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के पास अभी भी बड़ा ड्रोन और मिसाइलों का बड़ा जखीरा मौजूद है. जानकार कहते हैं कि बीते 3-4 दशकों से ईरान इसी दिन की तैयारी कर रहा था, लिहाजा उसकी तैयारी इतनी मुकम्मल होना लाजमी है. 

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ड्रोन जखीरे का 40 फीसदी मौजूद!

अब खबर आई है कि ईरान ने अपनी अंडरग्राउंड मिसाइल सिटी से हथियारों को निकालना शुरू कर दिया है. कई हफ्तों की जंग के बावजूद ईरान की सैन्य ताकत का बड़ा हिस्सा अब भी बचा हुआ है. ईरान के पास अभी भी अपने ड्रोन जखीरे का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा मौजूद है. अमेरिका-इजरायल ने मिलकर भले सैंकड़ों हमले ईरान पर किए हों, लेकिन ईरान की 60 प्रतिशत से ज्यादा मिसाइल लॉन्चर भी सक्रिय हालत में हैं.

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Photo Credit: AFP

अपनी क्षमता बढ़ाने में जुटा ईरान 

अमेरिका के साथ चली जंग में हुए नुकसान के बावजूद ईरान तेजी से अपनी क्षमता को और भी बढ़ा रहा है, ऐसा माना जा रहा है कि ईरान अपने ड्रोन जखीरे का 70 प्रतिशत हिस्सा तक वापस हासिल कर सकता है और ऐसा तभी मुमकिन है जब अब भी ईरान का ड्रोन प्रोडक्शन जारी है. यानी जब आप यह खबर पढ़ रहे हैं, उस समय ईरान के किसी कोने में, किसी कारखाने में एक के बाद एक 'शाहेद-136' ड्रोन बन रहे हैं. 

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने भी इसे लेकर हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल और अमेरिका के साथ जारी युद्ध के बावजूद ईरान ने अपनी सैन्य ताकत का बड़ा हिस्सा बचा रखा है और सीजफायर के बीच वो इस ताकत और भी बढ़ाकर युद्ध में लड़ने के लिए खुद को और भी मजबूत कर रहा है.दोनों पक्षों के बीच अब भी लगातार बयानबाजी जारी है, वो भी तब, जब जल्द ही इस्लामाबाद में उनके बीच एक शांति वार्ता प्रस्तावित है.

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बची हैं 70% बैलिस्टिक मिसाइलें!

अप्रैल 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के पास करीब 70% बैलिस्टिक मिसाइलें बची हैं, साथ ही मिसाइल लॉन्चर्स भी अभी भी चालू हालत में हैं. ईरान का ड्रोन बेड़ा मिसाइलों की तुलना में ज्यादा प्रभावित हुआ है. बावजूद इसके, ड्रोन्स का करीब 40% हिस्सा अभी भी बचा हुआ है. ईरान की मिसाइल सिटीज और पहाड़ों के नीचे बनी सुरंगें मिसाइलों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. कई लॉन्चर्स जो हमलों में दब गए थे, उन्हें ईरान फिर से निकाल रहा है. ईरान के पास अभी भी हजारों मध्यम और कम दूरी की मिसाइलें मौजूद हैं. अगर फिर से युद्ध भड़का तो इनका इस्तेमाल वो खाड़ी देशों पर कर सकता है. 

ड्रोन क्षमता को 10 गुना बढ़ाने का दावा 

इस बीच ईरान ने अमेरिका को भी चेतावनी दे चुका है कि ईरान लंबे युद्ध के लिए तैयार है. ईरानी सैन्य प्रवक्ता साथ इब्राहिम जोल्फागारी ने कहा कि ईरान किसी भी जमीनी आक्रमण के लिए तैयार है और इसे पूरी तरह विफल कर दिया जाएगा. साथ ही ईरान ने होर्मुज पर भी अपना कड़ा रुख बरकरार रखा है. उसने अपनी ड्रोन उत्पादन क्षमता को 10 गुना तक बढ़ाने का दावा किया है. ईरान इस वक्त अपनी मिलिट्री कमांड के स्ट्रक्चर को मजबूत करने और मलबे के नीचे दबे मिसाइल लॉन्चर्स को फिर से सक्रिय करने में लगा है. ईरान इस बात के लिए तैयारी कर रहा है कि अगर  फिर से युद्ध शुरू हुआ, तो उसे हमला करना होगा. 

22 अप्रैल को ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर खत्म होने की संभावना है. इससे पहले दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर बातचीत को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं. अब देखना ये है कि बातचीत से कोई रास्ता निकलेगा या फिर जंग दोबारा छिड़ेगी.

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