ईरान में प्रदर्शन पर आयतुल्लाह खामनेई की दो टूक- जनता ही देगी दुश्मनों को जवाब

ईरान में प्रदर्शन के बीच देश के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्लाह खामनेई ने कहा है कि ईरान की जनता ही दुश्मनों को जवाब देगी. खामनेई ने कहा कि प्रदर्शनकारी की शक्ल में दंगाई आए हुए हैं.

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आयतुल्लाह खामनेई (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:

आयतुल्लाह खामनेई के ईरान छोड़ जाने की अफवाह के बीच आयतुल्लाह खामनेई की हाल ही में लोगों के साथ स्पीच में सारे हाल के मुद्दे सामने आ गए हैं. साथ ही आयतुल्लाह खामनेई ने अपने दुश्मनों के खिलाफ भी हुंकार भरी है और इशारों में कह दिया कि हम ईरान की जनता के साथ खड़े हुए हैं और आवाम ही दुश्मनों के खिलाफ लड़ेगी.

हम दुश्मन के सामने हरगिज़ नहीं झुकेंगे- खामनेई

आम जनता से बात करते हुए खामनेई ने कहा कि हम खुदा पर पूरा भरोसा करते हैं और उसी से ही उम्मीद लगाते हैं. आवाम के साथ का यकीन करते हुए. इंशाल्लाह हम दुश्मन को घुटने टेंकने पर मजबूर कर देंगे.हम दुश्मन के सामने हरगिज़ नहीं झुकेंगे. इनके ये कहते ही वहां बैठी आम जनता ने आयतुल्लाह खामनेई जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए और अमेरिका और इज़रायल के खिलाफ नारे लगाने लगे. उन्होंने कहा कि दुकानदारों और आम लोगों की दिक्कतें वास्तविक हैं.

प्रदर्शनकारियों और 'दंगाइयों' में अंतर

आयतुल्लाह खामनेई ने अपनी स्पीच में प्रदर्शन करने वाले दो प्रकार के लोग बताए हैं. एक वो जो शांतिपू्र्ण प्रदर्शन करना चाहते हैं. जिनसे बात करना जरूरी है. वहीं दूसरे प्रदर्शनकारी की शक्ल में दंगाई आए हुए हैं. जो अशांति फैला रहे हैं.

सरकार आर्थिक समस्याओं पर काम कर रही है

आयतुल्लाह खामनेई ने कहा कि राष्ट्रपति और वरिष्ठ अधिकारी देश के आर्थिक संकट को हल करने के लिए काम कर रहे हैं.यह  भी कहा गया कि प्रतिबंधों ने हालात और कठिन बना दिए हैं. 

ईरान में रहने वाले लोगों का क्या कहना है

अल मुस्तफा यूनिवर्सिटी के स्कॉलर जमीर जाफरी कहते हैं कि ईरान की जनता एकजुट है. कुछ लोग है जो दुश्मन देशों से मिलें हुए हैं और वहीं शांति को तोड़ना चाहते हैं. आर्थिक परेशानियां जरूर है जिसका जल्द समाधान किया जाएगा. इसी हफ्ते ये घोषणा की गई है कि 10 लाख तोमान हर ईरानी नागरिक के अकाउंट में ट्रांसफर किए जाएंगे. जिससे महंगाई पर कंट्रोल किया जाए. वहीं रिजर्व बैंक के चीफ को बदला जा चुका है. इकॉनमी न्यू पॉलिसी लाई गई है. ईरान की आर्थिक स्थिति इसलिए खराब है क्योंकि अमेरिका ने डॉलर को कंट्रोल किया हुआ है. लेकिन ईरानी लोग सब जान चुके हैं.ये भी एक जंग का हिस्सा है. जल्द ही ये सब परेशानी दूर हो जाएगी. 


भारत से भी उठी आयतुल्लाह खामनेई के समर्थन में आवाज

भारत में शिया नेता शमील शम्सी का कहना है कि अमेरिका और इजरायल दुनिया में अपनी हुकुमत चाहते हैं. यूएस ने जिस तरह से अभी वेनेजुएला में भी अपना दबदबा दिखाया. वहीं ईरान में जबसे इस्लामिक क्रांति हुई है तबसे ही वहां पर कभी आतंकी हमला, कभी बम ब्लास्ट आदि होता रहा है और उनकी कोशिश है कि यहां पर तख्तापलट हो. यहां तक की ईरान में खुद ही कुछ लोग आयतुल्लाह खामनेई के खिलाफ हो लेकिन ज्यादातर जनता आयतुल्लाह खामनेई के साथ है. ईरान ने ये दिखा दिया कि तरक्की के साथ साथ यहां पर इस्लामिक निज़ाम किस तरह का होता है वो भी दिखा दिया.. सउदी अरब के हिजाब के उपर कभी भी यूएस ने विरोध नहीं किया लेकिन ईरान के हिजाब पर हमेशा किया. वो सिर्फ इसलिए विरोध करते हैं क्योंकि ईरान में हिजाबी लड़कियां  जिनमें 1 लाख से ज्यादा वैज्ञानिक है तो 5 लाख से ज्यादा हिजाबी महिला डॉक्टर हैं. 10 लाख से ज्यादा लड़कियां फौज समेत पुलिस आदि में है. जिससे ईरान ने दिखा दिया कि हिजाब कभी तरक्की के आड़े नहीं आया है. और यहीं वजह से आयतुल्लाह खामनेई के साथ ज्यादातर हर ईरानी साथ खड़े हैं और जो लोग तख्तापलट का ख्वाब देख रहे हैं वो उनका अधूरा ही रहेगा.

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ईरान में खामनेई को न धमकाएं अमेरिका - ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड

ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने भी अमेरिका को खुली चुनौती दे दी है. उन्होंने कहा कि जिस तरह उन्होंने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को किडनेप कर लिया था .. उस तरह वो ईरान में करने की ज़रा सी भी गल्ती ना करें..क्योंकि दूसरे देश और है लेकिन ईरान कुछ और है. ईरान वो है जिसके अंदर करबला का जज़्बा भरा पड़ा हुआ है. जहां अमेरिका और इंग्लैंड की पूरी ताकत थी वहां 40 साल पहले आयतुल्लाह खुमैनी ने ईरान में उनकी सत्ता को खत्म कर दिया था. वहीं हाल आयतुल्लाह खामनेई अमेरिका और इज़रायल का करेंगे. अगर गलती से भी आयतुल्लाह खामनेई या ईरान की तरफ हमला करने का सोचा तो पूरी दुनिया का शिया अमेरिका के खिलाफ खड़ा होगा. साथ ही यासूब अब्बास ने आयतुल्लाह खामनेई के 20 लोगों के साथ देश छोड़ने पर भी मीडिया रिपोर्ट्स को आढ़े हाथ लिया. उन्होंने कहा कि वो एक शेर है. उन्होने कई जंगें देखी है. कई जंग में वो खुद शामिल थे. यहां तक की 12 दिन इज़रायल से जंग में भी वो खुद ईरान में ही रहे और खुले में आकर जुमे की नमाज़ तक दुनिया के सामने पढ़ाई तो कैसे ये मुमकिन है कि वो देश छोड़कर भाग जाए. 

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