- ईरान ने इजरायली हवाई हमलों में तबाह हुए रेलवे के चार पुलों को मात्र चालीस घंटों में फिर तैयार किया
- प्रीकास्ट डेक्ड बल्ब टी-कंक्रीट गर्डर्स तकनीक से पुलों के मुख्य ढांचे पहले कारखानों में बना लिए गए थे
- पुलों के हिस्सों को युद्ध स्तर पर असेंबल करने के लिए ईरानी सेना, इंजीनियरों और वर्कर्स ने मिलकर काम किया
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चली 40 दिनों की भीषण जंग ने इंफ्रास्ट्रक्टर को भारी नुकसान पहुंचाया है. इजरायली हवाई हमलों में ईरान के कई रेलवे पुल तबाह हो गए. इन पुलों के जरिए ईरान में रेलवे कनेक्टिविटी थी. सीजफायर के बाद ईरान फिर से इन पुलों को बनाने में जुटा है. इस बीच ईरान ने कुछ ऐसा कारनामा दिखाया है, जिससे दुनिया हैरान रह गई. जहां एक पुल बनाने में महीनों और सालों लगते हैं, वहीं ईरान ने हमलों में तबाह हुए रेलवे के चार पुलों को महज 40 घंटों में फिर से तैयार कर दिया. आखिर ईरान ने ये पुल दोबारा कैसे खड़े? आइए बताते हैं.
ईरान ने कैसे फिर से तैयार किए पुल?
ईरान की सेना और इंजीनियरों ने इन तबाह हो चुके पुलों को फिर से खड़ा करने के लिए दिन रात एक कर दिए. इसके लिए ईरानी इंजीनियरों ने प्रीकास्ट डेक्ड बल्ब टी-कंक्रीट गर्डर्स तकनीक का इस्तेमाल किया. जहां सामान्य पुलों में कंक्रीट को साइट पर ढालना पड़ता है, जिसे सूखने और मजबूत होने में हफ्तों लगते हैं. वहीं ईरान ने इसके उलट बल्ब टी-गर्डर्स के जरिए कुछ ही घंटों में पुल तैयार किए. गर्डर पुल के मुख्य ढांचे होते हैं, जिन्हें पहले ही कारखानों में बना लिया जाता है. इनका निचला हिस्सा बल्ब जैसा गोल होता है, जो इसे कम वजन में भी मजबूती देता है. इन्हीं गर्डर और डेक को साइट पर असेंबल किया गया. इससे निर्माण में लगने वाले महीनों का समय घंटों में बदल गया.
पहले से कर ली थी तैयारी
ईरान ने इमरजेंसी स्थिति को ध्यान में रखकर पहले ही कारखानों में पुलों के हिस्से तैयार कर लिए थे. इन हिस्सों को ईरान की जरूरी रेलवे लाइनों के पास भंडार में रखा गया. इजरायली हमले में दक्षिणी ईरान से मशहद तक के रेलवे ट्रैक पर चार पुल तबाह हुए. ईरान ने तुरंत भारी क्रेनों और ट्रकों की मदद से युद्ध स्तर पर काम शुरू किया और 40 घंटे में इस रेलवे ट्रैक को फिर से चालू कर लिया.
सेना से लेकर इंजीनियरों की फौज ने संभाला मोर्चा
भले ही पुल के हिस्से पहले से बने हुए थे, लेकिन इनको असेंबल करना भी आसान टास्क नहीं था. इसके लिए ईरानी सेना, IRGC, इंजीनियर और तमाम वर्कर्स ने मिलकर युद्ध स्तर पर काम किया. सबसे पहले हमले के बाद बिखरे मलबे को साफ किया गया. इसके बाद भारी क्रेनों की मदद से प्रीकास्ट गर्डर्स को एक-एक करके पुरानी जगह पर असेंबल किया गया. गर्डर्स के बीच के जोड़ों को मजबूत स्टील बोल्ट्स से लॉक किया गया और ऊपर से रेलवे ट्रैक बिछाया गया. इस टीम वर्क ने दिन-रात काम किया और इसी का नतीजा है कि महज कुछ घंटों में रेलवे ट्रैक फिर से तैयार हो गया.
भारतीय सेना भी कर चुका है ऐसा कारनामा
हमारे भारत की सेना के जांबाज भी ऐसा ही कारनामा कर चुके हैं. पिछले साल जब उत्तराखंड के धराली में आपदा आई थी, तब लोगों को बचाने के लिए भारतीय सेना ने एक रात में अस्थाई पुल बनाकर तैयार कर दिया था. दरअसल धराली में गंगोत्री नेशनल हाईवे को जोड़ने वाला पुल टूट गया था. ऐसे में दूसरी ओर कई लोग फंस गए. इसके बाद भारतीय सेना एक्शन में आई और बेली ब्रिज को बनाया. यह पुल अस्थाई भले ही था लेकिन इतना मजबूत था कि सेना के ट्रक भी आसानी से एक तरफ से दूसरी तरफ जा पा रहे थे. इस पुल के बनने के बाद एनडीआरएफ भी रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर पाई.
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