ईरान ने सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी अरामको पर किया ड्रोन अटैक

US-Israel War against Iran: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच के संघर्ष से पूरे खाड़ी क्षेत्र में शांति बिगड़ गई है. तेल उत्पादन से जुड़े एक प्रमुख ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमला तेल बाजारों के लिए एक बुरे सपने जैसा है.

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Iran's Drones Hit Aramco Oil Refinery: सऊदी अरब की अरामको तेल रिफाइनरी पर ड्रोन अटैक
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  • सऊदी अरब की अरामको कंपनी ने रास तनुरा तेल रिफाइनरी को ड्रोन हमलों के बाद अस्थायी रूप से बंद कर दिया है
  • रास तनुरा रिफाइनरी सऊदी अरब की सबसे बड़ी रिफाइनरी है, जो प्रतिदिन पांच लाख पचास हजार बैरल तेल रिफाइन करती है
  • ड्रोन हमलों के कारण रिफाइनरी में आग लगी थी, जिसे अधिकारीयों ने नियंत्रण में कर लिया है और आग बुझा दी गई है
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अमेरिका और ईरान के बीच जंग की आग सऊदी के तेल रिफाइनरी तक पहुंच गई है. रॉयटर्स और ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको ने सोमवार को अपनी रास तनुरा तेल रिफाइनरी को ड्रोन हमलों के बाद बंद कर दिया है. एपी की रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उनकी सेना ने रिफाइनरी की ओर आने वाले एयरक्राफ्ट (ड्रोन) को मार गिराया है. सऊदी सैन्य प्रवक्ता ने वहां की सरकारी सऊदी प्रेस एजेंसी पर यह घोषणा की.

रास तनुरा तेल रिफाइनरी सऊदी अरब की सबसे बड़ी रिफाइनरी में से एक है और प्रति दिन 550,000 बैरल कच्चे तेल को रिफाइन कर सकती है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक एक अधिकारी ने बताया है कि अरामको की रास तनुरा रिफाइनरी को एहतियात के तौर पर बंद कर दिया गया है. अधिकारी ने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है और आग बुझा ली गई है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में ड्रोन हमले के कारण अरामको रास तनुरा तेल रिफाइनरी से धुएं का गहरा गुबार निकलता हुआ दिखाई दे रहा है. अभी इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि स्वतंत्र तौर पर NDTV नहीं कर सकता है.

तेल के दाम छू रहे आसमान

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला किया और पूरे खाड़ी क्षेत्र में जंग शुरू हो गई. इसके बाद लंदन में कच्चा तेल 9.7% अधिक की महंगी कीमत पर कारोबार कर रहा था. ऐसे में अब तेल उत्पादन से जुड़े एक प्रमुख ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमला तेल बाजारों के लिए एक बुरे सपने जैसा है. तनाव बढ़ने के कारण महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से समुद्री यातायात पहले से ही बंद है.

ऐसी परिस्थिति में ऊर्जा बाजार अब लंबे समय तक अस्थिरता के लिए तैयार हैं. खाड़ी से निर्यात में कोई भी लंबी रुकावट- विशेष रूप से यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद रखा जाता है - तो वैश्विक मांग बढ़ने के साथ ही आपूर्ति में कमी आ सकती है, जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ सकती है.

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